उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम अधिकारी चालकों को परखने के बाद भर्ती करने के दावे चाहें जितना कर लें। जमीनी सच उससे इतर है। कह सकते हैं, अप्रशिक्षित चालकों के हाथ में स्टेयरिंग थमाकर संबंधित विभाग अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहा है। चालकों की कमी के कारण बसों का संचालन पूरी तरह नहीं हो पा रहा है। ट्रक, टेंपो, आटो, लोडर, डंपर चलाने वालों को भर्ती कर लिया जा रहा है। यातायात के नियम न जानने वाले चालकों के कारण बस हादसे भी बढ़ गए हैं।
कानपुर परिक्षेत्र की बात की जाए तो इस परिक्षेत्र में छह सौ से अधिक बसें हैं। जिनके लिए 12 सौ से अधिक चालक और इतने ही परिचालक चाहिए। इस परिक्षेत्र में कुल 1873 नियमित कर्मचारी हैं। जिनमें संविदा चालक 776 और संविदा परिचालकों की संख्या 800 है।
रोडवेज ट्रेनिंग सेंटर विकास नगर में नियमित चालकों की भर्ती होती है। उन्हीं चालकों को भर्ती किया जाता है जिन्हें क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय से स्वीकृत दी जाती है।
इस संबंध में रोडवेज संयुक्त परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष अरविंद कुरील का कहना है कि मानक की अनदेखी हो रही है।
मौज में नियमित कार्मिक
रोडवेज के पास जो पुराने परफेक्ट चालक हैं, उनमें 40 प्रतिशत से अधिक मार्ग पर नहीं जाते। ये कार्यालय, डिपो, बस अड्डे पर ही कार्यरत हैं। इनमें अधिकतर लोगों ने अपने आपको अक्षम साबित करा लिया है।
दूसरी ओर संविदा चालकों को प्रति किमी के हिसाब से पारिश्रमिक मिलती है तो ये चालक यही सोचते हैं कि लंबी दूरी की ड्यूटी लग जाए ताकि उन्हें ज्यादा पारिश्रमिक मिल जाए। लेकिन कई चालक ऐसे हैं जो 1000 किमी तक बस चलाकर आए और उन्हें दो तीन घंटे रेस्ट के बाद फिर रवाना कर देते हैं।
लाइसेंस में भी फर्जीवाड़ा
रोडवेज ट्रेनिंग सेंटर विकास नगर के प्रधानाचार्य धनजी राम का कहना है कि कई ऐसे चालक आते हैं जिनका लाइसेंस पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा आरटीओ से बना होता है, जिनकी पुष्टि करना आसान नहीं होता। जो लाइसेंस पकड़ में आ जाते हैं, उन्हें निरस्त कर दिया जाता है।
नौकरी जाने का खतरा नहीं
रोडवेज की बस चलाने वाला चालक संतुष्ट होता है कि चाहे जितना बड़ा हादसा करके आये, उसकी नौकरी नहीं जाएगी।
दरअसल हादसा होने पर अगर चालक की नौकरी चली गयी तो वह दूसरे परिक्षेत्र में भर्ती हो जाता है।
रोडवेज अधिकारियों के पास भी कोई ऐसा मापक नहीं है जिससे वह समझ लें कि ये किसी परिक्षेत्र में चालक था।
क्या बोले अधिकारी:
‘जो नियमित चालक कार्यालय, डिपो, बस अड्डे या अन्य कहीं लगे हैं, उनकी सूची तैयार है। उन्हें ड्यूटी पर जाने के निर्देश दिए गए हैं। जो चालक ड्यूटी पर नहीं जाएंगे उनपर सख्त कार्रवाई होगी। जिन चालकों को भर्ती किया जाता है, उनके कई प्रकार के टेस्ट होते हैं, कागजों की जांच होती है।’
-नीरज सक्सेना, क्षेत्रीय प्रबंधक, कानपुर परिक्षेत्र







