रद्द की सैन्य अधिकारियों की वार्ता
नई दिल्ली, 26 सितम्बर 2018: चीन और अमेरिका में एक बार फिर अहम् मुद्दों के लेकर विवाद सामने आया है। चीन ने अमेरिका के साथ सैन्य वार्ता रद्द कर दी है। अमेरिका ने चीन के रूस से लड़ाकू जेट विमान और मिसाइल खरीदने के कारण उसकी एक सैन्य एजेंसी को प्रतिबंधित कर दिया है जिससे नाराज होकर चीन ने अमेरिकी राजदूत को तलब किया है और सैन्य समझौता रद्द करने की घोषणा की है।
मीडिया ख़बरों के अनुसार विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके कहा है कि उप विदेश मंत्री झेंग जेगुआंग ने अमेरिकी राजदूत टेरी ब्रानस्टाड को समन करके अपनी एक सैन्य एजेंसी और उसके निदेशक को प्रतिबंधित करने के अमेरिकी कदम के खिलाफ नाराजगी जतायी और सैन्य वार्ता रद्द करने की बात कही।
झेंग ने कहा कि अमेरिका के दौरे पर गए नौसेना प्रमुख शेन जिलांग को वापस बुला लिया जाएगा और अगले सप्ताह बीजिंग में प्रस्तावित चीन और अमेरिकी सैन्य अधिकारियों की वार्ता को रद्द किया जाता है। बयान में यह भी कहा गया है कि अमेरिका के इस कदम के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने का चीन के पास पूरा अधिकार है। चीन के सैन्य प्रवक्ता डब्ल्यू क्यूआन ने कहा, रूस से लडाकू जेट विमान और मिसाइल का सौदा दो संप्रभु देशों के बीच सहयोग के लिए उठाया गया बेहद सामान्य कदम है। अमेरिका को इसमें हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है।
चीन के विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा, अमेरिका ने अगर तत्काल प्रतिबंध नहीं हटाए तो उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बयान में कहा, यह प्रतिबंध चीन द्वारा रूस से पिछले साल 10 एययू-35 लड़ाकू विमान और इस वर्ष सतह से हवा में मार करने वाली एस-400 मिसाइल खरीदने के कारण लगाया गया है। अमेरिका ने कहा, चीन की सैन्य समिति के खिलाफ यह कदम रूस की दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों पर नकेल कसने के मकसद से उठाया गया है।
न्यूयॉर्क जितना जल्द हो सके अपनी ‘गलती’ सुधार ले तो बेहतर होगा: चीन
मीडिया ख़बरों के अनुसार अमेरिका के इस कदम से नाराज चीन ने कहा है कि न्यूयॉर्क जितना जल्द हो सके अपनी ‘‘गलती’ सुधार लेगा तो बेहतर होगा। अमेरिका ने बृहस्पतिवार को चीनी सेना के हथियार खरीदने के मामले को देखने वाले महत्वपूर्ण प्रकोष्ठ इक्यूपमेंट डेवलपमेंट डिपार्टमेंट (ईईडी) और उसके निदेशक ली शागंफु पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके पहले भी ट्रंप प्रशासन ने अपने ‘‘काउंटरिंग अमेरिका एडवरजरीज सैंक्शंस एक्ट’( सीएएटीएसए) प्रतिबंधों से तीसरे देश को निशाना बनाया है।
अमेरिकी विदेश मत्रालय ने कहा था कि वह 2017 के कानून के तहत चीन की सैन्य एजेंसी को प्रतिबंधित कर रहा है। विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को कहा, चीन ही एकमात्र ऐसा देश है जिसने रूस के नुकसान पहुंचाने वाले कदमों के खिलाफ अमेरिकी कानून का उल्लंघन करते हुए उससे एस 400 मिसाइल खरीदी है। अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि दरअसल अमेरिका का निशाना मॉस्को है, बीजिंग नहीं।







