‘यामीन कोर्ट के आदेश का पालन न करके अपने ही पैर में कुल्हाड़ी मार रहे हैं। अगर उनकी सरकार का यह रुख बना रहा तो मालदीव निश्चित रूप से और बड़े राजनीतिक संकट की ओर बढ़ सकता है’
पर्यटन और अपने आलीशान रिसॉर्ट के लिए विश्व प्रसिद्ध मालदीव में राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। वहां के सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति अबदुल्ला यामीन के अधिकारवादी शासन के खिलाफ दिए गए फैसले से यामीन की सरकार हताश और निराश है। अगर यामीन की सरकार कोर्ट के फैसले के मुताबिक विपक्षी नेताओं की रिहाई करने से इनकार कर देती है तो यामीन के खिलाफ शीर्ष अदालत महाभियोग भी लगा सकती है। यामीन अपनी गिरफ्तारी या महाभियोग लगाए जाने की आशंका को देखते हुए सेना को सतर्क कर दिया है। इस बात की भी पूरी संभावना है कि यामीन देश में आपातकाल की घोषणा भी कर सकते हैं।
मालदीव में यामीन की सरकार और विपक्षी पार्टियों के बीच काफी दिनों से संघर्ष छिड़ा हुआ था। विपक्षी पार्टियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को रिहा करने का आदेश दिया था। यामीन की सरकार ने 2016 में उन पर आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त होने का फर्जी आरोप लगाया था। शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि नशीद के खिलाफ मुकदमा राजनीति से प्रेरित और गलत था।
शीर्ष अदालत ने आठ अन्य विपक्षी नेताओं की रिहाई का भी आदेश दिया है, जिन पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस महत्त्वपूर्ण फैसले में अपदस्थ किए गए उन 12 सांसदों को फिर से बहाल कर दिया है, जो 2016 में संयुक्त विपक्ष के साथ एकजुट होकर राष्ट्रपति यामीन के खिलाफ महाभियोग लाने का प्रयास कर रहे थे। इन 12 सांसदों के फिर से बहाल हो जाने से यामीन की सरकार अल्पमत में हो जाएगी और इसलिए उन पर महाभियोग का खतरा बढ़ गया है। हालांकि इस बीच यामीन ने समय से पहले चुनाव कराने की बात कही है लेकिन उनके जैसे अधिकारवादी शासक के पद पर रहते हुए निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद नहीं की जा सकती है।
यह विडंबना ही है कि यामीन कोर्ट के आदेश का पालन न करके अपने ही पैर में कुल्हाड़ी मार रहे हैं। अगर उनकी सरकार का यह रुख बना रहा तो मालदीव निश्चित रूप से और बड़े राजनीतिक संकट की ओर बढ़ सकता है। मालदीव की राजनीतिक अस्थिरता भारत की सुरक्षा के लिएचिंता का सबब है क्योंकि वहां चीन और सऊदी अरब की संयुक्त रूप से सक्रियता है। इसीलिए भारत ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि लोकतंत्र के लिए सरकार को कोर्ट के आदेश का पालन करना चाहिए।







