ज़िन्दगी का सफ़र कुछ अजीब सा लगा,
जो अपना मिला वो कुछ करीब सा लगा,
हमने तो अपनी खुशियाँ सबपे लुटा दीं ,
और दूसरों से उम्मीद की तो वो गरीब सा लगा।।
ना जाने लोग क्यों कतरातें हैं,
अपना कहने से शरमाते हैं,
दो दिन की तो ये ज़िन्दगी है बस,
और उसमे भी लोग घबराते हैं।।
खुश रहो और दूसरों को खुश रहने दो,
दूसरों से कहो और उन्हें भी खुद से कुछ कहने दो,
दो दिन के लिए आये हो अच्छे से जी लो,
इन्सान हो तो खुद को इन्सान ही रहने दो।।
दुनिया में हर चीज़ यूँही नहीं मिलती,
कोई वजह ना हो तो ये हवा भी नहीं चलती,
सफ़र तो उस नदी ने भी तय किया था,
नहीं करती तो वो कभी सागर से नहीं मिलती।।
इन्सान हो तो दूसरों के लिए जीना सीखो,
मुश्किल पड़े तो उससे निकलना सीखो,
यूँ तो एक जानवर भी अपने बच्चे को बचाता है,
फिर तुम भी जरुरत पड़े तो ज़हर का घूँट पीना सीखो।।
आज तुम करोगे, कल तुम्हारे लिए भगवान करेगा,
एक ख़ुशी तुम दो और वो तुम पर सौ ख़ुशी मेहरबान करेगा,
इन्सान से फिर तुम फ़रिश्ता बन जाओगे,
और हर शख्स तुम्हे भगवान का दूजा नाम कहेगा।।
इतनी ख़ुशी दे दो की कभी कमी न पड़े,
सब साथ रहें और कम ये ज़मी ना पड़े,
फिर तो जीने का मजा ही अलग होगा,
और साथ तुम्हारे हमेशा भगवान रहेगा।।







