व्यंग्य: अंशुमाली रस्तोगी
एक टिकटॉक था अब वह भी बंद। दिन और रात उसी पर कट जाते थे। मनोरंजन के नाम पर हंसकर हल्का हो लेता था। अब तो मोबाइल देखने का भी दिल नहीं करता। फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप से जाने कब का नाता तोड़ चुका हूं। टिकटॉक पर इसलिए आया था कि थोड़ा लाइक की भूख मिटेगी, थोड़ा प्रसिद्धि का अमृत चाखूंगा। पर क्या मालूम था एक दिन ‘न खुदा ही मिला न विसाले सनम, न इधर के रहे न उधर के’ जैसी स्थिति हो जाएगी।
अपने मोहल्ले में मैं ‘टिकटॉक किंग’ के नाम से जाना जाता था। शहर में शायद ही ऐसा कोई घर हो, जहां मेरे वीडियो देखे न जाते हों। शायद ही ऐसा कोई बंदा-बंदी हो जो मुझे न जानता-पहचानता हो। मेरे फेम के चर्चे बरेली से लेकर बर्लिन तक थे। टिकटॉकबाजी के चसके में मैंने अपनी जमी-जमाई नौकरी तक छोड़ दी थी। जब वीडियो बनाकर ही सैलरी से अधिक कमाई हो रही हो फिर नौकरी कौन गधा करे!
आज मैं फिर से सड़क पर आ गया हूं। कभी खुद को देखता हूं कभी अपने पुराने दिनों को याद करता हूं। मेरा टैलेंट भी धीरे-धीरे कर मिट्टी में मिलता जा रहा है। मोहल्ले के जिन लोगों को कभी मैं टिकटॉक पर लाया था, वे आज मेरा सरेआम मजाक उड़ाते हैं। मेरे विरोधी मुझे गरियाते हैं। जिंदगी फुटबॉल-सी बन गई है। जब जिसका मन आता है, ठोकर मारकर चला जाता है। कल ही कोई मुझे चीन भेज देने को कह रहा था। बता दूं, मैं चाइनीज एप जरूर चलाता था पर दिल मेरा ‘हिंदुस्तानी’ है। मेरे देशप्रेम पर शक न करें।
टिकटॉक का विकल्प ‘चिंगारी’ दिया जा रहा है। सोच रहा हूं इसी पर आकर थोड़ा शोले भड़काऊं। खुद को इसी पर जमाऊं। एक बार जम गया तो सिक्का चल जाएगा। खाली समय कट जाएगा। ‘चिंगारी’ जम गई तो मैं ‘चिंगारी किंग’ कहलाया जाने लगूंगा। जिन्होंने टिकटॉक का साथ छोड़ दिया, उन्हें वापस इस एप पर ले आऊंगा। मशहूर होने का चस्का एक दफा लग जाए फिर आसानी से नहीं छूटता।
जीवन में लाइक न हो तो बड़ा सूनापन-सा लगता है। सोशल मीडिया का किंग वही है, जिसके कने लाइक्स हैं। मैं अपने खोए रुतबे को फिर से पाने की कोशिश में लगा हूं। कामयाबी निश्चित मिलेगी मुझे यकीन है। पढ़ाई-लिखाई में फिसड्डी रहा तो क्या, सोशल मीडिया पर तो ‘हिट’ हूं। आजकल हिट्स ही जीवन का अंतिम सत्य हैं, परसेंटेज नहीं। पता नहीं लोग परसेंटेज के लिए क्यों मरे जाते हैं, मैं कभी न मरा। न ही कभी पढ़ाई इस लेबल की करी कि परसेंटेज के मोह में पड़ूं।
‘चिंगारी’ पर आ रहा हूं, सुन लो दुनिया वालो। और चीन तू भी सुन ले। अपना टिकटॉक फिलहाल अपने पास रख। चिंगारी पर आकर मैं टिकटॉक से भी कहीं आगे निकल जाऊंगा, मुझे विश्वास है। लाइक्स और हिट्स पाने के लिए मैं गधे को बाप और बाप को गधा भी बना सकता हूं। यहां हर कोई हर किसी को ‘बना’ रहा है। लोग बन रहे हैं। प्रतिकार भी नहीं कर रहे। जमाना बदल गया डूड।







