व्यंग: अंशुमान खरे
चीन अपनी अस्थिरता से परेशान है, पर हेरा फेरी में मशगूल है। अपनी विस्तारवादी सोंच के कारण न तो चैन से बैठ पा रहा है और न ही किसी को बैठने दे रहा है। दुश्मन बनाना चीन की फितरत है। उसका घमण्ड सातवें आसमान पर है। पड़ोसी की जमीन हथियाने को हमेशा योजना बनाता रहता है। चीन अन्दर से खोखला होता जा रहा है। जनता त्राहि त्राहि कर रही है। जनता के हित के बारे में सोचने की शी जिनपिंग को फुरसत ही नहीं है। दुश्मनी पालकर बारूद के ढेर पर बैठा चीन विश्व युद्ध को न्योता दे रहा है। महाविनाश की ओर बढ़ रहा है। चीन को अपने मित्र आतंकवादी पाकिस्तान पर बहुत भरोसा है। जो स्वयं भुखमरी का शिकार है। दाने दाने को मोहताज पाकिस्तान चालाक चीन की ओर टकटकी लगाए है। पाकिस्तान को समझ नहीं आ रहा जो अपनी जनता का न हुआ वह पाकिस्तान का क्या होगा।
पाकिस्तान का चीन पर आंख मूंदकर भरोसा करना उसके अस्तित्व को ही संकट में डालने वाला है। शी जिंनपिंग बस जहां में जहां तक जगह पाइए इमारत बनाते चले जाइए, के फार्मूले पर काम करता है। विस्तारवादी सोच ने चीन की आंखों पर पट्टी बांध दी है। वह अलग बात है कि अपने को महाबली कहलाने को चीन बेताब है। हर छोटे बड़े देश को हड़प लेना चीन की आदत है। तिब्बत, ताइवान, हांगकांग को अनैतिक तरीके से अपने में मिला लिया है, भारत, रूस, जापान, नेपाल के सीमावर्ती इलाकों पर नजर है। कब मौका मिले कब्जा कर ले। चारों ओर से घिरा चीन मुसीबत मोल ले के बैठा है। अमेरिका, इस्राइल, जापान, फ्रांस, जर्मनी और तमाम देश सबके सब चीन के विरोध में हैं। पर चीन को अपने टैंकों, मिसाइलों, लड़ाकू विमानों पर बड़ा घमण्ड है। अपने को दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश समझता है। गलत नीतियों के कारण चीन रसातल में जा रहा है। चीन में स्थापित कम्पनियां धीरे धीरे चीन से पलायन कर रही हैं।चीन की इकोनॉमी की हालत खराब हो रही है।चीन को देश में विस्फोटक स्थिति से बचने के लिए रचनात्मक कामों की ओर ध्यान देना चाहिए।

एलएसी पर लद्दाख में भारत से पिटने के बाद चीन को अपनी औकात पता लग गई। चोरी छिपे बार बार घुसपैठ करने की लगातार चीनी सेना कोशिश करती रहती है। शी जिंनपिंग को चीनी सेना का बार बार पिटना रास नहीं आ रहा है। अब चीन अरुणाचल प्रदेश को अपना बताने की हिमाकत कर रहा है। भारतीय सेना के बहादुर जवानों का खौफ चीनी सेना को खाए जा रहा है।चीन की गीदड़ भभकी से भारतीय जवान डरने वाले नहीं हैं। भारत के बहादुर जवानों बहादुरी को दुनिया सलाम करती है। अब की सेना और न ही सरकार पहले जैसी है। ईंट का जवाब पत्थर से देने का मजबूत इरादा रखती है हमारी बहादुर सेना। सरकार ने भी सेना के हाथ खुले छोड़ रखे हैं। जहां जैसी जरूरत हो वहां वैसा करने को सेना स्वतंत्र है। अपनी बहादुरी दिखाने को सेना स्वतंत्र है। सामने वाले से कैसा बर्ताव करना है, यह सेना को सोचना है।
मोदी की सरकार ऊंचे इरादों वाली सरकार है। देश हित को आगे रखती है। एक इंच भूमि पर किसी दुश्मन को कब्जा करने नहीं देगी। पीओके को पाकिस्तान से वापस लेने के साथ ही साथ चीन द्वारा कब्जाई जमीन भी वापस लेना है। पाकिस्तान के साथ साथ चीन भी दहशत में है। उसे भी भारत की जमीन वापस करनी पड़ेगी। ढीठ चीन चोरी छिपे चौबीस घंटे घुसपैठ की फिराक में रहता है। चीन की विस्तारवादी नीति चीन को ही बर्बाद कर डालेगी। लद्दाख के सीमावर्ती इलाकों पर चीन की टेढ़ी नज़र है। चीन की कोशिश है कि पाकिस्तान, नेपाल और अन्य देशों को साथ लेकर भारत को आंख तरेरे। पर शी जिंनपिंग को हर मोर्चे पर मात खानी पड़ रही है। रही सही कसर पीओके की जनता के विद्रोह ने पूरी कर दी है। चीन पाकिस्तान के विश्वास पर पीओके में काफी पैसा लगा चुका है। पीओके पर भारत का कब्जा होने पर चीन का पैसा ढूब जाएगा।
पीओके की जनता को पाकिस्तान और चीन फूटी आंखों नहीं सुहाते। भारत संसद में इसका प्रस्ताव भी पास करा चुका है। मोदी सरकार ने संकल्प लिया है कि पीओके और अक्साई चीन को वापस हर हालत में लेना है।
पीओके की जनता पाकिस्तान सरकार और सेना से विद्रोह कर रही है। चीन का पिछलग्गू बनकर पाकिस्तान की सरकार कब तक खैर मनाएगी। चीन को दूसरे देशों की जमीन पर कब्जा करने की हिमाकत करना बन्द कर देना चाहिए। चीन में विद्रोह की ज्वाला भड़क रही है। पीएलए (चीनी सेना) ने आजतक कोई युद्ध नहीं लड़ा है।
भौकाल फैलाकर अपना दबदबा कायम करने की कोशिश की है। अब सब चीनी सेना के भौकाल से परिचित हो गए हैं। जैसे चीनी सामान की कोई गारंटी नहीं होती ,वैसे ही चीनी चीनी युद्ध उपकरणों की भी कोई गारंटी नहीं है। कभी भी फुस्स हो सकते हैं। शी जिंनपिंग को अपनी सेना के साथ साथ अपने सैन्य उपकरणों पर भी भरोसा नहीं है। अपने समकक्षों पर भी अविश्वास बढ़ता जा रहा है। कभी भी तानाशाही का अन्त हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों में शी जिंनपिंग को हिमाकत नहीं करनी चाहिए।
भारत अपनी एकता और अखण्डता के प्रति प्रतिबद्ध है। चीन को उकसाने की कार्यवाही पर तत्काल रोक लगानी चाहिए। जयहिंद।







