विश्व की शान हैं, क्योंकि हम किसान हैं।
दूसरों को खुश रखते, लेकिन खुद परेशान हैं।।
परेशानी का कारण खुद आज अपने ही हैं,
देखो, आज आढ़तियों के लिए दिल्ली में बैठ परेशान हैं।
कुछ ने भरमाया हमें, हम सुनने से कर दिये इंकार,
संसोधन की बात नहीं करते, हम कितने नादान हैं।।
शंका के आधार पर विरोध करना बड़ी नादानी है,
यदि आप्शन मिले और तो इसमें हमें क्या परेशानी है।
मुख्य मुद्दा होना चाहिए एमएसपी,
लेकिन कानून खत्म करने को कहना तो हैरानी है।।
ऐसा लगता है, साहिनबाग की तरह,
हम फंस गये हैं हम वामपंथियों के चंगुल में,
उनकी आत्माएं नचा रही हमारे नेताओं को,
नाच रहे सड़क पर, फंसकर उनके अंगुल में।।
हमें आज कर रहे दूसरे दिग्भ्रमित,
समझना होगा हमें, हम देश की जान हैं।
एमएसपी के लिए लड़े हम हमेशा
लेकिन हम कानून को हटाने के लिए क्यों परेशान हैं?
नया कानून तो देता है एक नया आप्शन,
हम देश की शान हैं, हम एक गांव से जुड़े किसान हैं।।
- उपेंद्र नाथ राय ‘घुमन्तु’








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