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    तबाही से सहमे लोग जानना चाहते हैं क्या होते हैं ग्लेशियर और क्यों टूटते हैं?

    ShagunBy ShagunFebruary 11, 2021 Featured 1 Comment2 Mins Read
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    Post Views: 630

    उत्तराखंड के चमोली में जल प्रलय की तबाही ने जो ऐतिहासिक भयानक मंजर दिखाया उससे उबरने में हम इंसानो को अभी काफी वक़्त लगेगा लेकिन इस भयानक मंजर के पीछे क्या वजह रही इसे जानना बहुत जरुरी है।

    बताया जाता है कि उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर फटने से भारी तबाही हुई है। लगभग सात साल बाद उत्तराखंड में एक बार फिर कुदरत का कहर टूटा है। चमोली के रेणी गांव के पास में ग्लेशियर टूटा, जिसमें 150 से अधिक लोग बह गए। जिस समय ग्लेशियर टूटा ये सभी लोग ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट में काम कर थे। ख़बरों के अनुसार धौली गंगा नदी में जलस्तर बढ़ने से कई पुल भी टूट गए हैं और कई गांवों से संपर्क भी टूट गया है। आइये जानते हैं ग्लेशियर क्या होते हैं और यह क्यों टूटते हैं ?

    क्या होते हैं ग्लेशियर:

    पहाड़ों की ऊंची चोटियों पर सालों तक भारी मात्रा में एक ही जगह बर्फ जमने से ग्लेशियर बनता है। ग्लेशियर मुख्यता दो तरह के होते हैं। माना जाता हैं कि गुरुत्त्वाकर्षण बल बढ़ने के कारण के ग्लेशियर टूटते हैं। जिसको प्रमुख कारण माना जाता है।

    ग्लेशियर के टूटने अनुमान लगा पाना संभव नहीं?

    ग्लोबल वॉर्मिग- ग्लोबल वॉर्मिग की वजह से ग्लेशियर की बर्फ तेजी से पिघलने लगती है, जिस वजह से ग्लेशियर टूटने लगता है। जब ग्लेशियर का कोई टुकड़ा टूटता है तो उसे काल्विंग कहा जाता है। ग्लेशियर के टूटने बाद उसके भीतर ड्रेनेज ब्लॉक में मौजूद पानी अपना रास्ता ढूंढ लेता है और जब यह ग्लेशियर के बीच से बहता है तो बर्फ भी तेजी से पिघलने लगती है। इस वजह से रास्ता काफी बड़ा हो जाता है और पानी का सैलाब आ जाता है। पानी का सैलाब आने से नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है जिस वजह से आसपास के इलाकों में काफी नुकसान हो जाता है। बता दें कि छोटे- मोटे ग्लेशियर अक्सर टूटते रहते हैं, लेकिन बड़ा ग्लेशियर दो या तीन साल के अंतराल में ही टूटता है। जिसका पहले से अनुमान लगा पाना भी संभव नहीं होता है।

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    1 Comment

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