बाल संग्रहालय चारबाग में लखनऊ बुक फेयर-2021: पांचवां दिवस: साहित्यकारों से मिले प्रेरक वक्तव्य और नुक्कड़ नाटकों से सबक
लखनऊ, 9 मार्च 2021: जमाना कम्प्टीशन यानी प्रतियोगिता का है। पढ़ाई, टेक्निकल कोर्सेज़ और नौकरियों के लिए आज के दौर के तगड़े कम्प्टीशन में जरा सा आप ढीले हुए नही कि दौड़ से बाहर। बाल संग्रहालय लान चारबाग में चल रहे लखनऊ पुस्तक मेले ऐसी ही परीक्षाओं में कामयाब बनाने वाली ढेरों किताबें हैं। किताबों पर न्यूनतम 10 प्रतिशत छूट और निःशुल्क प्रवेश वाला यह मेला यहां 14 मार्च तक जारी रहेगा।

शिक्षिका डा.नीतू शर्मा बताती हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सामान्य ज्ञान के प्रश्न बहुत बदल गये हैं तो रीज़निंग की शैली में भी परिवर्तन हुआ है। बदले तौर तरीके जानने के लिए किताबे सबसे अच्छा माध्यम हैं। ओसवाल गुरुकुल के स्टाल पर नीट, जेईई जैसी कई प्रतियोगी परीक्षाओं में काम आने वाली और अंग्रेजी, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, सामान्य विज्ञान के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की किताबें है तो नवीं से बारहवीं तक के सभी विषयों की सहायक पुस्तकें हैं। प्रकाशन विभाग के स्टाल पर इतिहास, कला संस्कृति व व्यक्तित्व, भाषण व व्याख्यानों से जुड़ी किताबें प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ ही शोध छात्रों के लिए उपयोगी हैं।

सुल्तानचन्द के स्टाल पर अर्थ व्यवस्था, निवेश, प्रबंधन, व्यवसाय, गणित इत्यादि की स्तरीय पुस्तकें हैं। मेले में नवीं से बारहवीं तक नवयुवाओं के लिए हर सबजेक्ट की पाठ्यक्रम सामग्री सीडी और पेनड्राइव में मिल रही है। पहली से लेकर नौ तक के विषय भी ऐसे ही आडियो-विजुअल फार्मेट में उपलब्ध हैं। आर्यन बुक्स में सिंघानिया की भारतीय कला संस्कृति सिविल परीक्षाओं को ध्यान में रखकी ही तैयार की गई है। अन्य स्टालों पर भी प्रतियोगी परीक्षाओं में काम आने वाली किताबें मिल जाएंगी।
निदेशक आकर्ष चंदेल ने बताया कि आज मेले में विविध जागरूकता कार्यक्रम भी चल रहे हैं। मंचीय गतिविधियों के अलावा ज्योति किरन रतन के संयोजन मे आनलाइन गतिविधियां भी चल रही हैं। आज कुटीर उद्योगों से सम्बंधित वीडियो प्रोजेक्ट और नुक्कड़ नाटकों की प्रविष्टियां आई हैं।
हमारे बीच कार्यक्रम में आलोचक वीरेन्द्र यादव ने वर्तमान लेखकीय परिदृश्य को रखा तो प्रसिद्ध कथाकार उपन्यासकार अखिलेश अपने रचनाकर्म, पीड़ाओं और संवेदनाओं को लेकर पुस्तक प्रेमियों के बीच थे। संचालन का दायित्व आलोक पराड़कर ने कुशलता से सम्भाला। प्रहर्ष फाउण्डेशन के कवि सम्मेलन में सामयिक विषयों पर काव्य रचनाएं सामने आईं।







