व्यंग टिप्पड़ी : अंशुमाली रस्तोगी
अपनी प्रोफाइल को लॉक्ड क्यों रखते हैं लोग? सोशल मीडिया पर हैं और प्राइवेसी का जाल बनाए रहते हैं, क्यों? कितनी निजता चाहिए हुजूर? क्या कीजिएगा इतनी निजता का? प्रोफइल और लाइफ को इतना निजी बनाएंगे तो सफर काटना बहुत मुश्किल हो जाएगा।
लॉक्ड प्रोफाइल से जितनी रिक्वेस्ट मुझे आती हैं, मैं तुरंत अस्वीकार कर देता हूं। नहीं चाहिए मुझे ऐसे ‘सीमित लोग’ जो ताले में बंधा रहना चाहते हैं। यों ताला जड़े रहेंगे तो लगेगा कि आपकी सोच और विचार पर भी ताला पड़ा है।
निजता धीरे-धीरे कर मानसिक बीमारी बनती जा रही है। आप निजता को लेकर फिक्रमंद हैं मगर कंपनियां आपका डेटा खुलकर बेच रही हैं। उनकी मर्जी (तानाशाही) के आगे आपकी निजता ठेंगा है हुजूर। भाई वाह क्या बात है!







