गौरैया
चीं-चीं कर गौरैया बोली,
फुदक-फुदक कर जाऊँगी।
खेतों में बिखरे जो दाने,
चुग-चुग कर ले आऊँगी।
छोटे-छोटे बच्चे मेरे,
उन्हें खिलाती जाऊँगी।
दाना खाते देख उन्हें मैं,
मन ही मन हर्षाऊँगी।
चीं-चीं,चूँ-चूँ चोंच खोल कर,
बच्चे बाहर आएँगे।
लिए चोंच में दाना बच्चे,
बड़े चाव से खाएँगे।
कूद-कूद कर,फुदक-फुदक कर,
उड़ना उन्हें सिखाऊँगी।
पँख पसारे साथ में उनके,
मैं भी उड़ती जाऊँगी।
- पुष्पा जोशी ‘प्राकाम्य’







