- प्रदेश का ऊर्जा क्षेत्र कन्सल्टेन्टों के मकड़जाल में ऐसे में बिजली विभाग के तकनीकी विशषज्ञों का क्या मतलब विभाग लगभग 70 हजार करोड़ के घाटे में।
- बिजली विभाग का बिजली दर प्रस्ताव हो उदय हो पावर फार आल हो सभी योजनाओं की क्रियावन्यान कन्सल्टेन्टों के भरोसे जो अपने आप में गम्भीर मामला।
- उपभोक्ता परिषद ने देश के मा. प्रधान मंत्री से उठाई मांग ऊर्जा क्षेत्र में कन्सल्टेन्टों की भूमिका की हो उच्च स्तरीय जांच।
लखनऊ 9 सितम्बर : प्रदेश की बिजली कम्पनियाँ चाहे वह बिजली दर प्रस्ताव बनाने का मामला हो, उदय स्कीम का मामला हो या फिर पावर फार आल सहित केन्द्रीय सरकार की प्रत्येक योजना व उत्पादन घरों की कैपिटल कास्ट के मूल्यांकन सहित नयी परियोजना का मामला हो सभी पर कन्सल्टेन्टों की रिर्पोट के आधार पर ही कार्यवाही को आगे बढ़ाया जाता है। यह कहना गलत नहीं होगा की प्रदेश ऊर्जा सेक्टर कन्सल्टेन्टों के मकड़जाल में उलझा हुआ है। इसी का नतीजा है चाहे वह बिजली दर प्रस्ताव का मामला हो उदय का हो या फिर पावर फार आल का मामला हो जब नियामक आयोग द्वारा आकड़ों पर रिपोर्ट तलब की जाती है तो पावर कारपोरेशन हाथ खड़े कर देता हैऔर सभी आकड़ों में भिन्नता सामने आती है। पावर कारपोरेशन या बिजली कम्पनियां यहां तक की नियामक आयोग भी बिना कन्सल्टेन्टों के सहारे आगे नहीं बढ़ता।
कन्सल्टेन्टों का खेल इतना बड़े स्तर पर है की अब केन्द्र सरकार के ऊर्जा के विभाग चाहे व पावर फाइनेन्स कारपोरेशन हो रूलर इलेक्ट्रिफीकेशन कारपोरशन हो या अन्य सभी जगह कन्सल्टेन्टों का एक अलग विंग भी बन गयी है। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि बिजली कम्पनियों में जो बड़े काबिल तकनीकी विशेषज्ञ हैं उनका योग दान कहां दिखायी दे रहा है और कब दिखाई देगा।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि प्रदेश का ऊर्जा क्षेत्र जब कन्सल्टेन्टों के सहारे ही चल रहा है तो ऐसे में बिजली विभाग के तकनीकी विशेषज्ञ व तकनीकी अभियन्ताओं का अहम योगदान कब दिखायी देगा। करोड़ों रूपये खर्च कर के हर योजना पर कन्सल्टेन्टों की रिपोर्ट तैयार होती है और आज भी उदय स्कीम प्रदेश के तहत ऊर्जा सेक्टर लगभग 70 हजार से 72 हजार करोड़ के घाटे में है तो ऐसे में करोड़ों रूपये खर्च कर के रखे जो रहे कन्सल्टेन्टों की भूमिका व उनकी कार्यप्रणाली की उच्च स्तरीय जांच कराया जाना बहुत ही जरूरी हो गया है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने देश के प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी से यह मांग उठाई है कि ऊर्जा क्षेत्र में कन्सल्टेन्टों की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच कराई जाये। यह इस लिये भी जरूरी है कि प्रदेश के ऊर्जा सेक्टर की हर योजना कर क्रियान्वयन कन्सल्टेन्टों की रिपोर्ट के आधार पर ही की जा रही है। इसके बाद ज्यादातर योजनायंे फ्लाप साबित हो रही हैं और विभाग घाटे में जा रहा है।







