अमेरिका दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि अमेरिका और भारत के बीच एक नए सहयोग की शुरुआत होगी और भारत में निवेश बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार संविधान के आधार पर लोकतंत्र के मूल्यों को लेकर चलती है। हमने सिद्ध किया है कि हमारी सरकार लोकतंत्र को लेकर जीती है। जब हम लोकतंत्र को लेकर जीते हैं। तब भेदभाव का कोई सवाल ही नहीं उठता। अगर मानवाधिकार नहीं है तो लोकतंत्र नहीं है। भारत में किसी तरह का भेदभाव नहीं है। न ही धर्म के आधार पर, न अन्य किसी आधार पर। प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे को कई मायनों में ऐतिहासिक कहा जा सकता है।
इस दौरे के इसलिए भी खास मायने हैं कि इसका पूरे विश्व खासतौर पर हमारे पड़ोसी मुल्क चीन के लिए अहम संदेश है। पिछले कुछ समय से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चीन का दबदबा बढ़ा है। वह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में लगातार अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है। वह भारत के साथ सीमा विवाद में भी उलझा है। ऐसे में अमेरिका को पता है कि चीन से उसके विरोध में भारत की क्या महत्ता है। इसलिए चीन के वर्चस्व पर लगाम की कवायद के लिहाज से भी मोदी का दौरा अहम है।

यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यह वैश्विक स्तर पर मूल्यवृद्धि, समझ, चिंताओं को लेकर अहम भूमिका अदा करेगा। यह सच है कि इस दौरे का मूल लक्ष्य रक्षा और औद्योगिक क्षेत्र में आपसी तालमेल को मजबूत करना है। आपसी रिश्तों का जो गठबंधन है वह वैश्विक स्तर पर आतंकवाद समेत सभी क्षेत्रों को संदेश दे रहा है। अगर दोनों देश रक्षा के क्षेत्र में किसी अहम समझौते पर पहुंचते हैं तो उससे बड़े बदलाव की शुरुआत होगी। खासकर लड़ाकू विमानों के लिए जीई 414 जेट इंजन निर्माण को लेकर भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा। अमेरिका में पचास लाख से ज्यादा भारतीय रहते हैं जो दूसरी सबसे बड़ी अप्रवासी आबादी है। ऐसे में देश के लिए यह गर्व की बात है कि पीएम मोदी ऐसी शक्तियों में शुमार हैं जिनका पूरी दुनिया में डंका बजता है।







