Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Friday, June 26
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»साहित्य

    आमजन का दर्द समझने वाले दुष्यंत कुमार को आखिर कब मिलेगा उचित सम्मान

    ShagunBy ShagunDecember 29, 2024 साहित्य No Comments4 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 613

    अवनीश त्यागी

    “ एक गुड़िया की कई कठपुतलियों में जान है, आज शायर यह तमाशा देखकर हैरान है। “ जैसी गजलें गाकर आपातकाल में लोकतंत्र सेनानियों में जोश भरने वाले दुष्यंत कुमार के प्रति सरकारों की उपेक्षित रवैया ने खुद दुश्यंत की आत्मा को ठंडा कर दिया है। उनकी गजलें भले ही आज कालजयी हैं। आज भी लोग उससे प्रेरणा पाते हैं, लेकिन किसी सरकार से वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वास्तव में दुष्यंत कुमार हकदार थे।

    आपातकाल में जब भारतीय लोकतंत्र को तत्कालीन तानाशाही सरकार कुचलकर समाप्त करने पर आमादा थी तब दुष्यंत कुमार की ग़ज़लें तानाशाहों के मंसूबों को स्वाहा करने वाली मशालें सिद्ध हुई थी। गरीब, पीड़ित व उपेक्षित आम आदमी के दर्द एवं पीड़ा को अपनी कलम से उकेरकर आंदोलनकारियों का हथियार बना देने वाले दुष्यंत अपनी रचनाधर्मिता के बल पर भले ही अमर हो गए। चाहे जमाना लाख बदले, लेकिन दुष्यंत कुमार को याद किये बिना गजलों की दुनिया पूरी नहीं होती। यदि आम आदमी से जुड़कर भावों में उसकी पीड़ा को कहना है तो दुष्यंत को याद करना ही पड़ता है। इसके बावजूद वे अब तक वे सम्मान नहीं पा पाये, जिसके वे हकदार थे। सरकारों की उपेक्षा की चादरों में लिपटी उनकी कविताएं तो लोगों के दिलों पर आज भी राज कर रही हैं, लेकिन वे कह रही हैं कि आज दुष्यंत को उसका सम्मान दिलाने के लिए लड़ने का समय आ गया है।

    सवाल इस बात का है कि जब सरकारें लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान में पलक पावड़े बिछा रही है। अनेक लोगों को पद्म विभूषण, पद्दमभूषण या पद्मश्री के सम्मानों से नवाजा जा चुका है। ऐसे में दुष्यंत कुमार की उपेक्षा क्यों? उनकी कविताओं ने तो आपातकाल की विभिषिका के समय युवाओं में वह काम किया, जो बड़े-बड़े हथियार नहीं कर सकते। युवाओं की भावनाओं को झकझोर कर दुष्यंत ने लोगों को प्रेरणा दी। अपनी कविताओं के माध्यम से ही उन्होंने लोगों को निराश नहीं होने दिया। सड़कों पर उतरकर संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया। वह आज पद्म विभूषण सम्मान नहीं पा सका।

    30 दिसंबर को क्रांतिकारी रचनाकार दुष्यंत कुमार की पुण्यतिथि है। जाहिर है जगह-जगह उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए कार्यक्रम भी होंगे। कुछ देर तक उनकी यादों में लोग आंसू भी बहाएंगे, लेकिन फिर वही ढाक के तीन पात। परंतु एक बात मन को थोड़ा जरूर कचोटती है कि दुष्यंत कुमार को हम उतना सम्मान नहीं दे सके, जिसके वे सच्चे हकदार थे। उनके असंख्य प्रशंसकों को मलाल है कि आम जन की पीड़ा और आवाज को पूरी शिद्दत से उकेरकर जनता को जगाने वाले रचनाकार को देश के सर्वोच्च पद्म सम्मान से ही नहीं साहित्य क्षेत्र में दिये जाने वाले पुरस्कारों से भी वंचित क्यूं रखा गया?

    यह सवाल इसलिए भी गंभीर बनता है कि दुष्यंत कुमार का महत्व उनके बगावती तेवरों से ही नहीं बल्कि साहित्य के क्षेत्र में किए अनूठे प्रयोगों से भी उनको विशेष बनाता है। हिंदी ग़ज़लों के जनक दुष्यंत कुमार ही थे। आम आदमी की सरल सहज भाषा में अपनी रचनाएं रचने का साहस भी दुष्यंत को सबसे अलग बनाता है। उन्होंने ग़ज़लों को इश्क, शराब व हुस्न की बंदिशों से निकाल कर सामान्य जन की मुश्किलों से जोड़ा। साहित्य को व्यवस्था में बदलाव का जरिया बनाने का काम भी किया।

    सत्तर के दशक में जब देश का युवा, ग़रीबी, मंहगाई, बेकारी और सत्ता के मनमानेपन से त्रस्त हो निराशा के भंवर में घिरता जा रहा था तब दुष्यंत कुमार ने अपनी कलम का कमाल दिखाया और देश को एक नई दिशा देने काम किया। कैसे आकाश में सुराख़ हो नहीं सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो। जेपी आंदोलन में दुष्यंत कुमार युवाओं के दिल और जुबां पर बसे थे। उनकी पुस्तक ‘साये में धूप’ आंदोलनकारियों के लिए पवित्र प्रेरक ग्रंथ बन गई थी ।सर कारी नौकरी में रहते हुए भी व्यवस्था की खामियां गिनाने और परिवर्तन का बिगुल बजाने की हिम्मत जुटाने वाले दुष्यंत पर जब सत्ताधारी दबाव बनाने लगे तो उन्होंने अपना तेवर बरकरार रखा।

    उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के राजपुर नवादा गांव 30 सितंबर 1931 को जन्मे दुष्यंत कुमार की कविताओं में गांव, गली, गरीब का दर्द झलकता है। अपनी कविताओं को धार देते हुए अल्प समय में ही वे ताज भोपाली जैसे लोगों को पीछे छोड़ चुके थे। 30 दिसंबर 1975 को भगवान को प्यारे हो गये, लेकिन उनकी रचनाओं ने उन्हें आम जनमानस के बीच अमर कर दिया। युवाओं के लिए वे प्रेरणाश्रोत बन गये। दुष्यंत की नजर हमेशा उस युग की नई पीढ़ी के गुस्से और नाराजगी पर टीकी रहती थी। उनकी रचनाओं में अन्याय और राजनीति के कुकर्मों के खिलाफ एक आवाज झलकती थी। जो उस समय लोकतंत्र सेनानियों के लिए एक सशस्त्र हथियार का काम किया।

    • लेखक – वरिष्ठ पत्रकार और वर्तमान में भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता हैं।

    Shagun

    Keep Reading

    When the temple became the means... and propriety fell silent...!

    जब मंदिर बना ज़रिया… और मौन हुई मर्यादा…!

    3 मिनट की झपकी एक ईमानदार इंसान की इज़्ज़त लगभग छीन लेती

    Many writers are caught in a labyrinth of duties!

    कर्त्तव्यों के चक्रव्यूह में घिरे हैं कई कलमकार!

    When a clever merchant and an innocent king taught a lesson to the forest and the sea...!

    जब चतुर व्यापारी और मासूम राजा ने दी जंगल और समंदर को सीख तब..!

    Raja ka Aaina (The King's Mirror): The King's Mirror is no ordinary mirror.

    राजा का आईना : राजा का आईना कोई साधारण आईना होता नहीं

    Akhilesh Yadav sang the praises of the bicycle in a viral post, highlighting that it is an excellent mode of transport—affordable in price yet immensely useful.

    अखिलेश यादव ने साइकिल की महिमा गाई, पोस्ट वायरल, साइकिल भी है खूब सवारी थोड़े दाम काम दे भारी

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Korean companies eye YEIDA: Plans underway to develop a "Korean City"

    कोरियन कंपनियों की नजर YEIDA पर: “कोरियन सिटी” बनने की तैयारी

    June 26, 2026
    Young Man Survives Despite a Ruptured Aorta and Multiple Fractures; Doctors Perform a Medical Miracle

    मौत को मात दी: फटी एओर्टा और दर्जनों फ्रैक्चर के बावजूद जिंदा बचा मर्चेंट नेवी अधिकारी

    June 26, 2026
    Pledge to protect the Constitution: CM Yogi recalls the fight for democracy on 'Constitution Murder Day'

    संविधान की रक्षा का संकल्प: सीएम योगी ने ‘संविधान हत्या दिवस’ पर याद की लोकतंत्र की लड़ाई

    June 26, 2026
    Kejriwal’s scathing attack upon reaching Ayodhya: What secret does Champat Rai know that even the PM is helpless?

    अयोध्या पहुंचे केजरीवाल का तीखा हमला: चंपत राय को क्या राज पता कि पीएम भी मजबूर?

    June 26, 2026

    गोमती का डूबता भविष्य: वह पवित्रता अब कहाँ?

    June 26, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading