लोकतंत्र में जन आंदोलन से, संघर्ष से राजनीति पुनर्जीवित होती रहती है गांव से शहर तक आम लोगों के जनहित के मुद्दों की राजनीति मृत प्राय सी होती जा रही है राजनीति में एक बड़े अभिजात्य वर्ग का धीरे-धीरे कब्जा हो रहा है उसके लिए महंगाई बेरोजगारी महंगी शिक्षा स्वास्थ्य जैसे मुद्दे ना अखरते हैं और स्वाभाविक रूप से न ही अखरने चाहिए वह सोशल मीडिया पर भी काबिज हो रहा है समाचार मीडिया पर भी काबिज हो रहा है या कंहे हो गया है जो लोग छात्र राजनीति से आते थे मध्यम वर्गीय परिवार के होते थे जो सड़क पर संघर्ष से राजनीति में आते थे वह जनता के सही मुद्दों को दुख दर्द को समझते थे आज 2-4 बार जेल जाने वाले नेता लगता ताउम्र जेल में ही रहेंगे
स्वर्गीय राज नारायण सिंह अपने राजनैतिक जीवन में 80 बार से ज्यादा जेल गए थे शायद महात्मा गांधी से भी ज्यादा समय जेल में गुजारा था संघर्षरत रहे अंत मे इंदिरा गांधी को चुनाव मे हरा दिया आज संघर्ष करने वाला आदमी दो चार बार भी जेल चला जाए तो अपराधी हो जाता है यही मीडिया उसे अपराधी बना देती है फिर जो कुछ संघर्ष करने वाले हैं भी तो उन करने वालों को ना तो जनता सीरियसली लेती है न मीडिया…. इसका भरपूर फायदा राजनीति में उभरे इस अभिजात्य वर्ग ने लिए आज सरकार और आम जनता के बीच यही धनाढ्य वर्ग बड़ी मजबूती से खड़ा हो रहा है पहले से ज्यादा सड़के और पुल बन रहे हैं
राष्ट्रीय राजमार्ग बन रहे हैं सड़कों पर बसों की संख्या बढ़ी है तकनीकी साजो सामान की खपत बढ़ रही है फोन और बिजली का उपभोक्ता पहले से ज्यादा बढा है हर घर में यह चीजें पहले से ज्यादा प्रयोग में आ रही हैं लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग में नौकरियों की संख्या नहीं बढ़ी रोडवेज कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ रही है टेलीफोन बनाने वाली कंपनी आईटीआई तकनीकी सुविधा और संरक्षण देने वाली कंपनी बीएसएनल बंद हो रही है सारा का सारा सेक्टर आउटसोर्सिंग में जा रहा है सरकार और पब्लिक के बीच आउटसोर्सिंग देने वाली कंपनियां किसकी हैं?? इन्हीं धन कुबेरों की हैं नौकरी के नाम पर 15 से 20 हजार महीने की नौकरियों की आबादी बढे़गी इन सारे लोगों की नौकरियों का लेखा जोखा नौकरी के नाम पर ही होगा बाकायदा फंड कटेगा और यह सारे लोग रोजगार वाले माने जाएंगे इनकी नौकरियां समय के साथ आती जाती रहेंगी
आउटसोर्सिंग करने वालों के आमदनी मे वृद्धि होती रहेगी अपने शहरों में देख लीजिए जो सरकारी हाई स्कूल इंटर कॉलेज मे विद्यार्थियों का चयन 9वी और 11वीं में प्रवेश परीक्षा के माध्यम से होता था उसमे पढ़ने वाले छात्रों की संख्या गिर रही है पढ़ाने वाले सरकारी शिक्षकों शिक्षकों की संख्या कम हो रही है कारपोरेट हाउस के बड़े-बड़े श्रृंखलाबद्ध कॉलेजों की बाढ़ आ गई इनके मालिक कौन है यही नव धनाढ्य वर्ग सरकारी विद्यालयों में सरकारी डिग्री कॉलेजों में बहुत सारे पद आउटसोर्सिंग के हो गये यही आउटसोर्सिंग करने वाला बड़े बड़े बिना अर्थ के आयोजनो मे पूरे जनमानस को व्यस्त रखता है
अब यह बातें उठाएगा कौन बताएगा कौन?? अपनी अपनी क्षेत्रीय अस्मिता को बचाने में विपक्ष की कशमकश किसी बड़े राष्ट्रीय मुद्दे पर भी एक एक सोच नहीं रखता सब के सब स्वयंभू हैं शनैःशनैः लोकतंत्र के इस पहरेदार को वेंटिलेटर पर पंहुचा दिया गया विपक्ष की राजनैतिक मृत्यु हो रही है बाकी बचा खुचा सत्यानाश सोशल मीडिया और समाचार चैनल कर दे रहा है प्राईवेट जेट और लैंड रोवर में यात्रा करने वाले प्रवचन धारियों के पास किसी समस्या का हल नहीं है ये अघोषित देव बन के खुद को पुजवा रहे हैं सब आपको ही तय करना है कि आप अपने आने वाली पीढ़ियों को क्या देके जाने वाले हो….
- अजीत कुमार सिंह







