ज्ञान की गंगा : अजीत कुमार सिंह
प्रत्येक व्यक्ति हमारे बारे में अपने नजरिये से सोचता है बोलता है और करता है जो हमारे प्रति अनुकूल और प्रतिकूल अच्छा या बुरा हो सकता है और अन्य कारणों से भी कई तरह के दुःख तनाव उत्पन्न करते हैं प्रतिकूलता होने पर विपत्ति आने पर तनाव होना स्वाभाविक है तनाव अधिक देर तक रहना स्वास्थ्य के लिये बहुत हानिकारक है इसलिए तनाव कम करने के लिये हमको निम्न प्रकार से अपनी सोच रखनी चाहिए किसी की गलत सोच के कारण कोई भी प्रतिकूल व्यवहार होने पर “कोई बात नहीं” जो जैसा होता है
वैसा ही दूसरों के बारे में सोचता है कहकर धैर्य को धारण करें विपत्तियाँ आने पर यह समय भी बीत जायेगा ऐसा सोचकर सहनशील बनें दूसरों के द्वेषपूर्ण रवैये पर “ईश्वर न्याय करेगा” ऐसा सोचकर शांत रहें, तथा उसके प्रति द्वेष न करें प्रतिकूलता के समय पर एकांतचित्त होकर अपने आचरण का मूल्यांकन अवश्य करें और अपने में कोई खोट होने पर उसे धन्यवाद दें जिसने आपकी कमी कही और स्वयं की उस कमी को सुधारने का प्रयत्न करें “ऐसा भी होता है”
शत प्रतिशत किसी को सुख नहीं मिलता ऐसा विचार करके शांत रहें दुनिया में बहुतों के साथ ऐसा ही होता है फिर मैं निराश क्यों ?प्रत्येक व्यक्ति अल्पज्ञ है उससे जाने अनजाने में भूल हो सकती है इसलिए मैं भी मन की गहराइयों से उसे न सोचूं ऐसा विचार मन में लाने से तनाव अपने आप कम हो जायेगा…







