बांग्लादेश में इन दिनों चल रही अशांति ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। पिछले साल की छात्र आंदोलन के प्रमुख नेता शरीफ ओसमान हादी की सिंगापुर में इलाज के दौरान मौत के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए। इस अशांति की आड़ में मीडिया संस्थानों पर हमले, संपत्तियों को नुकसान और कुछ जगहों पर सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं सामने आईं।
इसी क्रम में मयमनसिंह जिले के भालुका उपजिला में एक दुखद घटना हुई। स्थानीय गारमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले युवा दीपू चंद्र दास (उम्र करीब 25-30 वर्ष) की 18 दिसंबर की रात को भीड़ ने पिटाई कर हत्या कर दी। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगा था। हमले के बाद उनका शव क्षतिग्रस्त कर दिया गया। पुलिस ने घटनास्थल से शव बरामद कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। अंतरिम सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और कहा है कि “नए बांग्लादेश में ऐसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है”। रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) ने सात संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, और जांच जारी है।
यह घटना उस व्यापक अशांति का हिस्सा लगती है जो हादी की मौत के बाद भड़की। ढाका सहित कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने मीडिया हाउसों पर हमला किया, संपत्तियां जलाईं और सड़कें जाम कीं। अंतरिम सरकार ने नागरिकों से शांति बनाए रखने और हिंसा का विरोध करने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र ने भी हादी की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
बांग्लादेश में शरीफ ओसमान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा और अशांति का असर भारत पर भी पड़ रहा है। इस हिंसा में भारतीय राजनयिक मिशनों और सहायक उच्चायोगों पर हमलों की घटनाएं सामने आईं, जिसके बाद भारत ने कुछ वीजा केंद्रों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। इससे सीमा पार व्यापार, पर्यटन और चिकित्सा संबंधी यात्राओं पर तत्काल प्रभाव पड़ा है, क्योंकि पूर्वी भारत के कई क्षेत्र बांग्लादेशी व्यापारियों और मरीजों पर निर्भर हैं।
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सुरक्षा के लिहाज से चिंता बढ़ी है, खासकर पूर्वोत्तर राज्यों में, जहां सीमा पर घुसपैठ और तस्करी की आशंका अधिक है। अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय पर हमलों की घटनाएं भारत में गहरी चिंता पैदा कर रही हैं, और संसदीय समिति ने इसे 1971 के बाद सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती बताया है। द्विपक्षीय व्यापार में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जबकि क्षेत्रीय स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है। भारत ने शांतिपूर्ण संवाद और कानून-व्यवस्था की अपील की है, ताकि साझा हितों – जैसे कनेक्टिविटी और सुरक्षा सहयोग – को मजबूती मिले। उम्मीद है कि फरवरी 2026 के प्रस्तावित चुनाव के बाद स्थिति सामान्य हो और दोनों देश रचनात्मक संबंधों की दिशा में आगे बढ़ें।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले लंबे समय से चिंता का विषय रहे हैं। अंतरिम सरकार ने बार-बार कानून-व्यवस्था बहाल करने का वादा किया है, लेकिन ऐसी घटनाएं समाज में गहरा सदमा पहुंचाती हैं। जरूरत है कि सभी पक्ष संयम बरतें, कानून अपना काम करे और ऐसी घटनाओं के दोषियों को सजा मिले। हिंसा का चक्र कभी सकारात्मक परिणाम नहीं देता यह केवल समाज को और विभाजित करता है। उम्मीद है कि जल्द ही शांति बहाल हो और बांग्लादेश एक समावेशी लोकतंत्र की ओर आगे बढ़े।







