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    Home»साहित्य

    घंटा अब ख्याति पा चुका है

    ShagunBy ShagunJanuary 2, 2026 साहित्य No Comments4 Mins Read
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    Eight deaths due to contaminated water; Minister Kailash Vijayvargiya gets angry at a journalist – later apologizes!
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    त्वरित टिप्पड़ी : ओम माथुर

    घंटा शब्द बहुत महत्वपूर्ण होता है। यह आपको समय बताता है की 24 में से कितने घंटे गुजर चुके हैं। घंटा स्कूल-कालेज में बजता है, तो ये शिक्षण संस्थान का समय शुरू होने या खत्म होने का संकेत देता है। बीच-बीच में बजता है,तो पीरियड में इधर-उधर कहीं भी अगर विद्यार्थी है,तो तुरंत कक्षाओं में पहुंच जाते हैं। मंदिर में जाने पर भक्त इसे बजाकर भगवान के प्रति आस्था जताता है।

    लेकिन मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जिस तरह घंटा शब्द का उपयोग किया, वह आमतौर पर गाली देने या अश्लील बात कहने के लिए किया जाता है। इसके लिए बोलते समय इशारा भी किया जाता है। वैसे ये घंटा भी अब टीवी सीरियल और हिंदी फिल्मों के डायलॉग और गानों में आकर ख्याति पा चुका है। लेकिन फिर भी विजयवर्गीय वाले और जैसे घंटा बोलने से शरीफ और घरेलू लोग आज भी बचते हैं। लेकिन विजयवर्गीय को काहे की शर्म। वो नेता हैं। इंदौर के विधायक हैं। कई बार रह लिए। इसलिए अब पत्रकार को भी घंटे पर ही रखते हैं। ये उनका ही क्यों हर नेता का मिजाज होता है कि वह मतदाता यानि आम लोगों को घंटे पर ही रखते हैं। जब तक चुनाव नहीं जीत जाते हैं या सत्ता में नहीं आ जाते हैं, नेता मतदाता को सिर आंखों पर बैठाते हैं। लेकिन कुर्सी मिलते ही वह सिर-आंखों से घंटे पर आ जाता है।Eight deaths due to contaminated water; Minister Kailash Vijayvargiya gets angry at a journalist – later apologizes!

    विजयवर्गीय के विधानसभा इलाके में दूषित पानी पीने से करीब एक दर्जन लोग मर चुके हैं। सैंकड़ों अस्पताल में भर्ती है। पत्रकार ने इस पर सवाल पूछ लिया,तो आपा खो बैठे। पहले सवाल पर जवाब दिया फोकट के सवाल मत पूछो। जब पत्रकार ने कहा वह वहां जाकर आया है, तो जवाब मिला क्या घंटा होकर आए हो। सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल होने के बाद जब मैंने भी पहली बार देखा,तो मुझे भी लगा कि घंटा कोई स्थान होगा। जहां पत्रकार पीड़ितों से मिलने गया होगा और विजयवर्गीय पुष्टि कर रहे हैं क्या वो वाकई घंटा जाकर आया है। वो तो दो बार देखने व सुनने के बाद पता चला कि घंटा जगह नहीं,पत्रकार को सवाल के जवाब में दी जा रही गाली या चेतावनी थी।

    दरअसल,अब सत्ता से सवाल पूछने का फैशन देश में खत्म हो चुका है। ऐसे में अगर कोई पत्रकार भूले भटके सवाल पूछ लेता है, तो सत्तारूढ पार्टी के नेता बौखला जाते हैं। सत्ता के अंहकार में उन्हें लगता है इसकी इतनी हिम्मत कैसे हो गई कि,यह हमसे वह सवाल पूछ रहा है। फिर विजयवर्गीय का तो इंदौर में डंका बजता है, वहां उनसे ये सवाल उनकी सल्तनत को चुनौती वाली बात हो गई। मर गए तो मर गए, विजयवर्गीय के कौनसा घंटा फर्क पड़ता है। चुनाव होने में अभी 3 साल का समय है। तब तक मतदाता घंटा उनका क्या बिगाड़ लेगा।

    लेकिन घंटा तो पत्रकार ने भी विजयवर्गीय का बजा दिया। पहले तो तमीज से बात करने की नसीहत दी और फिर उनके एक चमचे की भी फीत उतार दी। इसके पहले की भाजपा विजयवर्गीय की फीत उतारती, उन्होंने माफी मांग ली। आखिर बदतमीजी भी तो उद्योगपति गौतम अडानी के चैनल के पत्रकार से की गई थी। अब अडानी की हैसियत सत्ता के गलियारों में क्या है, यह विजयवर्गीय बेहतर जानते ही होंगे। लेकिन एक पहलू यह भी है कि एनडीटीवी ने इस वीडियो को अपनी वेबसाइट से हटा लिया है। यानी उसे अपने पत्रकार अपमान बर्दाश्त था। लेकिन वह सत्ता से उलझना नहीं चाहता। क्यों? जवाब हर कोई जानता है।

    वैसे पत्रकार को घंटा बताने वाले विजयवर्गीय अपने बयानों के लिए हमेशा चर्चित रहते हैं। पिछले दिनों इंदौर में जब ऑस्ट्रेलियाई महिला खिलाड़ी की क्रिकेट टीम के खिलाड़ी से छेड़छाड़ की घटना हुई, तो उन्होंने कहा था खिलाड़ियों को प्रशासन को बात कर घूमने निकालना चाहिए था। यानी सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की नहीं, खिलाड़ियों की खुद की थी। इसके पहले एक मामले में वह खुलेआम इंदौर में आग लगाने की धमकी दे चुके हैं। विजयवर्गीय जैसे नेताओं को जनता ही बनाती है। लेकिन वह जनता को ही घंटा बताने में कोई हिचक नहीं रखते। जब पत्रकारों को नहीं बख्शते तो सोचिए आम लोगों को क्या बख्शते होंगे।

    Shagun

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