नई दिल्ली। गुजरात के सोमनाथ में 11 जनवरी 2026 को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के समापन दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भव्य भागीदारी की। यह चार दिवसीय आयोजन (8 से 11 जनवरी) 1026 में महमूद गजनवी के पहले आक्रमण की 1000वीं वर्षगांठ पर आयोजित किया गया, जो भारत की अटूट आस्था, सांस्कृतिक निरंतरता और स्वाभिमान का प्रतीक है।
सुबह प्रधानमंत्री ने शौर्य यात्रा का नेतृत्व किया। यह प्रतीकात्मक जुलूस उन अनगिनत वीरों को श्रद्धांजलि देता है जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा में प्राण त्यागे। यात्रा में 108 घोड़ों की टुकड़ी शामिल थी, जो वीरता और बलिदान का प्रतीक बनी। पीएम मोदी ने शंख बजाया, डमरू बजाया और यात्रा के दौरान उत्साहपूर्ण माहौल में भाग लिया।
इसके बाद उन्होंने श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में जलाभिषेक, दर्शन, पूजा-अर्चना और आरती की। हजारों भक्तों और स्थानीय लोगों ने सड़कों पर खड़े होकर उनका जोरदार स्वागत किया।

दोपहर में पीएम मोदी ने सद्भावना ग्राउंड में सार्वजनिक संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ विनाश का नहीं, बल्कि विजय, पुनर्निर्माण और सभ्यतागत साहस का प्रतीक है। उन्होंने औपनिवेशिक मानसिकता से ग्रस्त ताकतों पर निशाना साधते हुए कहा कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई, आक्रमणों को मात्र लूट बताकर सच्चाई छिपाई गई, लेकिन भारत की सांस्कृतिक चेतना कभी नहीं मिटी। उन्होंने एकजुट रहने और आने वाली पीढ़ियों को सच्चा इतिहास बताने का आह्वान किया।
शाम को पीएम मोदी ने 72 घंटे तक चल रहे सामूहिक ओमकार मंत्र जाप में शामिल हुए और 3000+ ड्रोन्स से बने शानदार ड्रोन शो के साक्षी बने। शो में भगवान शिव, त्रिशूल, तांडव, ऐतिहासिक योद्धा और मंदिर के पुनर्निर्माण के दृश्य दिखाए गए, जिसके साथ आतिशबाजी ने आकाश को रोशन कर दिया।
बता दें कि यह पर्व भारत की सनातन परंपरा और बलिदान की गाथा को नई ऊर्जा देता है। जय सोमनाथ!







