पश्चिम एशिया का संकट अब स्थानीय युद्ध से कहीं आगे बढ़ चुका है। ईरान, इज़राइल, अमेरिका और क्षेत्रीय शक्तियों के बीच चल रहा यह संघर्ष तत्काल मौत-जख्म तो ला ही रहा है, लेकिन इसका सबसे खतरनाक प्रभाव अब सामने आ रहा है – वैश्विक भूख का प्रकोप। संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) की ताज़ा रिपोर्ट (17 मार्च 2026) चेतावनी दे रही है कि अगर यह युद्ध जून तक जारी रहा, तो अतिरिक्त 4.5 करोड़ लोग गंभीर भुखमरी (acute hunger) की चपेट में आ जाएंगे। इससे वैश्विक आंकड़ा रिकॉर्ड 36.3 करोड़ तक पहुंच सकता है – जो पहले से ही 31.8-31.9 करोड़ के आसपास है।
वास्तविकता: रास्ते हैं ब्लॉक :
- होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में शिपिंग लगभग ठप है। दुनिया का लगभग 20-25% तेल, गैस और उर्वरक इसी रास्ते से गुजरता है। युद्ध शुरू होने (28 फरवरी 2026) के बाद से ट्रैफिक 90% तक गिर चुका है – जहाज़ इधर-उधर खड़े हैं, हमलों का डर, ईरानी धमकियां और बीमा कंपनियों का पीछे हटना सब कारण हैं।
- WFP के डिप्टी एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर कार्ल स्काउ ने जेनेवा में स्पष्ट कहा: “यह COVID और यूक्रेन युद्ध के बाद सबसे बड़ा सप्लाई चेन डिसरप्शन है।” उर्वरक की कमी से अफ्रीका में बुवाई का मौसम (planting season) प्रभावित होगा, जिससे फसलें घटेंगी और खाद्य संकट गहराएगा।
- एशिया में अकेले 91 लाख लोग अतिरिक्त प्रभावित हो सकते हैं। सब-सहारा अफ्रीका और आयात-निर्भर देश सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। पहले से भुखमरी झेल रहे परिवारों के लिए यह विनाशकारी होगा।

दूरगामी खतरा क्यों इतना गंभीर?
- तबाही का क्रम चेन रिएक्शन की तरह है: तेल की कीमतें $100/बैरल से ऊपर → ईंधन महंगा → ट्रांसपोर्ट और उत्पादन खर्च बढ़ा।
- उर्वरक की कमी → खेती प्रभावित → फसलें कम → खाद्य कीमतें आसमान छूएंगी।
- महंगाई का चक्र → गरीब देशों में खरीद क्षमता खत्म → भूख बढ़ेगी।
जो लोग इस युद्ध में शामिल नहीं हैं – अफ्रीका के किसान, एशिया के गरीब परिवार – वही सबसे ज्यादा भुगतेंगे। विडंबना यह कि युद्ध रोकने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं दिख रहा। ईरान रणनीतिक हमलों में कोई कसर नहीं छोड़ रहा, जबकि क्षेत्रीय देश अब बचाव में गोलबंद हो रहे हैं। ट्रम्प का 5-दिन का अस्थायी रोक का ऐलान राहत की हल्की किरण तो है, लेकिन पूर्ण युद्ध विराम दूर लगता है।
बता दें कि यह युद्ध अब सिर्फ़ मिसाइलों और ड्रोन का नहीं रहा बल्कि यह वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर हमला है। अगर जल्दी डिप्लोमेसी नहीं हुई, तो आने वाले महीनों में करोड़ों लोग भूख से लड़ेंगे, जबकि अपराध सिर्फ़ कुछ शक्तियों का होगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तुरंत जागना होगा – क्योंकि भूख की तबाही युद्ध से कहीं ज्यादा क्रूर और लंबी चलती है। गरीबी उनका कोई कसूर नहीं, लेकिन नतीजा वही भुगतेंगे। समय आ गया है कि मानवता युद्ध के बजाय बातचीत को प्राथमिकता दे, वरना यह संकट सिर्फ़ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि यह पूरी दुनिया को निगल लेगा।







