नई दिल्ली/मुंबई : अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर घोषित होते ही भारत सरकार ने तुरंत ईरान से उच्चस्तरीय संपर्क साध लिया है। मुख्य उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में फंसे अपने 16 जहाजों को सुरक्षित निकालना है, जिनमें दो लाख टन से अधिक एलपीजी (रसोई गैस) भरी हुई है।
यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल और गैस व्यापार का सबसे संवेदनशील चोकपॉइंट है।
सीजफायर से भारत को बड़ी राहत

बता दें कि पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका तनाव के चलते पिछले कई हफ्तों से होर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद रहा था, जिससे वैश्विक शिपिंग बुरी तरह प्रभावित हुई। सीजफायर के ऐलान के साथ भारत ने तुरंत ईरानी अधिकारियों से बातचीत शुरू कर दी है ताकि फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित निकाला जा सके।
विदेश मंत्रालय ने सीजफायर का स्वागत करते हुए कहा है कि क्षेत्र में शांति कायम होने और होर्मुज में निर्बाध नौवहन बहाल होने की उम्मीद है। कुछ भारतीय जहाज पहले ही स्ट्रेट पार कर चुके हैं, लेकिन अभी भी 16 जहाज फंसे हुए हैं।
फंसे जहाजों की स्थिति
- कुल 16 भारतीय जहाज (ज्यादातर तेल और गैस से संबंधित) होर्मुज के पश्चिम में अटके हुए हैं।
- इनमें दो लाख टन से अधिक एलपीजी भरी हुई है, जो घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति के लिए बेहद जरूरी है।
- भारतीय नौसेना ने पहले से ही एस्कॉर्ट सर्विस तैयार रखी है ताकि जहाज सुरक्षित रूप से गुजर सकें।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, ईरान के साथ बातचीत में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को प्राथमिकता दी जा रही है। कुछ एलपीजी टैंकर पहले ही स्ट्रेट पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि बाकी जहाजों के लिए कोऑर्डिनेशन तेज कर दिया गया है।
ऊर्जा सुरक्षा पर असर
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से भारत में एलपीजी की किल्लत की आशंका बढ़ गई थी और कीमतों पर दबाव पड़ा था। सीजफायर और जहाजों के निकलने से घरेलू बाजार को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में स्थिति सामान्य होने पर तेल और गैस की आपूर्ति सुधरेगी तथा फ्रेट और बीमा लागत भी कम होगी।
भारत ने लगातार कहा है कि होर्मुज में निर्बाध नौवहन वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक है। सीजफायर के बाद भारत की त्वरित कूटनीति इस दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।
फिलहाल अभी स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जैसे ही ईरानी पक्ष से पूरी क्लियरेंस मिलेगी, फंसे जहाजों को निकालने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।






