प्रतिबंध के बावजूद कहर जारी : एक और परिवार उजड़ गया, CM योगी ने कहा: मौत अब हादसा नहीं, मर्डर!
अपनी ढफली, राग पराया : देवेश पाण्डेय ‘देश’
लखनऊ की सड़कों पर फिर खून की नदी बह गई। 4 फरवरी 2026 को हैदरगंज ओवरब्रिज पर बाइक चला रहे 33 वर्षीय मोहम्मद शोएब (दुबग्गा निवासी) की गर्दन में चाइनीज मांझा फंस गया। तेज धार ने गले की नस काट दी, खून की धार बह निकली। राहगीरों ने ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया, लेकिन डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद भी शोएब की जान नहीं बचाई जा सकी।

शोएब एक दवा कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव थे। परिवार में पत्नी फौजिया, 7 साल की बेटी बुशरा, 2 साल की इकरा और बूढ़ी मां आबिदा बानो हैं। पिता की मौत सालों पहले हो चुकी थी। महज 5 महीने पहले उन्होंने सपनों का घर खरीदा था – बेटियों के भविष्य के लिए मेहनत कर रहे थे। आज वो घर विधवा और अनाथ बच्चों का शोक बन गया। कौन भरेगा फीस? कौन संभालेगा मां के कंधे? ये सवाल अब फौजिया और आबिदा बानो के दिल में चुभ रहे हैं।

ये कोई इकलौती त्रासदी नहीं – पूरे देश में ‘उड़ता ब्लेड’ मौत बांट रहा है
- मकर संक्रांति (14-15 जनवरी 2026) के आसपास ही 8+ मौतें: जौनपुर में डॉक्टर समीर हाशमी और एक युवक, तेलंगाना में 35 साल का आविदेश और 5 साल की बच्ची, कर्नाटक में संजुकुमार होसमानी, सूरत में 8 साल का लड़का।
- 100+ घायल: बच्चे, बाइक सवार, रिटायर्ड फौजी तक कोई बचा नहीं।
- लखनऊ में ही 24 घंटे में दूसरी घटना: शहीद पथ पर रिटायर्ड फौजी का चेहरा-जबड़ा बुरी तरह कटा।

प्रतिबंध कागजों तक सिमटा – अमल शून्य
- सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, NGT, राज्य सरकारें – सभी ने चाइनीज मांझा (कांच-धातु पाउडर से लेपित नायलॉन धागा) पर बैन लगाया। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, BNSS धारा 198 (5 साल सजा + 1 लाख जुर्माना), धारा 188 (6 महीने सजा), पशु क्रूरता निवारण अधिनियम धारा 11 (5 साल सजा + 50 हजार जुर्माना) – कानून मौजूद हैं। लेकिन बाजार में खुलेआम बिक्री, पतंगबाजों की लापरवाही, पुलिस की ढुलमुल कार्रवाई – सब जारी।
CM योगी का सख्त ऐलान
शोएब की मौत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा: चाइनीज मांझे से मौत अब ‘हत्या’ मानी जाएगी! पूरे प्रदेश में छापेमारी, मर्डर केस दर्ज, जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई के आदेश। लेकिन सवाल वही: बैन के बाद भी कैसे बिक रहा? क्यों नहीं थम रहा कहर?
ये धागा नहीं – ‘उड़ता हुआ रेजर’ है
कांच का महीन पाउडर + एल्युमिनियम/स्टील/टंगस्टन कार्बाइड + गोंद + नायलॉन डोर। आंख से दिखाई नहीं देता, लेकिन गले को छूते ही धमनियां काट देता है। मौत कुछ सेकंड में। पक्षी, जानवर, बच्चे, बाइक सवार – कोई सुरक्षित नहीं।
अब बहाने नहीं चलेंगे –
एक्शन चाहिए पुलिस: छापेमारी तेज करें, विक्रेताओं पर मर्डर का मुकदमा।
समाज: सुरक्षित मांझा चुनें, पतंग उड़ाएं लेकिन जानें न उड़ाएं।
अभिभावक: बच्चों को समझाएं – ये खेल नहीं, जुआ है।
सरकार: हेल्पलाइन, जागरूकता अभियान, सख्त निगरानी।
2026 की मकर संक्रांति खुशियां नहीं, आंसू ले आई। मोहम्मद शोएब आखिरी शिकार न बने – ये हम सबकी जिम्मेदारी है।
चाइनीज मांझा = मौत का फंदा। इस्तेमाल = हत्या। अब चुप नहीं रहेंगे!







