लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर यूनिवर्सिटी (बीबीएयू), लखनऊ के कृत्रिम बुद्धिमत्ता उत्कृष्टता केंद्र ने अन्वेषणात्मक डेटा विश्लेषण (EDA) और Python-LangChain के माध्यम से जेनरेटिव एआई पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया। कार्यशाला में भारत के साथ-साथ अमेरिका से आए शोधार्थी, शिक्षक और पेशेवरों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य पर गहन मंथन किया।
कुलपति ने किया AI उत्कृष्टता केंद्र का शुभारंभ
कार्यशाला का उद्घाटन दीप प्रज्वलन, विश्वविद्यालय कुलगीत और बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर को पुष्पांजलि के साथ हुआ। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.के. मित्तल ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता उत्कृष्टता केंद्र का औपचारिक शुभारंभ किया।

अपने संबोधन में कुलपति ने कहा कि तकनीकी विकास जल की धारा की तरह निरंतर आगे बढ़ता रहता है, इसलिए नई तकनीकों को अपनाना जरूरी है। उन्होंने एआई के उपयोग के साथ शारीरिक, बौद्धिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया।
मुख्य आकर्षण और विशेषज्ञ व्याख्यान
- मुख्य वक्तव्य उद्योग विशेषज्ञ अखिलेश शुक्ला ने दिया, जिसमें मशीन लर्निंग और जेनरेटिव एआई के नवीनतम रुझानों तथा उनके व्यावहारिक उपयोगों पर विस्तार से चर्चा हुई।
- स्कूल ऑफ इंफॉर्मेशन साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी के संकायाध्यक्ष प्रो. एम.पी. सिंह ने एआई से जुड़ी बढ़ती साइबर धोखाधड़ी की चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
- सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. राजश्री ने राष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता कार्यक्रम और एआई प्रज्ञा जैसी सरकारी पहलों की जानकारी दी।
व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष फोकस
कार्यशाला के दो दिवसीय तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों को अन्वेषणात्मक डेटा विश्लेषण (EDA) और Python तथा LangChain के जरिए जेनरेटिव एआई के व्यावहारिक अनुप्रयोगों का हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दिया गया।
दूसरे दिन प्रो. एस.के. द्विवेदी ने एआई के नवीनतम रुझानों और सामाजिक प्रभावों पर व्याख्यान दिया, जबकि डॉ. सीमा शुक्ला ने फिल्म निर्माण और मीडिया उद्योग में एआई की बढ़ती भूमिका पर अपने विचार रखे।
समन्वय और उपस्थितिकार्यशाला का समन्वयन कंप्यूटर विज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. बबिता पांडेय ने किया। कंप्यूटर विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. दीपा राज ने पूरी टीम को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
इस मौके पर डॉ. शालिनी, डॉ. मनोज, डॉ. अमित के. सिंह, डॉ. आदित्य खम्पारिया, डॉ. नवीन हलप्पा और अरविंद शुक्ला सहित कई गणमान्य शिक्षकों की उपस्थिति रही।
बता दें कि यह कार्यशाला बीबीएयू को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है। प्रतिभागियों को अत्याधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान मिलने से शोध और उद्योग दोनों क्षेत्रों में नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद है।






