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    Home»ब्लॉग

    आजादी के लिए फड़फड़ाते हम और आजादी के मायने!

    By August 15, 2017Updated:August 6, 2018 ब्लॉग No Comments6 Mins Read
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    युवावस्था जिंदगी का एक ऐसा पड़ाव होता है जहां आजादी की जरूरत सबसे ज्यादा महसूस होती है. हमारे पूर्वजों ने कठिन संघर्ष के बाद जब हमें स्वतंत्रता दिलायी थी, तब उनके लिए आजादी के बुनियादी मायने अलग थे, लेकिन आजादी के 69 साल बाद आज हमारे पास विचारों के आदान- प्रदान से लेकर तकनीक, शिक्षा, संसाधन, विज्ञान, परिधान हर तरह की आजादी है. ऐसे में जानना जरूरी है कि आज के युवाओं के लिए आजादी के क्या मायने हैं?

    अक्सर लोगों को लगता है कि किशोरों के लिए स्वतंत्रता दिवस का मतलब ध्वजारोहण, स्कूल-कॉलेज के फंक्शन, एक दिन की छुट्टी, टीवी-एफएम पर देशभक्ति के गाने सुनना, फेसबुक और वाट्सएप पर मैसेज पोस्ट करने तक ही सीमित है. आजादी को लेकर इस पीढ़ी का अंदाज भले ही अलग नजर आता हो, लेकिन एक सच यह भी है कि आज के युवा अपनी आजादी और अधिकारों का इस्तेमाल नये भारत के निर्माण के लिए भी कर रहे हैं।

    ऑनलाइन इंडिपेंडेंसी:

    इंटरनेट अफेक्शन में बसनेवाले युवाओं के लिए आज विचारों की स्वतंत्रता काफी मायने रखती है. वे खुल कर हर अपने विचारों को साझा करते हैं. अपने विचारों, अधिकारों को लेकर युवाओं की एकजुटता 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान दिखी थी, जब वे खुलकर सोशल नेटवर्किग साइट्स पर भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलते और अन्ना का समर्थन करते नजर आये।
    सोशल मीडिया ने आंदोलन को जनआंदोलन का रूप दिया. हाल में नेट न्यूट्रेलिटी मामले पर कड़ा विरोध जताया. युवाओं का मत है कि जैसे मोबाइल नेटवर्क कंपनी यह तय नहीं कर सकती कि आप किसे कॉल कर सकते हैं और किसे नहीं, वैसे ही इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर को भी ऑनलाइन अभिव्यक्ति को सीमा में नहीं बांधना चाहिए।

    काम करने की आजादी:

    आज के युवा माता-पिता के सपनों के बजाय खुद के सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला रखते हैं. वे आर्थिक रूप से सक्षम होना चाहते हैं. वे पारंपरिक सरकारी नौकरियों के बजाय ऐसी नौकरियों को तरजीह दे रहे हैं, जहां उन्हें बेहतरीन पैकेज के साथ काम करने की आजादी भी मिले।

    जीवनसाथी चुनने की आजादी: 

    आज के युवा घरवालों के बजाय अपनी पसंद के लाइफ पार्टनर को चुनने को प्राथमिकता दे रहे हैं. जाति, धर्म, समाज जैसे बंधन में बंधने को वे तैयार नहीं हैं. इसके कई सकारात्मक परिणाम इंटरकास्ट मैरिज के बढ़ते ग्राफ, दहेज मामलों में कमी आदि के रूप में सामने भी आ रहे हैं. हाल ही में हरियाणा के सतरोल खाप पंचायत ने अपने क्षेत्र में 36 अलग-अलग जातियों के लोगों के आपस में शादी करने पर से प्रतिबंध को समाप्त कर दिया है। हरियाणा जैसे राज्य में यह एक बड़ा बदलाव है।

    पिछले साल हुए एक सर्वे में लगभग 42 हजार लोगों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अंतरजातीय विवाह किया है, हालांकि भारत में ऐसी शादियों का आंकड़ा अभी 5 फीसदी है. मध्य प्रदेश में यह 1} और गुजरात व बिहार में 11} से भी अधिक है. इस तरह अगर देखा जाये तो युवा अपनी आजादी का इस्तेमाल समाज की कई रूढ़ीवादी परंपरा को खत्म करने के लिए कर रहे हैं।

    कुछ उठाते हैं गलत फायदा:

    एक ओर जहां युवा आजादी का इस्तेमाल अपनी और देश की तरक्की के लिए के लिए करते हैं, वहीं कुछ मौज-मस्ती, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने या नशे के लिए अपनी आजादी का इस्तेमाल करते हैं।

    कुछ यह भी मानते हैं कि अगर आजादी को नियमों में बांध दिया जाये तो वह आजादी कहां रही. साल की शुरुआत में फ्रांस के अखबार शार्ली एब्दो के ऑफिस में हुए आतंकी हमले के बाद अभिव्यक्ति की आजादी की सीमा को लेकर सारी दुनिया में बहस तेज हो गयी।

    कई लोगों ने इस बात का समर्थन किया कि अभिव्यक्ति की आजादी उसी सीमा तक सही है जब तक यह किसी संप्रदाय विशेष को उकसाने या अपमानित करने का कार्य न करे, हालांकि हमले को लेकर हर किसी ने शार्ली एब्दो के साथ एकजुटता दिखायी और इसकी चौतरफा निंदा हुई।

    आइए इस बड़े अवसर पर कुछ छोटे संकल्प भी ले लें

     

    आजादी का त्योहार मनाने का यह मौका हमें उन स्वतंत्रता सेनानियों की वजह से मिला जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों को आजाद हवा में सांस लेने का मौका प्रदान करने के लिए हंसते हंसते अपनी शहादत दे दी। आजादी के आंदोलन में शहीद हुए लोगों को नमन के साथ ही हमें उन बहादुर सैनिकों का हौसला भी बढ़ाना चाहिए जोकि एक छोर पर लगातार पड़ोसी देश की ओर से की जा रही गोलीबारी का करारा जवाब देते हुए तो दूसरे छोरों पर सीमा की सुरक्षा और उग्रवादी गुटों का सामना करने के लिए मुस्तैदी से डटे हुए हैं।

    इस राष्ट्रीय पर्व पर उन सैनिक परिवारों का भी हमें ध्यान रखना चाहिए जिनके लाल इस खुशी के मौके पर उनसे दूर हैं। इस पर्व पर लाल किले से लेकर जिला मुख्यालयों, स्कूलों, पार्कों आदि तक में नेताओं और अधिकारियों की ओर से बड़ी बड़ी बातें और बड़े बड़े वादे किये जाएंगे लेकिन इस मौके पर हमें कुछ छोटी छोटी बातों का भी ध्यान रखने का संकल्प लेना चाहिए जोकि नागरिकों और देश को बड़ा बनाने में मददगार होंगी।

    कुछ छोटी छोटी बातों पर चर्चा करते हैं

    इसमें कोई दो राय नहीं कि हम सभी भारतीय, चाहे किसी भी वर्ग या मजहब के हों, राष्ट्रभक्ति हमारे अंदर कूट कूट कर भरी हुई है। कभी कोई आतंकवाद की घटना हो या सीमा पार से फायरिंग की घटना हो हम सभी उद्वेलित हो जाते हैं। मन में भाव आता है कि सीमा तक जाकर दुश्मन को अच्छा सबक सिखा दें। लेकिन दूसरी तरफ अगर हमें कूड़ा करकट डालने घर के बाहर गली के कोने तक भी जाना पड़े तो हम उसकी जहमत नहीं उठाते और कई जगह देखा जाता है कि खिड़की से ही कूड़ा सड़क पर डाल दिया जाता है।

    • हमारे यहां स्त्री का सम्मान करने की बात तो बहुत होती है लेकिन हम यहां भी भेद करते हैं। हमारी बहन-बेटी को कोई कुछ कहे तभी हमें महिला अधिकारों का ख्याल आता है लेकिन दूसरे की बहन का अपमान होते देखने जैसी घटनाएं हमारे यहां आम हैं।
    • सड़क पर वाहन चलाते समय हमारा अहंकार हमारे वाहन की कीमत का चौगुना होता है। इसलिए जब हमारे वाहन पर कोई खंरोच आए तो अहंकार तुरंत गुस्से में तबदील हो जाता है। बढ़ती रोड़रेज की घटनाएं इसका उदाहरण हैं।
    • हमारी नजरें वैसे तो बड़ी चौकस रहती हैं और साथ जा रही गाड़ी में कौन बैठा है या बैठी है इसकी भी खबर कई लोग लेते रहते हैं लेकिन सड़क पर कोई गिरा पड़ा है तो वह हमें दिखाई नहीं देता और हम आगे निकल जाते हैं।
    • कौन कहता है कि हम लोगों को नैतिक शिक्षा नहीं मिली। लेकिन इसको ग्रहण करते समय हम शायद यह सुनना भूल गये कि इसे खुद पर भी लागू करना है। यही कारण है कि हम अकसर दूसरों को ही नैतिक शिक्षा देते नजर आते हैं।
    • हम भ्रष्टाचार के खात्मे का सपना दिखाने वालों से तो जवाब मांगते हैं लेकिन खुद से सवाल नहीं पूछते कि इस समस्या के निवारण के लिए खुद-से क्या किया।
    • नागरिकों को संविधान द्वारा प्रदत्त सारे अधिकार हमें अच्छी तरह से मालूम हैं लेकिन देश के प्रति नागरिकों के कर्तव्यों का शायद ही हमें भान हो।

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