मशहूर नाटक गिल्टी-नॉट गिल्टी मंचन 21 फरवरी को

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व्यक्तिगत पूर्वाग्रह, अकसर लोगों पर इस कदर हावी हो जातें हैं कि सच जानने के सारे रास्ते ख़ुद-ब-ख़ुद बन्द हो जातें हैं

लखनऊ, 14 फरवरी। नगर की प्रतिष्ठित नाट्य संस्था थर्ड विंग की ओर से आगामी बुधवार, 21 फरवरी 2018 को शाम 06:45 बजे गोमती नगर में स्थित संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगेजी ऑडिटोरियम में “गिल्टी-नॉट गिल्टी” नाटक का मंचन किया जा रहा है। इस नाटक का निर्देशन वरिष्ठ नाट्य निर्देशक पुनीत अस्थाना ने किया है।इस नाटक की रिहर्सल के दौरान पुनीत अस्थाना ने इस नाटक के कथानक और इसमें किये गए बदलावों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि व्यक्तिगत पूर्वाग्रह, अकसर लोगों पर इस कदर हावी हो जातें हैं कि सच जानने के सारे रास्ते ख़ुद-ब-ख़ुद बन्द हो जातें हैं। यही स्थिति इस नाटक में रेखाकिंत की गई है। बाप के क़त्ल के इल्ज़ाम में एक लड़का अदालत के कटघरे में खड़ा है। कुछ ​स्थितियां उसके क़ातिल होने की तरफ इशारा करती हैं, फिर भी कुछ ऐसी बातें हैं जो उसके कातिल साबित होने में शक पैदा करतीं हैं। ऐसे में इस मामले के सभी पक्षों पर और अधिक गहनता से विचार करने के लिये एक ‘जूरी’ का गठन किया जाता है।

इस जूरी की सम्पूर्ण कार्यवाही ही इस नाटक का तानाबाना है। जैसे-जैसे नाटक आगे बढ़ता है, जूरी के सदस्यों के अलग-अलग तरह के पूर्वाग्रह, प्याज की परतों की तरह निकलने लगतें हैं। जूरी की बैठक में लड़के के गिल्टी या नॉट गिल्टी पर बात करते करते, उत्तेजना इतनी बढ़ जाती है कि जूरी सदस्य आपस में ही एक दूसरे पर कीचड़ उछालने लगतें हैं। पर एक जूरी सदस्य बड़ी दृढ़ता के साथ, उस लड़के के ख़ूनी होने पर शक ज़ाहिर करता है और ‘सत्यमेव ज्येयते’ के रास्ते पर चलते हुए लोगों को अपने अपने पूर्वाग्रहो से हट कर निस्पक्ष रहते हुए लड़के के गिल्टी-नॉट गिल्टी होने पर विचार करने के लिये प्रेरित करता है।

उन्होंने बताया कि मूल अमरीकी नाटक में जूरी के सदस्यों की संख्या बारह है, जबकि इस प्रस्तुति में जूरी सदस्यों की संख्या ग्यारह रखी गई है। इसके अलावा इसमें मूल नाटक से हट कर, दो महिला जूरी सदस्यों को भी रखा गया है। पुनीत अस्थाना ने बताया कि जूरीरूम का सैट भी आकर्षक तरीके तैयार किया जाएगा वहीं एम.हफीज़ नाटक में लाइट डिजाइनिंग कर रहे हैं। इस नाटक में नगर के अनेक वरिष्ठ रंगकर्मी काम कर रहें हैं, जिनमें केशव पंडित, हरीश बडौला, मनोज वर्मा, सुधान्शु सावंत, तुषार बाजपेई, अली ख़ान, श्यामली दीक्षित के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

पुनीत अस्थाना ने बताया कि इस नाटक की प्रस्तुति करना उन्हें रोमांचित करता है क्यों कि यह नाटक रेगिनाल्ड रोज़ के सुप्रसिद्ध कोर्टरूम ड्रामा ’12 एन्ग्री मैन’ का हिन्दुस्तानी अनुकूलन है। इस टेलीप्ले पर अमरीका में इसी नाम से 1957 में एक फिल्म भी बन चुकी है। हिन्दुस्तान में भी 1986 में इसी टेलीप्ले पर बासु चटर्जी के निर्देशन में एक फिल्म ‘एक रूका हुआ फैसला’ नाम से बन चुकी है।