Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Wednesday, June 3
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»करियर»Education

    प्रकृति बंधन

    ShagunBy ShagunJuly 7, 2020 Education No Comments8 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 699

    अरविन्द कुमार साहू

    सावन आते ही चारों ओर प्रकृतिक सुषमा छा गई थी। जहाँ – तहाँ नए पौधों के अंकुर फूटने लगे थे। नई कोपलों और रंग बिरंगे फूलों ने धरती की चादर पर मानो चित्रकारी कर दी थी। रक्षाबंधन का पर्व नजदीक होने के कारण उत्सव की तैयारियां जोरों पर थी। महिलाओं के साथ ही बच्चों का उत्साह भी देखते ही बनता था।

    माँ ने आँगन मे जल से भरा मिट्टी का कलश रखकर उसे गोबर से सजाकर उसी मे जौ के दाने बो दिये थे । उनमे निकले अंकुरों को थोड़ा – थोड़ा रोज बढ़ते हुए श्रेया बड़ी उत्सुकता से देखती थी।
    माँ ने उसे बताया था कि इन पौधों को कजली कहते है । रक्षाबंधन के दिन तक ये कजली उसके एक अंगुल बराबर तक बड़ी हो जायेगी। फिर इन्हे वह मामा जी के कानों के पास लगाकर पारंपरिक ढंग से रक्षाबंधन का पर्व मनायेंगी।
    “पर मैं तो राहुल भैया को सुंदर और बड़ी सी बाजार वाली राखी ही बांधूगी ।” – श्रेया ने माँ से कहा-
    “हाँ – हाँ, मैं तो छोटे भीम की कार्टून वाली राखी ही बंधवाऊंगा।” – राहुल ने भी आँगन मे आते हुए श्रेया के सुर में सुर मिलाया।
    “जरूर बच्चों, जो तुम्हें अच्छा लगे । वैसे भी आजकल तो यही चलन में है । पर मै तो पारंपरिक ढंग से ही सारे त्योहार मनाती हूँ।” – माँ ने मुस्कुराते हुए कहा।

    “माँ ! ऐसा क्यों ? क्या तुम्हें नया चलन अच्छा नहीं लगता ?” – राहुल ने आँखें सिकोड़ी।
    “नयापन भी अच्छा लगता है बेटा, क्योंकि समय के साथ कुछ बदलाव होने से परम्पराएँ व त्योहार अधिक दिन तक चलते है । पर हमें त्योहार मनाने के वे कारण भी जरूर याद रखने चाहिए जो कि परम्पराओं के साथ स्वयं जुड़े होते हैं।”

    “अच्छा ….?” – श्रेया ने आश्चर्य से कहा ।
    “रक्षा बंधन मनाने के पीछे ऐसा क्या कारण है ?”- अब तो राहुल भी पूछ बैठा।

    “बच्चों ! प्रत्येक भारतीय पर्व – त्योहार और पूजा – पाठ की सभी परम्पराएँ किसी न किसी रूप मे प्रकृति और पर्यावरण से ही जुड़ी हुई है । रक्षा बंधन का पर्व भी उनमें से एक है। यह समय वर्षा ऋतु का है। जब प्राकृतिक वातावरण एकदम धुला, साफ, हरा – भरा और प्रदूषण मुक्त होता है। ऑक्सीज़न की मात्रा वायुमंडल मे बढ़ जाती है। नए पेड़ – पौधे उगने लगते है और जीव जंतुओं के लिए भी अनुकूल वातावरण बन जाता है। इसका सर्वाधिक लाभ हमें ही मिलता है।” – बच्चों को यह जवाब रोचक लगा तो वे ध्यान से सुनने बैठ गए।

    माँ ने आगे बताया – ‘अच्छी वर्षा और अच्छे वातावरण से फसलें अच्छी होती है । पेड़ – पौधों से फल – फूल, औषधियाँ, कीमती लकड़ियाँ प्रचुर मात्रा मे प्राप्त होती है । ये सारी वस्तुएँ हमारे दैनिक जीवन की जरूरतें तो पूरी करती ही हैं, साथ में हमें अच्छा स्वास्थ्य और लम्बी आयु भी प्रदान करती है । इसलिए पर्वों – त्योहारों में हम प्रकृति के प्रतीकों और प्राकृतिक उत्पादों को सम्मिलित करके उनके प्रति कृतज्ञता भी ज्ञापित करते है । इससे प्रकृति की संरक्षा और सुरक्षा की हमारी जरूरत और आदतें अपने आप परिष्कृत होती रहती है।

    “हाँ माँ, सचमुच हमें अपने अपने ढंग से प्रकृति का आदर करना चाहिये।” – बच्चों ने सहमति जतायी।
    “अच्छा माँ ! सच बताओ, रक्षा बंधन के पर्व पर हम अपने भाइयों को ही राखी क्यों बांधते हैं ?” – श्रेया ने मासूम सा सवाल किया तो राहुल भी चौकन्ना हो गया ।

    माँ गंभीर हो उठी। बोली – “ बेटी ! सिर्फ भाइयों को ही नहीं हम अपने किसी भी प्रिय व्यक्ति को राखी का धागा बांध सकते है। भाई, पिता, गुरु, सैनिक, शासक या किसी अन्य को भी । जिसके भी प्रति हम सम्मान की भावना रखते हैं, उसकी भी समृद्धि और लम्बी आयु की कामना अवश्य करते है। ये राखी का धागा तो एक दूसरे को प्रेम सम्बन्धों में बांधे रखने का प्रतीक भर है। असली उद्देश्य तो भावनात्मक लगाव और एक दूसरे की सुरक्षा – संरक्षा मजबूत बनाए रखने की मंशा होती है।”

    “ये सिर्फ बहनों का ही एकाधिकार नहीं है। हम लोग किसी को रक्षा सूत्र बाँध सकते हैं, जैसे अच्छे मित्रों को ‘फ्रेंड्स बैंड’ बांधते है । ….समझी ? ” राहुल ने श्रेया को चिढ़ाते हुए कहा ।

    लेकिन राहुल की इस बात से श्रेया चिढ़ी नहीं बल्कि गंभीर हो उठी – “ हाँ मैंने भी पिछली बार पुरोहित जी को मुहल्ले में दादाजी, पिताजी और सभी लोगो की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते देखा था।”

    अब श्रेया के दिमाग मे कुछ नया विचार कौंध रहा था। कहने लगी – “ठीक है माँ, ये तो समझ में आ गया कि हम किसी भी रिश्ते को प्रतीक बनाकर राखी बांध सकते है । तब क्या यह पेड़ – पौधों पर भी लागू होता है ? आखिर वे भी तो हमें अनेक जीवनदायी वस्तुएँ देकर, हमारे जीवन के बेहद नजदीक हो जाते है।”

    “बिलकुल बेटी, यह बंधन हमारे और प्रकृति के रिश्ते पर भी शत – प्रतिशत लागू होता है । कुछ दिन पहले तुम वटसावित्री पर्व की पूजा पर मेरे साथ गई थी न ?”

    “हाँ माँ, वहाँ तमाम महिलाएँ बरगद के पेड़ के नीचे पूजा करके उसके चारों ओर कच्चा धागा लपेट रही थी। वहाँ तो ढेर सारा मोटा धागा अभी भी बंधा हुआ है । यह कैसा पर्व है ?”

    “बेटी ! यह एक प्रकार से प्रकृति का रक्षाबंधन है। दरअसल बरगद का वृक्ष हजारों वर्षों तक जीवित और हरा – भरा रह सकता है । इसलिए इसे दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है । ऐसी मान्यता है कि पौराणिक काल में ऐसे ही एक वटवृक्ष (बरगद) की छत्रछाया में सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण बचाये थे। इसी कारण आज भी महिलाएँ बरगद की पूजा करके कृतज्ञता ज्ञापित करती है और उसे रक्षा सूत्र बाँधकर एक दूसरे की दीर्घायु की कामना करती है।”

    माँ ने एक लम्बी सांस छोड़ते हुए कहा – “……… और बेटी ! यह तो तुम जानती ही हो कि ऐसे वृक्षों को पूज्य बना देने से हमारे समाज में उनकी कटान नहीं हो पाती, जिससे हरियाली और वृक्ष अधिक सुरक्षित हो जाते हैं ।”

    “अरे वाह माँ ! तुमने तो बड़े काम की बात बता दी । क्या यह प्रकृति बंधन हम सारे पेड़ो पर लागू नहीं कर सकते ? आखिर सभी पेड़ हमें कुछ न कुछ अवश्य देते हैं । उनकी भी सुरक्षा और संरक्षा इस भावनात्मक बंधन से हो सकती है ।” – इस बात से श्रेया के साथ ही राहुल भी चहक उठा।
    माँ ने उठते हुए कहा – “अवश्य हो सकती है बच्चों ! जरूरत सच्चे मन से पहल करने और अभियान चलाने भर की है ।”

    इस बातचीत से राहुल और श्रेया एक नई ऊर्जा से भर उठे। वह बाहर निकलकर मुहल्ले के बच्चों के साथ चर्चा करने चल पड़े। फिर सभी बच्चे ज्ञानू दादा के बरामदे में जमा हुए। ज्ञानू दादा पुराने पत्रकार थे और मुहल्ले के बच्चों के सवालों और समस्या समाधान के लिए हमेशा तैयार रहते थे।

    श्रेया और राहुल ने ज्ञानू दादा से माँ के साथ हुई चर्चा को दोहराते हुए कहा कि कहा – “ दादा जी ! शहर में हर वर्षा ऋतु में प्रशासन, स्वयंसेवी संगठनों और छात्रों द्वारा तमाम पेड़ पौधे लगाए जाते हैं, किन्तु साल बीतते उनमें से अनेक पौधे सूख जाते हैं या फिर थोड़े बड़े होने पर कट जाते हैं। उनकी देखभाल के लिए ठीक व्यवस्था नहीं होती, जिससे पौधरोपण का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता ।”

    “तो क्या कहना चाहते हो तुम लोग ?” – ज्ञानू दादा ने आश्चर्य से पूछा।

    “दादा जी यदि हम रक्षा बंधन को वटसावित्री पर्व की भांति प्रकृति के प्रति आस्था से जोड़ दें तो इनकी देखरेख आसानी से हो सकती है।”

    “अरे वाह ! यह तो बहुत अच्छा विचार है, किन्तु होगा कैसे ?” – दादा जी के साथ ही मुहल्ले के सारे बच्चे उत्साहित हो उठे।

    – “एक उपाय है, हम क्यों न अपने चुने हुए किसी वृक्ष को रक्षासूत्र बाँधकर उसकी देखभाल का जिम्मा लेले और ऐसा ही करने के लिए दूसरों को भी प्रेरित करें।”

    – “अवश्य बच्चों ! ये तो क्रान्तिकारी विचार है। इसे तो बड़ों का भी खूब समर्थन मिलेगा।”
    – “तो फिर देर किस बात की ? इसकी योजना अभी से बना लेते है। शुभारम्भ हम अपने मुहल्ले के पेड़ों से करेंगे।”

    बच्चों की बैठक जम गई। कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार होने लगी। ज्ञानू दादा ने इस अभियान के प्रचार – प्रसार और बड़ों को भी जोड़ने का जिम्मा उठा लिया। दो – तीन बैठकों में सब कुछ सुनिश्चित हो गया। …और फिर इस बार के रक्षाबंधन की बहुप्रतीक्षित सुबह भी आ गयी।

    नहा-धो कर लक-दक कपड़ों मे तैयार बच्चों ने पहले घर में रक्षाबंधन मनाया । भाई – बहनों ने एक दूसरे को रखियाँ बाँधकर मिठाइयाँ खिलाई, फिर थाल सजाकर मुहल्ले में निकल पड़े । उनके पीछे ज्ञानू दादा और अन्य लोग भी चल पड़े। पेड़ों को रखियाँ बाँधी जाने लगी। दादा जी ने कुछ पत्रकारों को भी बुलवा लिया था । कैमरों के फ्लैश चमक उठे। तालियाँ बजने लगी । अगले दिन की सुबह एकदम नयी लग रही थी । ये सारा अभियान अखबारों और टीवी मे छा गया था। श्रेया और राहुल समेत मुहल्ले के बच्चे इस अभियान के हीरो बन गए थे ।

    अब पेड़ों के सारे शहर में हरियाली की मुस्कान खिलने लगी थी। – मोबाइल: 9451268214

    Shagun

    Keep Reading

    Lesser-Known Pilgrimage Sites Now on the Tourism Map! UP Government's New Mission

    अल्पज्ञात तीर्थ अब पर्यटन मानचित्र पर! UP सरकार का नया मिशन

    The True Essence of Devotion: A Scripturally Prescribed 'Bada Mangal' Bhandara at Shri Shakti Dham Ashram

    भक्ति का सच्चा स्वरूप: श्री शक्ति धाम आश्रम में शास्त्रोक्त ‘बड़ा मंगल’ भंडारा

    A New Chapter in Mumbai Women's Cricket as Thane Skyrisers Begin Their Journey in Style Thane Skyrisers Make a Strong Start in the W20 League

    ठाणे स्काईराइजर्स का धमाकेदार एंट्री! महिला क्रिकेट में नया तूफान

    Anil Bhushan Chaturvedi Assumes Charge as Acting Director of Basic Education

    अनिल भूषण चतुर्वेदी ने संभाली प्रभारी शिक्षा निदेशक बेसिक की जिम्मेदारी

    CM Yogi's Strict Action: Knife Attacks Under the Guise of Friendship Will Not Be Tolerated!

    सीएम योगी का सख्त एक्शन: दोस्ती की आड़ में चाकूबाजी बर्दाश्त नहीं!

    Lucknow: The Fifth 'Bada Mangal' Bhandara Begins Tomorrow—The 'City of Nawabs' to Resound with Chants of Bajrangbali and the Aroma of Rasgullas and Kulfis

    लखनऊ में कल से पांचवां बड़ा मंगल भंडारा: रसगुल्ला-कुल्फी की महक और बजरंगबली के जयकारों से गूंजेगी नवाबों की नगरी

    Add A Comment
    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    US Takes Tough Action in Hormuz: 118 Ships Repelled, 5 Disabled

    होर्मुज में अमेरिका का सख्त एक्शन: 118 जहाज खदेड़े, 5 को किया पंगु

    June 3, 2026
    An Exemplar of Tolerance: The Unique Encounter Between Saint Dadu and the Daroga

    सहनशीलता की मिसाल: संत और दरोगा की अनोखी मुलाकात

    June 3, 2026
    Lesser-Known Pilgrimage Sites Now on the Tourism Map! UP Government's New Mission

    अल्पज्ञात तीर्थ अब पर्यटन मानचित्र पर! UP सरकार का नया मिशन

    June 2, 2026
    The True Essence of Devotion: A Scripturally Prescribed 'Bada Mangal' Bhandara at Shri Shakti Dham Ashram

    भक्ति का सच्चा स्वरूप: श्री शक्ति धाम आश्रम में शास्त्रोक्त ‘बड़ा मंगल’ भंडारा

    June 2, 2026
    A New Chapter in Mumbai Women's Cricket as Thane Skyrisers Begin Their Journey in Style Thane Skyrisers Make a Strong Start in the W20 League

    ठाणे स्काईराइजर्स का धमाकेदार एंट्री! महिला क्रिकेट में नया तूफान

    June 2, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading