रवीन्द्रालय चारबाग में छुट्टी वाले दिन चहल-पहल! भगत सिंह की ‘मैं नास्तिक हूं’ खूब बिकी, दर्जनों किताबों का विमोचन और गहन चर्चाएं, साहित्य का जीवंत महाकुंभ जारी!
लखनऊ, 14 मार्च: रवीन्द्रालय चारबाग में चल रहे लखनऊ पुस्तक मेले का दूसरा दिन (14 मार्च) कमाल का रहा! छुट्टी होने से भीड़ उमड़ी, शिक्षक-स्कूल वाले बड़े पैमाने पर किताबें खरीदते दिखे। निःशुल्क प्रवेश और हर किताब पर कम से कम 10% छूट ने खरीदारी को और मजेदार बना दिया।
खास बात: युवा पीढ़ी भगत सिंह की क्रांतिकारी किताब ‘मैं नास्तिक हूं’ की ओर खिंची! नेशनल बुक ट्रस्ट के अधिकारी नरेंद्र सिंह ने बताया कि ये किताब, बच्चों की वैदिक मैथेमेटिक्स, ‘दि स्टोरी ऑफ अवर रिवर्स’ और उर्दू साहित्य की किताबें सबसे ज्यादा बिक रही हैं। अध्यात्म और क्रांति – दोनों ध्रुवों पर किताबें बराबर पसंद आ रही हैं!
दिनभर विमोचन और चर्चाओं का दौर चला: नवसृजन प्रकाशन के समारोह में महेश चंद्र द्विवेदी की अध्यक्षता में मंजू सक्सेना की लघुकथाएं ‘एक कप चाय’, श्रीकृष्ण द्विवेदी द्विजेश का ‘छाया बसंत’, हेमंत कुमार का ‘अवध का लोक इतिहास’, डॉ. सुषमा सौम्या का ‘नमन’, अनिल किशोर शुक्ला का ‘मेरे अष्टपदी अगीत’ और मनोरमा श्रीवास्तव का ‘तितलियों के देश में’ लॉन्च हुआ।
डॉ. शिप्रा चतुर्वेदी की ‘जर्मन लोककथाएं’ पर गहन चर्चा, जहां ‘बेटी, कासपर हाउजर, हाइडी’ जैसी कहानियों पर बात हुई। अभय, अदम्य, प्रांजल और सृष्टि ने ‘टिल’ की कथा का मंचन किया।
- डॉ. अश्विनी कुमार मल्होत्रा ने अपनी किताब ‘एक डॉक्टर की कलम से’ पर जयश्री के साथ चर्चा की।
- वास्तुविद विपुल वार्ष्णेय की ‘अवध के मंदिर’ का लोकार्पण पद्मश्री डॉ. विद्या विंदु सिंह की अध्यक्षता में हुआ।
- शाम को साहित्य साधक संस्था की काव्य गोष्ठी ने माहौल को और रोमांचक बना दिया।
मेला फिलहाल 22 मार्च तक चलेगा – किताबों, विचारों और युवा जोश का शानदार मेला! अगर आप लखनऊ में हैं, तो जरूर पहुंचें। (शागुन न्यूज़ इंडिया – साहित्य और संस्कृति की लेटेस्ट खबरें @Shagunnewsindia)







