Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Saturday, June 13
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»धर्म»Spirituality»Short Inspirational

    चालाक मछलियां और बगुला भगत

    By January 12, 2019 Short Inspirational No Comments6 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 1,512

    एक बार की बात है बकुल बगुला हर दिन की तरह घात लगाए मछलियों के इंतजार में बैठा था। मगर मछलियां भी कम हाईटेक नहीं थी दूरबीन की मदद से ही वे पता कर लेती थी कि शिकारी कहां बैठा है तभी एक अन्य बगुला ने तरकीब निकाली जिसे मछलियां परेशान हो गई।

    बकुल बगुला रोज की तरह फिर दूसरे दिन पोखर में आकर घात लगा कर बैठ गया पर मछलियां थी उसकी पहुंच से दूर एक भी मछली उसके चंगुल में नहीं आ रही थी बकुल की भूख के मारे आंते सूख रहे थी कि कब कोई मछली उसकी पकड़ में आया और उसे झट से खा जाए अचानक मछलियों का एक झुंड उधर आता दिखा बगुला ने भी सांस रोक कर नजर उधर टिका दें लेकिन उसे फिर निराशा ही लगी।

    कुछ समय बाद चमकू मछली बोली बहन मुझे यहां किसी बगुले की गंध कि साजिश नज़र आ रही है उछलो मछली ने तभी अपने मुंह से पानी की धार खींची और बोली- ‘अच्छा’!
    तब फिसलो मछली ने आसपास देख कर कहा – ‘हां महसूस हो रहा है बहन’ पर दिख कुछ नहीं रहा है!

    भर से जमे इस पानी में तुम्हें क्या ताजमहल दिखेगा! चमको मछली ने कहा- ‘देख नहीं रहे हो पानी में कितनी काई है हम क्या वापस चलें! फिसलो ने उदास होते हुए कहा ‘नहीं अभी मैं अपनी छुटकी को बुलाती हूं। दूरबीन उसी के पास है। वह तालाब के दूसरे कोने में मछलियों को तंग करने वाले बगुले को सबक सिखाने गई है।

    यह दूरबीन क्या होती है। बहन तभी हैरान होते हुए उछलो पूछ बैठी। वैसे यह बात फिसलो भी पूछना चाहती थी। इससे किसी भी मछली और जानवर को दूर से ही देखा जा सकता है। तभी चुटकी आती दिख गई। देखो मेरी बेटी आ गई। चमको ने आंखें मटकाते हुए कहा- ‘मां मैंने बगुले को सबक सिखा दिया।

    बेचारा अब हम लोगों की तलाश में बैठे-बैठे थक कर पानी में ही लुढ़क गया। कहकर चुटकी हंसने लगी। चमको ने फौरन उससे दूरबीन ले ली, फिर चारों ओर देखा 5 मीटर की दूरी पर उसे मरियल सा बकुल बगुला दिख गया। उसने बारी-बारी से फिसलो और उछलो को भी दिखाया।

    फिर कहा अब देखा क्या होती है दूरबीन! हां बहन देख लिया। यह तो बहुत काम की चीज है। दोनों एक साथ बोल उठे मछलियों ने अपना रास्ता पकड़ा और बल खाती खिलाती निकल गयी। बकुल बगुला घात लगाए बैठा ही रहा। उसने दिनभर तालाब के कई स्थान बदले पर मछलियां उससे बचकर निकलती रही। उसके होश उड़ गए वह परेशान रहने लगा।

    एक दिन सफेद बगुला वहां आ पहुंचा वह नौजवान और हाईटेक था बकुल ने उसे देखा। उदास होकर उसने कहा तू भी यहां मरने आ गया है! क्यों क्या हुआ? उसने पूछा यहां भूखे प्यासे मर जाओगे कोई भी मछली हाथ नहीं आएगी मैं कब से यहां हूं मगर अब तक कोई मछली हाथ नहीं लगी। इस पोखर सारी मछलियां पता नहीं कहाँ गुम हो जाती हैं। पता नहीं कैसे मेरे होने की उन्हें पहले से ही सूचना मिल जाती हैं और वह भाग जाती हैं। मैं तो बेमौत मर रहा हूं तुम भी मर जाओगे।

    इन सब बातों का सफेद बगुले पर तो जैसे कोई असर ही नहीं हुआ। वह बोला – कोई बात नहीं यहां की मछलियां हाईटेक तो मैं भी सुपर हाईटेक हूं। अगर उनके पास दूरबीन है तो मेरे पास भी डिटेकटर है। सफेद बगुले की बात सुनकर बकुल बगुले को कुछ राहत मिली।

    तभी सफेद बगुला पानी में उतर गया। फिर अपने यंत्र को पानी में डुबो दिया। उसके बाद उसने बताया सारी मछलियां दाई ओर हैं। कहता हुआ वह उसी दिशा में बढ़ने लगा। पर मछलियां फिर से अलग खिसक गई। सफेद बगुला वहीँ रुक गया। मछलियों ने उसे रुके देखा तो आराम करने लगी।

    मछलियों को यही बात भारी पड़ गयी। सफेद बगुले ने दबे कदमों से जाकर एक एक को दबोचना शुरू कर दिया। अब तो उसका रोज का ही यह काम हो गया। सफेद बगुला मछलियों को ढूंढता और दोनों उन्हें मजे से खाते। धीरे -धीरे मछलियों की संख्या कम होने लगी।

    चमकू उछलो और फिसलो को चिंता होने लगी, कि आखिर उसकी सहेलियां कहां गायब हो रही है। एक दिन उन्होंने सफेद बगुले को शिकार करते हुए देख लिया। उसने चमको को बताया- बगुले के पास हमारी सारी जानकारी को पता लगाने वाला यंत्र है। अब तो वह हमें रात दिन कभी भी हमें अपना भोजन बना सकता है। अब क्या होगा बहन! उछलो उदास होते हुए बोली। उसने छुटकी से सारी बात बता दी तो इसमें कौन सी बड़ी बात है मैं उसे ऐसा सबक सिखा दूंगी कि उसके होश ठिकाने आ जाएंगे। छुटकी ने कहा अगर वह सुपर हाईटेक है तो मैं भी अल्ट्रा हाईटेक हूं। मैं जैसा कहूं सभी वैसा ही करते जाना छुटकी ने एक योजना तैयार कर ली।

    इधर सुबह होते ही बकुल ने अपने दोस्त सफ़ेद बगुले से कहा -‘ मछली खाने के लिए मेरी जीभ कब से लपलपा आ रही हैं।’

    मैं भी तैयार बैठा हूं।’ सफेद बगुले ने कहा! और कहकर दोनों उड़कर पोखर पर जा उतरे। सफेद बगुले ने फिश डिडेक्टर को पानी में डाला और बोला -वाह! इतनी सारी मछलियां! कहां दोस्त! बकुल बगुले की लार टपकने लगी । चुप रहो जब मैं कहूं कभी चोंच मारना। दोनों धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे। तभी सफेद ने कहां- ‘अटैक’ और दोनों ने पूरी ताकत से चोंच मार दी।

    उनके मुंह में मछली तो आयी लेकिन पत्थर जैसी कठोर, मानो चोंच ही टूट गई हो उनकी। उनका सिर चकराने लगा इससे पहले वह कुछ समझ पाते। छुटकी मछली ने बकुल बगुले और सफेद बगुले पर अपनी पूंछ से जोरदार वार किया। चोंच में पकड़ी मछलिया एक झटके से उनके पेट में चली गयी। इससे पहले कि वह कुछ समझ पाते। पोखर की सारी मछलियां खिलाकर हंस पड़ी। बोली -और खाओ नरम मुलायम चारा! प्लास्टिक की डुप्लीकेट मछलियां हमेशा तुम्हारे पेट में ज़िंदा रहेंगी। तुम्हारे पेट की गर्मी उन्हें कभी नहीं पचा पाएगी। ‘क्या’ यह सुनकर बकुल बगुला और सफेद बगुला सन्न रह गये। यह कहकर सारी मछलियां सरसराती हुयी पोखर के पानी में लहराते हुए निकल गयीं। और इधर दोनों बगुले दिमाग पर सदमा लगते ही पानी में छप से गिर पड़ें।

    Keep Reading

    Kids to become RJs and take the mic! Big FM's magical radio station launches at KidZania.

    बच्चे बनेंगे आरजे, संभालेंगे माइक! किड्ज़ेनिया में शुरू हुआ बिग एफएम का जादुई रेडियो स्टेशन

    The wise bird's efforts were of no avail against the foolish monkeys.

    बुद्धिमान पक्षी की मूर्ख बंदरों के आगे एक न चली

    An Exemplar of Tolerance: The Unique Encounter Between Saint Dadu and the Daroga

    सहनशीलता की मिसाल: संत और दरोगा की अनोखी मुलाकात

    A Flight of Courage

    हौसले की उड़ान

    Why did the Tuesday of the month of Jeth become a big Tuesday in Awadh?

    जेठ माह का मंगल अवध में क्यों बना बड़ा मंगल!

    Uncontrolled flow of speech destroys relationships - Ashutosh Rana

    वाणी का अनियंत्रित प्रवाह संबंधों को मिटा देता है – आशुतोष राना

    Add A Comment
    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Many writers are caught in a labyrinth of duties!

    कर्त्तव्यों के चक्रव्यूह में घिरे हैं कई कलमकार!

    June 12, 2026
    Havoc caused by crowds in the hills: Ambulances stuck in Mussoorie—yet why aren't people stopping?

    पहाड़ों पर भीड़ का कहर: मसूरी में एंबुलेंस भी फंसी, फिर भी लोग रुक क्यों नहीं रहे?

    June 12, 2026
    Pride in Manufacturing: Godrej launches a new model for LGBTQIA+ inclusion in the manufacturing sector.

    प्राइड इन मैन्युफैक्चरिंग: गोदरेज ने विनिर्माण क्षेत्र में एलजीबीटीक्यूआईए+ समावेश का नया मॉडल शुरू किया

    June 12, 2026
    'Navya Chakra' Set to Redefine Psychological Thrills

    नव्या चक्र: मनोविज्ञान की सीमाएं तोड़ने वाला साइकोलॉजिकल थ्रिलर तैयार! ट्रेलर ने मचाया सनसनी, 26 जून को सिनेमाघरों में धमाका

    June 12, 2026
    India 2030: A Power Revolution for Both Villages and Cities

    भारत 2030: बिजली की क्रांति, गांव-शहर दोनों के लिए

    June 12, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading