लखनऊ, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के बहुजन छात्रों द्वारा सम्राट अशोक की जयंती और वीरांगना झलकारी बाई की पुण्यतिथि के अवसर पर विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय परिसर में संपन्न हुआ जिसमें समस्त बहुजन छात्र मौजूद रहे।
इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय इतिहास के दो महान व्यक्तित्वों की क्रांतिकारी विरासत और योगदान को स्मरण करना था। सम्राट अशोक, जो प्राचीन भारत के महान शासकों में से एक माने जाते हैं, ने बौद्ध धर्म को अपनाकर शांति, सामाजिक न्याय और अहिंसा के मूल्यों को जीवन में उतारा। वहीं, झलकारी बाई 1857 की क्रांति की एक वीरांगना थीं, जिन्होंने ब्रिटिश उपनिवेशवाद के विरुद्ध साहसपूर्वक संघर्ष किया।
कार्यक्रम में मौजूद छात्र नेता गौरव वर्मा ने कहा कि ये दोनों महापुरुष सामाजिक न्याय, प्रतिरोध और समतामूलक समाज की परिकल्पना के प्रतीक हैं।
छात्र चित्रांशु भास्कर ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को याद करना बहुत जरूरी है, जिनके योगदान को मुख्यधारा के इतिहास लेखन में उपेक्षित किया गया है।
इस अवसर पर कविता पाठ और सम्राट अशोक तथा झलकारी बाई के जीवन पर आधारित एक लघु प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिससे कार्यक्रम का वातावरण प्रेरणादायक और विचारोत्तेजक बन गया।
बहुजन छात्रों की यह पहल इतिहास को वंचितों के दृष्टिकोण से पुनः लिखने और सामाजिक परिवर्तन की निरंतर लड़ाई को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विश्वविद्यालय के समस्त बहुजन छात्र वंश, ललित, विकाश, कीर्ति आजाद, अवनीश आदि छात्र मौजूद रहे।






