केन्द्र सरकार बैंकों को पूंजीपतियों के हाथों सौंपना चाहती है : पवन कुमार
लखनऊ, 04 दिसम्बर 2021: केन्द्र सरकार द्वारा बैंकों का निजीकरण करने के प्रयासों के विरूद्ध शनिवार को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंककर्मियों ने सेन्ट्रल बैंक, हजरतगंज शाखा के समक्ष सभा एवं प्रदर्शन किया। फोरम ने 16 व 17 दिसम्बर को देशव्यापी बैंक हड़ताल का आवाह्न किया है।
शनिवार को प्रदर्शन में आल इण्डिया बैंक आफीसर्स कन्फेडरेशन (ऑयबाक) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पवन कुमार ने बताया कि केन्द्र सरकार बैंको को पूंजीपतियों के हाथों में सौंपने का प्रयास कर रही है, लेकिन बैंककर्मियों के विरोध के चलते वह सफल नहीं हो पाई है। उन्होंने बताया कि अटल पेन्शन योजना, नोटबन्दी, मनरेगा, आधार कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड, बीमा आदि योजनाएं केवल राष्ट्रीकृत बैंको के बैंककर्मियों की दक्षता की वजह से सफल हो पाई है।

एन.सी.बी.ई. के महामंत्री अखिलेश मोहन ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि ऋण, छोटे और मध्यम श्रेणी के उद्योगों को दिये जाने वाले ऋणों सहसा व्यापक रूकावट आयेंगी। इसके साथ ही बैंककर्मियों की संख्या घटेगी जिससे बेरोजगारी बढ़ेगी। और देश की आर्थिक सुदृढ़ता पर व्यापक प्रभाव पडेगा।’
सौरभ श्रीवास्तव, प्रदेश महामंत्री, ऑयबाक ने प्रदर्शन में केन्द्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुये कहा कि सरकार देश की अर्थव्यवस्था को गति देने के नाम पर एकबार फिर अपने कुत्सित प्रयासों में जुट गई है, परन्तु बैंककर्मी पूरी तरह से सजग है, इसके लिये हम हर संघर्ष के लिये तैयार हैं।
वाई.के.अरोडा, फोरम प्रदेश संयोजक ने अध्यक्षता करते हुये बताया कि बैंक अधिकारी एवं कर्मचारी अपने संगठन यू.एफ.बी.यू. के बैनर तले बैंको के निजीकरण के विरोध में एकजुट हो चुके हैं, हम सरकार की मनमानी चलने नहीं देंगे।
फोरम के मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी ने बताया कि देशव्यापी बैंक हड़ताल के पूर्व 7 दिसम्बर को पंजाब नेशनल बैंक, हलवासिया मार्केट शाखा, हजरतगंज एवं 8 दिसम्बर को टी.एन.बाजपेई प्रतिमा, सरोजिनी नायडू पार्क, हजरतगंज के समक्ष प्रदर्शन तथा बैंक हड़ताल के पहले दिन 16 दिस. को भारतीय स्टेट बैंक, मुख्य शाखा एवं दूसरे दिन 17 दिस. को इंडियन बैंक (पूर्व इलाहाबाद बैंक), हजरतगंज शाखा के समक्ष सभा एवं प्रदर्शन आयोजित किया गया है।







