दलित विरोधी कुलपति से मेडल को लेकर क्या करूंगा जब मेरे दलित भाइयों-बहनों को विश्वविद्यालय में हीनभावना से देखा जाता है और उनको विभिन्न ढंग से प्रताड़ित किया जाता है: सुधाकर
लखनऊ 13 दिसम्बर। BBAU लखनऊ कॉलेज में लगातार हो रहे दलित उत्पीड़न से क्षुब्द्ध एक और होनहार दलित छात्र सुधाकर पुष्कर ने गोल्ड मैडल लेने से मना कर दिया है यह पुरूस्कार उन्हें 15 दिसंबर 2017 को होने वाले दीक्षांत समारोह में भारत के राष्ट्रपति महोदय से मिलने वाला है ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या कॉलेज में दलित छात्रों के प्रति उत्पीड़न इतना बढ़ गया है कि वह आक्रोशित होकर मैडल लेने से इंकार कर दें है ऐसे में छात्रों की मांग है कि इस दलित उत्पीड़न और कॉलेज हो रहे भ्रस्टाचार प्रकरण की जांच तब और आवश्यक हो जाती है जब लगातार छात्र पुरूस्कार लेने से मना कर रहे हो?
बता दें इससे पहले भी एक छात्र रामेंद्र नरेश ने भी लखनऊ BBAU में लगातार हो रहे दलित उत्पीड़न से क्षुब्द्ध होकर मैडल लेने से मना कर चुके है ठीक इसी तरह श्री सुधाकर पुष्कर ने भी यही राह अपनाई हैं।

श्री सुधाकर का कहना है कि आये दिन कुलपति दलित छात्रो पर फर्जी FIR करवा देते है। जिससे दलित छात्रो में कुलपति के खिलाफ रोष है। श्री सुधाकर पुष्कर ग्रामीण प्रबन्धन विषय में एम फिल कक्षा में अव्वल आने के बाद गोल्ड मेडल के लिए चुने गए हैं।
सुधाकर पुष्कर ने बताया कि विश्वविद्यालय में लगातार हो रहे दलित उत्पीड़न के कारण उनका मन बहुत व्यथित है और इस उत्पीड़न के न रुकने के कारण दलित छात्र और दलित प्रोफ़ेसर दोनों परेशान हैं। सुधाकर पुष्कर ने आगे कहा कि मैं ऐसे दलित विरोधी कुलपति से मेडल को लेकर क्या करूंगा जब मेरे दलित भाइयों /बहनों को विश्वविद्यालय में हीनभावना से देखा जाता है और उनको विभिन्न ढंग से प्रताड़ित किया जाता है। जैसे दलित छात्रो को कम अंक देकर, उनका मनोबल गिरा दिया जाता है। ऐसे में मेरा गोल्ड मेडल ना लेना अपने आप में मेरे दलित भाइयों के त्याग के लिए की जाने वाली कुर्बानी है। मैं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो आर सी सोबती के द्वारा मेडल तभी स्वीकार करुंगा जब विश्वविद्यालय के साथ-साथ संपूर्ण भारत में दलितों को सम्मान और बराबरी की दृष्टि से देखा जाएगा।
ग्रामीण प्रबंधन विषय से एमफिल में किया टॉप
सुधाकर ग्रामीण प्रबंधन विषय में एमफिल में अव्वल आये हैं। जिसके चलते उन्हें गोल्ड मेडल के लिए चुना गया है। सुधाकर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर डिस्ट्रिक के रहने वाले हैं। सुधाकर एक किसान परिवार से आते हैं और इनके पिता एक किसान हैं।

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