लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) परिसर स्थित करुणा ताल अब अपनी सुंदरता की जगह बदबू और गंदगी के लिए जाना जाने लगा है। कभी शांति और सुकून देने वाला यह तालाब अब सीवर के गंदे पानी से लबालब भर गया है, जिससे पूरे हॉस्टल परिसर में दुर्गन्ध फैली हुई है।
छात्रों और कर्मचारियों का कहना है कि कई महीनों से ताल में साफ पानी की आपूर्ति पूरी तरह से बंद है। बोरवेल से पानी नहीं आ रहा, और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी ने इसकी सुध ली है। बारिश और सीवर की निकासी का कोई इंतजाम न होने के कारण सारा गंदा पानी ताल में जमा हो रहा है। अब यह ताल कीचड़ और बदबू का अड्डा बन चुका है।
हॉस्टल में रहने वाले छात्रों ने बताया कि तालाब से उठती बदबू के कारण दिन-रात रहना मुश्किल हो गया है। मच्छरों की भरमार से डेंगू और मलेरिया का खतरा भी बढ़ गया है। हम कई बार प्रशासन से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, एक छात्र ने नाराजगी जताते हुए कहा। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है।
सूत्रों के अनुसार, करुणा ताल की सफाई और जल निकासी व्यवस्था के लिए बजट तो तय किया गया था, लेकिन वह जमीन पर उतरता नजर नहीं आ रहा। छात्रों और कर्मचारियों ने मांग की है कि ताल की तत्काल सफाई कराई जाए, सीवर लाइन को सही किया जाए और बोऱवेल से फिर से साफ पानी की आपूर्ति शुरू हो, ताकि करुणा ताल अपने पुराने रूप में लौट सके।







