नीतू सिंह
बिहार की धरती, जो अपनी सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक गौरव के लिए जानी जाती है, एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह है गया की 28 वर्षीय बेटी अनन्या कुमारी, जिन्होंने अपने स्टार्टअप ‘मगही माटी’ के जरिए न केवल बिहार की पारंपरिक कला को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई, बल्कि सैकड़ों ग्रामीण कारीगरों, खासकर महिलाओं, को रोजगार और सम्मान भी दिया। अनन्या का यह स्टार्टअप, जो मधुबनी और टिकुली कला को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़ता है, हाल ही में न्यूयॉर्क में आयोजित ग्लोबल आर्टिसन फेयर में छाया रहा। वहाँ ‘मगही माटी’ को ‘सर्वश्रेष्ठ सस्टेनेबल क्राफ्ट इनोवेशन’ पुरस्कार से नवाजा गया, जिसने बिहार का नाम रोशन किया।
अनन्या की कहानी प्रेरणा की मिसाल है। गया के एक छोटे से गाँव, बोधगया के पास, में जन्मी अनन्या ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की, लेकिन उनका दिल हमेशा अपनी जड़ों से जुड़ा रहा। 2020 में, जब कोविड महामारी ने ग्रामीण कारीगरों की आजीविका को संकट में डाल दिया, अनन्या ने फैसला किया कि वह अपनी मिट्टी की कला को नई ऊँचाइयों तक ले जाएँगी। ‘मगही माटी’ की शुरुआत केवल 10 कारीगरों के साथ हुई थी, लेकिन आज यह 300 से अधिक कारीगरों को जोड़ चुका है, जिनमें 80% महिलाएँ हैं। स्टार्टअप मधुबनी पेंटिंग्स, टिकुली कला, और बिहार की पारंपरिक हस्तकला को आधुनिक उत्पादों जैसे होम डेकोर, फैशन एक्सेसरीज़, और कॉर्पोरेट गिफ्ट्स में बदल रहा है।
न्यूयॉर्क में आयोजित फेयर में अनन्या की टीम ने मधुबनी कला से सजे सस्टेनेबल सिल्क स्कार्फ्स और टिकुली कला से बने इको-फ्रेंडली दीये प्रदर्शित किए। इन उत्पादों की खासियत यह थी कि इन्हें पूरी तरह जैविक और पुनर्चक्रण योग्य सामग्री से बनाया गया था। अनन्या ने बताया, “हमारा मकसद केवल कला को बेचना नहीं, बल्कि बिहार की कहानियों को दुनिया तक पहुँचाना है। हर मधुबनी पेंटिंग में हमारी संस्कृति की गहराई है, और हर टिकुली डिजाइन में हमारी मेहनतकश महिलाओं की ताकत।”
इस उपलब्धि ने न केवल बिहार के ग्रामीण कारीगरों को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई, बल्कि बिहार सरकार का भी ध्यान खींचा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अनन्या को बुलाकर सम्मानित किया और घोषणा की कि ‘मगही माटी’ को बिहार स्टार्टअप नीति के तहत विशेष सहायता दी जाएगी। सरकार ने इसे ‘मेड इन बिहार’ अभियान का हिस्सा बनाने का फैसला किया है, जिसके तहत स्थानीय कारीगरों को डिजिटल मार्केटिंग और निर्यात के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। ‘मगही माटी’ की सफलता का एक बड़ा कारण अनन्या की रणनीति है।
उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर अपने उत्पादों को अमेज़न, फ्लिपकार्ट और इटसी जैसे ई-कॉमर्स साइट्स पर उपलब्ध कराया। साथ ही, उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए मधुबनी और टिकुली कला की कहानियों को वायरल बनाया। उनकी एक इंस्टाग्राम रील, जिसमें एक बुजुर्ग कारीगर मधुबनी कला बनाते हुए अपनी कहानी बता रही थी, को 2 मिलियन से अधिक बार देखा गया। अनन्या कहती हैं, “आज की दुनिया में टेक्नोलॉजी और परंपरा का मेल जरूरी है। हमारी कला को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए डिजिटल दुनिया हमारा सबसे बड़ा हथियार है।”
इस स्टार्टअप ने न केवल आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा दिया, बल्कि सामाजिक बदलाव भी लाया। अनन्या ने अपने गाँव में एक प्रशिक्षण केंद्र खोला, जहाँ 150 से अधिक महिलाओं को मधुबनी और टिकुली कला का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें से कई महिलाएँ पहले घरेलू काम तक सीमित थीं। आज वे अपनी कला से मासिक 15,000 से 25,000 रुपये कमा रही हैं। एक कारीगर, राधा देवी, ने कहा, “अनन्या दीदी ने हमें नई जिंदगी दी। पहले हमारी कला को कोई पूछता नहीं था, आज न्यूयॉर्क में लोग हमारी बनाई चीजें खरीद रहे हैं।”
अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस सफलता ने बिहार के युवाओं को भी प्रेरित किया है। गया के एक कॉलेज में आयोजित सेमिनार में अनन्या ने छात्रों से कहा, “बिहार की मिट्टी में अपार संभावनाएँ हैं। हमें अपनी जड़ों पर गर्व करना होगा और उसे दुनिया तक ले जाना होगा।” उनकी इस बात ने नौजवानों में जोश भरा, और कई ने स्टार्टअप शुरू करने की योजना बनानी शुरू कर दी।
‘मगही माटी’ की कहानी बिहार के लिए एक नया अध्याय है। यह न केवल आर्थिक विकास की कहानी है, बल्कि सांस्कृतिक गौरव और नारी सशक्तीकरण की मिसाल भी है। अनन्या का कहना है, “यह शुरुआत है। हमारा अगला लक्ष्य लंदन और पेरिस के मार्केट में बिहार की कला को ले जाना है।”
बिहार सरकार ने भी इस दिशा में समर्थन का वादा किया है, और उम्मीद है कि ‘मगही माटी’ जैसे प्रयास बिहार को वैश्विक हस्तकला के नक्शे पर और मजबूती से स्थापित करेंगे।






