कानपुर नगर से करीब 27 किलोमीटर पश्चिम गंगा के किनारे बसे बिठूर नगर की पहचान सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा से है बताया जाता है कि यहां पर ही रहकर ब्रह्मा नेता तपस्या की थी और सृष्टि की रचना की थी इसके साथ ही इस नगर से भगवान पुरुषोत्तम राम का भी नाता है।
- धार्मिक स्थल: यहां वाल्मीकि आश्रम, जहां सीता ने लव-कुश को जन्म दिया था, और ब्रह्मेश्वर मंदिर जैसे पवित्र स्थान हैं।
- गंगा का सौंदर्य: गंगा के किनारे बसा होने के कारण यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण आकर्षक है।

यहीं पर वाल्मीकि आश्रम में मां सीता ने लव और कुश को जन्म दिया था इसके बाद यह नगर वीर नगरी के रूप में अपनी पहचान बने इसके बावजूद यह नगर पर्यटन के लिहाज से अपनी माहिती पहचान नहीं बन सका हालांकि प्रदेश में योगी सरकार आने के बाद से यहां पर बिठूर महोत्सव मनाया जाने लगा है।
वाल्मीकि आश्रम
वाल्मीकि आश्रम के विषय में कहा जाता है कि यहां पर महर्षि वाल्मीकि ने तपस्या करने के बाद पौराणिक ग्रंथ रामायण की रचना की थी माता सीता ने श्री राम के द्वारा गृह त्याग के आदेश पर यहां रहकर समय व्यतीत किया था।

नाना राव पार्क
ऐतिहासिक घटनाएं: 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में बिठूर नाना साहब और रानी लक्ष्मीबाई के नेतृत्व में एक प्रमुख केंद्र था। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी नाना साहब पेशवा के सम्मान में यहां पर स्वतंत्रता के बाद नाना राव पार्क बनवाया गया आजादी के पहले स्थान को मेमोरियल बाल कहा जाता था यह बाग बिठूर घाट से चंद मिनट की दूरी पर है इस उद्यान में रानी लक्ष्मीबाई तात्या टोपे और नाना साहब पेशवा की प्रतिमाएं विराजमान है।
ध्रुव टीला
हिंदू धर्म के पुरान अनुश्री के अनुसार बाल संत ध्रुव ने भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न करने के लिए यही एक पैर पर खड़े रहकर तपस्या की थी भगवान ब्रह्मा ने तपस्या से प्रसन्न होकर ध्रुव को वरदान दिया था कि ध्रुव अनंत काल तक तारे के रूप में प्रकाश वन रहेंगे ध्रुव टीला मंदिर का शिकार 2 किलोमीटर दूर से भी दर्शनीय है।
मोती झील
मोतीझील कानपुर के बिना झाबर क्षेत्र में एक झील और पीने के पानी का भंडार है यहां पर आसपास के बगीचे और बच्चों के पार्क यहां आने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण पर्यटक आकर्षण है इस ब्रिटिश राज के दौरान कमला रिट्रीट और मोती पर के साथ बनाया गया यहां का एम्यूजमेंट पार्क भी महत्वपूर्ण मनोरंजन स्थान है।
ब्रह्मावर्त घाट

ब्रह्मावर्त घाट नदी के घाटों में बिठूर का पवित्रम घाट माना जाता है मान्यता के अनुसार इसी स्थान पर ब्रह्मा जी ने मानव जाति का निर्माण किया था और तब से यह जगह ब्रह्मा का स्थानीय ब्रह्मा व्रत कहलन लगा इस घाट को पृथ्वी का केंद्र भी माना जाता है।
सती चौराहा घाट
सती चौरा घाट को मांस कर घाट भी कहा जाता है प्रकृति की गोद में यदि कुछ समय बिताना चाहते हैं तो बहती गंगा के किनारे बने इस घाट से बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती किसी घाट पर अंग्रेजों ने 72 लोगों को इसलिए फांसी चढ़ा दिया था कि उन्होंने अंग्रेज सिपाहियों की टुकड़ी को गंगा में डुबोकर मार डाला था गंगा बैराज को लव कुश बैराज ही कहा जाता है कानपुर के नवाबगंज में गंगा पर बना यह पल जातियों को बहुत आकर्षित करता है नदी से आते हैं ठंडा हवा के झोंकों के साथ यहां सूरज को डूबते हुए देखना एक अलग ही अनुभव प्रदान करता है। –बता दे कि लेखिका राशि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज के झांसी केंद्र की क्षेत्रीय निदेशक है।







