
हिन्दी फिल्मों के स्वर्णिम काल में मोहब्बत में डूबे नायक-नायिका की आँखे बोलती थी। आंखों ही आँखों में प्यार का इजहार हो जाया करता था। उनकी प्यार की गहराई दर्शक उनकी आँखों में ही पढ़ लेते थे। ‘आवारा’ में नरगिस और राजकपूर के बीच रोमांटिक दृश्यों को कोई कैसे भूल सकता है? ‘मुगल-ए-आज़म’ का वो रोमांटिक सीन जिसमें दिलीप कुमार पंख से मधुबाला के चेहरे को सहलाते हैं। दोनों के चेहरे के बदलते भावों से ही दर्शकों को उनके मनोभावों का अहसास हो जाता था।
इसके बाद समय बदला और सिनेमाई प्यार का अंदाज भी! रोमांटिक भावनाओं को उभारने के लिए प्रेम में पगे गीत के साथ प्रकृति की खुबसूरती का भी सहारा लिया गया। बर्फीली वादियों के दृश्य भी नायक-नायिका के बीच के प्यार के संकेत बन गए। अब नायक नायिका की खूबसूरती की तारीफ करते हुए प्यार व्यक्त करने लगा। ‘शोले’ जैसी एक्शन फिल्म में भी रोमांस का रंग चढ़ा। धर्मेंद्र के पानी की टंकी पर चढ़ने का वो दृश्य आज भी याद किया जाता है। इसी तरह अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी के बीच प्यार के खामोश इजहार ने भी दर्शकों के दिल को छू लिया था।
आज के वक़्त में फिल्मों में प्यार को व्यक्त करने के दृश्य बेहद रोचक अंदाज में दिखाए जाने लगे। ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ में नायक शाहरुख़ खान का खुद से ये कहना ‘राज, अगर ये तुझे प्यार करती है तो पलट के देखेगी … पलट … पलट!’ ऐसे ही एक फिल्म ‘सोचा न था’ में नायक आधी रात को नायिका की बालकनी फांदकर घर में घुसकर पूछता है ‘आखिर क्या है मेरे और तुम्हारे बीच?’ ये ऐसे दृश्य हैं जो रोचक होने के साथ नए दौर के प्रेमियों की भावनाएं भी दर्शाते हैं।
हिंदी सिनेमा में प्यार के इजहार के कुछ दृश्यों सबसे रोचक था ‘दिल चाहता है’ का वह दृश्य जिसमें नायक दूसरे की शादी में कई लोगों की मौजूदगी में अपने प्यार का इजहार करता है। इसमें यह दर्शाने की कोशिश की गई थी कि भागती जिंदगी में प्यार जैसे मुलायम अहसास को समझने के लिए समय नहीं मिल पाता। इसलिए कभी-कभी जीवन की आपाधापी में नायक, नायिका प्यार के अहसास को महसूस किए बिना प्यार का इजहार कर देते हैं।







