65 करोड़ लोग हिंदी बोलते-लिखते हैं!

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विश्व हिंदी दिवस पर विशेष 
भारतेन्दु हरिश्चचन्द्र ने कहा था- निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल। अभिव्यक्ति के लिए अपनी भाषा नहीं है तो वह समाज कैसे तरक्की कर सकता है। हिन्दी को विश्व फलक में लोकप्रिय बनाने के लिए 10 जनवरी को 1975 में पहला विश्व हिन्दी सम्मेलन का आयोजन नागपुर में किया गया। तब से इस दिन को विश्व हिन्दी सम्मेलन के रूप में मनाया जा रहा। सूरीनाम, फिजी, मॉरिशस आदि देशों में हिन्दी खुलकर बोली जाती है।
इस वर्ष के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका, संयुक्त साम्राज्य (यूके), कनाडा, स्वीडन, नार्वे, मॉरिशस, सूरीनाम आदि देशों में विश्व हिन्दी दिवस पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जाने लगे। 2006 में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह इस आयोजन में शामिल हुए और इस दिन को विश्व हिन्दी दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया गया। तब से हर साल देश-दुनिया में इस दिन को विश्व हिन्दी दिवस के तौर पर मनाया जाता है। देश में तो इस दिन को मनाते ही हैं, अलग-अलग देशों में कार्यरत भारतीय दूतावास और उच्चायोगों को निर्देश हैं कि हर साल इस दिन हिंदी पर कोई न कोई आयोजन अवश्य किए जाएं।
आज की तारीख में हिन्दी दुनिया की चौथे नंबर की भाषा मानी जाती है, करीब 65 करोड़ लोग इसे बोलते-लिखते हैं। हिन्दी के पहले क्रमश: अंग्रेजी, मंदारिन और स्पेनिश भाषा का नंबर आता है। हिन्दी और उसकी लिपि देवनागिरी को सबसे अधिक वैज्ञानिक भाषा माना जाता है, कहा जाता है कि हिन्दी में जो कुछ बोला जाता है, वही लिखा भी जाता है। इसमें स्वर और व्यंजन दो तरह के अक्षर होते हैं, इस तरह पूरी भाषा स्पष्ट और सरल है।
आपके मन में यह भी सवाल आ रहा होगा कि 14 सिंतबर को मनाया जाने वाला हिन्दी दिवस क्या है? इस अवसर पर सभी केन्द्रीय विभागों के कार्यालयों, केन्द्रीय संस्थानों और राज्य सरकारों के कार्यालयों में राजभाषा हिन्दी दिवस और हिन्दी पखवाड़ा मनाए जाते हैं।
किसी विभाग में पूरा महीना ही इसके लिए समर्पित कर दिया जाता है। राजभाषा अधिकारी अपने इस सालाना आयोजन के लिए बेहद सक्रिय हो जाते हैं। 14 सितंबर 1949 को हिन्दी को संविधान के तहत राजभाषा घोषित किया गया था। वर्ष 1953 को राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर 14 सितंबर को राजभाषा हिंदी दिवस मनाने का अनुरोध किया गया, इसे मान लिया गया। इस कारण यह दिन देश में राजभाषा के प्रचार-प्रसार के लिए मनाया जाता है। दोनों दिवस मनाने में हर्ज नहीं, मगर सभी को हिन्दी का अधिक प्रचार-प्रसार करना चाहिए।
बच्चे चाहे अंग्रेजी माध्यम के कांवेन्टों में पढ़ाएं मगर उनका हिन्दी ज्ञान कमजोर नहीं होना चाहिए। अभी जो हिंदी बोली जा रही है, इसकी शुरूआत उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध से मानी जाती है, इसे संस्‍कृ‍त का अपभ्रंश कहा जाता है। जानकारों का मानना है कि राजभाषा हिंदी में पहली रचना सन‌् 1000 ई. में ‘खुमान रासो’ है, इसके बाद ‘बीसलदेव रासो’ और ‘पृथ्‍वीराज रासो’ की रचना हुई। इसके बाद भी हिंदी आम भाषा नहीं थी। इसे असली पहचान सन् 1450 के बाद तब मिली, जब गुरु नानक देव, रैदास, सूरदास, तुलसीदास और कबीर ने हिंदी में रचनाएं लिखनी शुरू कीं। नानक बानी, कबीर बानी, सूरसागर और रामचरित मानस प्रसिद्ध और लोकप्रिय रचनाएं साबित हुईं।
आधुनिक काल का पहला गद्य भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा लिखा गया था, हालांकि इनकी भाषा खड़ी बोली है फिर भी अधिसंख्य लोग उन्हीं को आधुनिक हिंदी का जनक मानते हैं। भारतेन्दु ने ‘बाल विबोधिनी पत्रिका’, ‘हरिश्चंद्र पत्रिका’ और ‘कविवचन सुधा’ पत्रिकाओं का संपादन किया। हिन्दी को साहित्य और कामकाज की भाषा के साथ ही अब तकनीकी भाषा बनाने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। इसके लिए कंप्यूटर कोडिंग के भारतीय विशेषज्ञों को आगे आना चाहिए।
– जगदीश जोशी 

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