बेरोजगारी पर बढ़ता जनआक्रोश

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जी के चक्रवर्ती

बीते 17 सितंबर यानि गुरूवार को देश भर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का 70वां जन्मदिन मनाया गया। वहीं इस दिन को देश के बेरोज़गार युवाओं ने इसे राष्ट्रीय बेरोज़गार दिवस के रूप में मनाने का बीड़ा उठाने के बाद इसे देश के अलग-अलग हिस्सों में बेरोज़गार युवाओं ने राष्ट्रीय बेरोज़गार दिवस के रूप में मनाया।

हमारे देश को आजादी मिलने के बाद से ही राजनीतिक लोगों ने भारत की जनता को गलत का सहारा लेकर चुनावों के वख्त गलत झूठे वादे कर आज तक देश के जनता को बरगलाते रहें है, और यह बादस्तूर आज भी कायम है। किसी भी देश की उन्नति का सारा दारोमादार उस देश के नवयुवकों के कंधों पर होता है यदि वही कंधा कमजोर पड़ कर बिना रोटी-रोजगार के परेशान रहे तो ऐसे युवक कहाँ तक देश हित मे सोचेंगे? और नहीं देश हित मे काम कर पाएंगे बल्कि ऐसे युवाओं का समस्त ऊर्जा इन्ही धरना प्रदर्शनों पर ही अपव्य हो जायेगा तो वह दिन भी दूर नही जब दिशाविहीन यही युवाओं की समस्त ऊर्जा गलत दिशा में मुड़ कर समाज मे अराजकता फैलाने और उटपटांग के कामों में संलग्न रहेंगे।

देश के युवाओं के इस प्रदर्शन में एक बात जो सामने आई है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से इस प्रदर्शन में शामिल होने वाले विपक्षी दल के कार्यकर्ताओं एवं नेताओं ने भी बढ़-चढ़ कर इसमे हिस्सा लिया। जिसमे राजस्थान के पूर्व उप-मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता सचिन पायलट जैसे नेता लोग शामिल हो कर यह कहा कि पिछले छह वर्षों से देश के युवाओं को रोज़गार के नाम पर सिर्फ़ और सिर्फ झूठे आश्वासनों के अतिरिक्त और कुछ भी नही मिला हैं। यदि आज हम देश के युवकों के लिये कुछ भी नही सोच सकते हैं तो हमे यहां यह कहना पड़ता है कि पिछले छह वर्षों से ही नही बल्कि पिछले 50 वर्षों से भी किसी पार्टी या उनके नेताओं ने कभी इन बेरोजगार युवकों के विषय में क्यों नही सोचा? यदि सही बात कहा जाये तो वह यह है कि किसी ने भी देश मे पैदा होते बेरोजगार और बेरोजगारी जैसी समस्याओं की ओर ध्यान ही नही दिया।

आज हम सत्तासीन सरकार के शासन-प्रशाशन की बात कर रहें हैं तो जिन नेताओं ने इस प्रदर्शन में भाग लिया वे कभी स्वमं इसी शासन सत्ता पर काबिज रहें हैं तो ऐसे में यह प्रश्न उठना लाजमी है कि उन लोगों ने देश के इन बेरोजगार और बेरोजगरी कि समस्यायों के लिये क्या किया? लेकिन जैसे ही युवकों द्वरा बेरोजगरी के लिये धरना प्रदर्शन किया गया उसमे जाकर शामिल हो गये। कोई भी समस्या एक दिन में विकराल रूप धारण नही करती है बल्कि इसमे समय लगता है, यदि देश के इन युवाओं की समस्याओं पर पहले से ही ध्यान दिया गया होता तो शायद आज यह एक समस्या के रूप में उभर कर आता और नही आज जैसी स्थिति में देश युवक होते। यह हमेशा देखने मे आया आता है कि जो पार्टी सत्तासीन होती है आपने से पहले रहे पार्टी पर दोषारोपण करने में पीछे नही रहती है। इस तरह यह अंत हीन सिलसिला वादस्तूर आज भी कायम है।

अब यहां यह कहना पड़ता है कि जब जिस पार्टी की सरकार हो उसके विरोध में दूसरे पार्टी के लोग उठ खड़े होते हैं और जब वह पार्टी स्वमं सत्ता पर काबिज होती है तो वह यह भूल जाती है कि उसने जनता से क्या वादा किया था। वह शायद यही सोचती है कि अरे जनता को इतना कहाँ याद रहता होगा वह थोड़े दिनों में सब कुछ भुला देती है शायद जनता को याद रहे भी कैसे वह स्वमं के रोजममर्रे की रोजी-रोटी में इतना तल्लीन रहता है कि उसे दूसरी चीजें पर ध्यान देने की फुरसत ही नही बल्कि इस तरह के सोच रखने के स्थान के विपरीत राजनीतिज्ञ लोग एक दूसरे पर छींटाकशी करना छोड़ कर थोड़ी सी भी सच्चाई और ईमानदारी से देश के इन ज्वलंत समस्याओं की ओर ध्यान दें तो देश के इन वेरोजगार युवकों का कायाकल्प हो सकता है।

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