इस बात में अब दो राय नहीं कि भारत द्वारा सहनशीलता बरते जाने के बाद भी नेपाल ऐसी कार्रवाइयां कर रहा है जो दो देशों के बीच सामान्य संबंधों की राह में पूरी तरह बाधक ही होती हैं। सीमा पर नो मैंस लैंड पर भारतीय नागरिकों की बर्बर पिटाई इसी तरह का मामला है। नेपाल पिछले काफी समय से भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहा है। सड़क निर्माण के मामले को अनावश्यक रूप से उछाल भारत के साथ तनाव का बर्ताव करने लगा।
भारत विरोधी रुख के लिए मशहूर वहां के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का पार्टी के भीतर जब विरोध बढ़ने लगा तो उन्होंने इसकी जिम्मेदारी भारत के ऊपर डाल दी। यहां तक कि राम के जन्मस्थान अयोध्या को नेपाल में स्थित बताया और अभी हाल ही में महात्मा बुद्ध के जन्मस्थान को लेकर भी विवाद खड़ा करने का प्रयास किया। इन बातों से यही लगता है कि भारत के साथ सदियों पुराने रोटी-बेटी के संबंधों को नेपाल भूल गया है या उसकी अनदेखी कर भारत के साथ तनाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
यह काम इसलिए भी हो रहा है कि चीन द्वारा आर्थिक मदद के नाम पर उसे अपने भरोसे में ले लिया गया है और उसके बाद भारत के विरोध में उकसाया जा रहा है। चीन इस क्षेत्र में यह काम बड़े पैमाने पर किया जा रहा है जिससे नेपाल को सावधान रहना चाहिए था लेकिन वह तो खुद ही गड़े में गिरने को तैयार खड़ा है।
भारत के लिए ऐसे में आवश्यक यह है कि वह नेपाल के साथ कूटनीतिक रास्तों का इस्तेमाल कर मामले को सुलझाने का प्रयत्न करे। ऐसा वह अभी तक करता भी आ रहा है। इससे जहां पड़ोसी नेपाल हमसे अलग नहीं होगा तो वहीं चीन की साजिश भी नाकाम होगी।







