कांग्रेस महासचिव के तौर पर यूपी की अपनी पहली यात्रा में प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि राज्य के लोगों के साथ मिल कर वह नई तरह की राजनीति शुरू करेंगी। उन्होंने कहा कि ‘‘मैं आप सब से मिलकर बहुत खुश हूं। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि साथ मिल कर हम नई तरह की राजनीति शुरू करेंगे, ऐसी राजनीति जिसमें आप सब हित धारक होंगे। इस बयान के राजनितिक हलकों में कई राजनितिक मैंने निकले जा रहे हैं फिलहाल कांग्रेस की नवनियुक्त महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने लखनऊ में सफल रोड शो करके धमाकेदार राजनीति की शुरुआत की है।
प्रियंका का स्वागत करने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ जिस उत्साह के साथ जुटी उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि पार्टी में नया जोश और नई ऊर्जा का संचार सुनिश्चित है। भारतीय मतदाता और खास तौर से अराजनीतिक मतदाता, जो किसी राजनीतिक दल विशेष के प्रति प्रतिबद्ध नहीं होता, वह लोकप्रियतावाद से प्रभावित रहता है। यह लोकप्रियता चाहे फिल्म, टेलीविजन या खेल के माध्यम से मिले, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
मतदाताओं के इस वर्ग को राजनीतिक योगदान दिखाई नहीं देता। इसीलिए फिल्म अभिनेता या अभिनेत्री चुनाव में स्टार प्रचारक होते हैं, और सभी राजनीतिक दल इनका इस्तेमाल भी करते हैं। इस मायने में प्रियंका किसी भी फिल्म स्टार से ज्यादा लोकप्रिय रही हैं, और जन्म से ही लोकप्रिय रही हैं। वह हमेशा खबरों में बनी रहती हैं। जब उनकी शादी हुई तब वह खबरों में थीं, उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पढ़ने वाले अपने बच्चों से जब मिलने जाती हैं, तब प्रेस फोटोग्राफर और संवाददाता खबरों के लिए उनके पीछे पड़ जाते हैं। पिछले चुनाव में जब उन्होंने अपनी मां की मदद की थी, तब अखबारों और न्यूज चैनलों की सुर्खियों में रहीं। आशय यह कि प्रियंका के साथ लोकप्रियतावादी मूल्य उनके जन्म से ही जुड़ा है।

लखनऊ में रोडशो के दौरान उनका यह लोकप्रियतावादी मूल्य दिखाई दिया। निस्संदेह भारतीय चुनाव में इस लोकप्रियतावादी मूल्य की बड़ी भूमिका होती है, और कईबार देखा गया है कि यह लोकप्रियता वोट में भी तब्दील हुईहै। इसलिए बहुत संभव है कि आगामी लोक सभा चुनाव में प्रियंका फैक्टर काम करेगा और कांग्रेस की ताकत में इजाफा होगा। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि सिर्फ प्रियंका फैक्टर के कारण कांग्रेस का कायाकल्प हो जाएगा। कांग्रेस आला कमान भी इस तय को समझता है। शायद यही वजह है कि कांग्रेस के इस रोडशो में सोशल इंजीनियरिंग भी दिखाई दी।
राहुल के साथ बस में जो नेता बैठे थे, उनमें ब्राह्मण नेता जतिन प्रसाद, ओबीसी नेता आरपीएन सिंह, दलित नेता पीएल पुनिया और अल्पसंख्यक वर्ग के इमरान मसूद को विशेष तौर पर जगह दी गई थी। लेकिन सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में पूरी तरह से ढह चुके कांग्रेस संगठन को खड़ा करना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती भी है।







