प्रिंस की यात्रा का प्रतिफल

0
466
डॉ दिलीप अग्निहोत्री
सऊदी अरब और पाकिस्तान के रिश्ते बहुत मजबूत रहे है। पाकिस्तान पर जब भी मुसीबत आई है सऊदी अरब उंसकी सहायता करता रहा है। यहां तक कि आतंकी संघठनों को भी उंसकी मदद मिलती रही है। इसके लिए सऊदी अरब की केवल एक शर्त रहती थी कि आतंकी उंसकी सीमा से दूर रहें। मतलब वह अपना ठिकाना पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे देशों में बनाएं, यही मुल्क उनकी पनाहगाह है। ये बात अलग है कि अरब देश अपने इलाकों के इर्द गिर्द आतंकवाद को रोक नहीं सके।
संकट के बादल से ये मुल्क भी आशंकित है। दूसरी बात यह कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरब देशों के साथ रिश्तों को अहमियत दी। वह इन देशों की यात्रा पर गए। इससे आपसी रिश्ते सुधारने में सहायता मिली। यही वह कारण थे जिनके कहते सऊदी प्रिंस मोहम्मद सलमान  ने भारत यात्रा के दौरान आतंकवाद की निंदा की। इसकी समाप्ति के लिए साझा प्रयास करने की जरूरत बताई।
 प्रिंस मोहम्मद सलमान ऐसे समय में पाकिस्तान गए थे जब पुलमावा में आतंकी हमला हुआ था। इस पर  वैश्विक प्रतिक्रिया पाकिस्तान के खिलाफ थी। यह जगजाहिर है कि पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद संचालित करता है। इसका असर प्रिंस की पाकिस्तान यात्रा पर दिखा। पाकिस्तान को जितनीं सहायता की अपेक्षा थी वह नहीं मिली। निवेश का प्रस्ताव भी उम्मीदों से कम रह।
इसके फौरन बाद मोहम्मद सलमान दिल्ली पँहुचे। यहां आतंकवाद पर सख्त रणनीति बनाने पर सहमति बनी। इसके अलावा उम्मीद से अधिक निवेश का प्रिंस ने ऐलान किया। पांच महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। इन समझौतों के बाद क्राउन प्रिंस मोहम्मद सलमान और नरेंद्र मोदी की साझा साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। की। इसमें  मोदी ने कहा कि सऊदी अरब भारत का सबसे मूल्यवान रणनीतिक सहयोगी है।
मोदी ने भारत के इंफ्रास्ट्रचर में सऊदी अरब के निवेश का स्वागत किया। प्रिंस मोहम्मद सलमान के सामने मोदी ने पुलवामा हमले का मामला उठाया। कहा कि पुलवामा हमला मानवता पर क्रूर कहर की निशानी है, आतंक को बढ़ावा दे रहे देशों पर जबाव की जरूरत है। आतंकवादियों और उनके समर्थकों को सजा दिलाना बहुत जरूरी है। इससे निपटने के लिए मज़बूत कार्ययोजना की आवश्यकता है।
प्रिंस ने कहा कि उनका मुल्क  आतंकवाद से निपटने पर भारत के साथ हैं। इसके मद्देनजर  खुफिया जानकारी साझा की जाएगी। आतंकवाद और कट्टरवाद पर हमारी साझा परेशानी हैं। हम अपने दोस्त भारत को बताना चाहते हैं कि हर मोर्चे पर हम सहयोग करेंगे।
इस क्रम में सऊदी अरब के विदेश मंत्री आदिल बिन अहमद ने इस बात से इंकार किया कि उनका मुल्क आतंकी  मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित कराने के भारत के प्रयासों का विरोध करता है। उन्होंने कहा कि कोई भी आतंकवादी या अन्य व्यक्ति जो आतंकवाद का समर्थन या उसे वित्तपोषित करता है, उसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। सऊदी अरब आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा। आतंकियों को  सजा दी जानी चाहिए।
सऊदी अरब और पाकिस्तान दोनो इस्लामी मुल्क है। पाकिस्तान के नेताओं व सैन्य कमांडरों के यहां के निजाम से निजी रिश्ते रहे है। ऐसे में सऊदी अरब से बहुत बड़े निर्णय की उम्मीद तो नहीं है, लेकिन यह तो तय हुआ कि अब मुस्लिम देशों द्वारा भी पाकिस्तान का बचाव मुश्किल होता जा रहा है।
Please follow and like us:
Pin Share

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here