डॉ दिलीप अग्निहोत्री
राज्यपाल के रूप में राम नाईक ने अनेक नई परम्पराओं की शुरुआत की है। पदम् पुरष्कृत महानुभावों को राजभवन में सम्मानित करने की शुरुआत राम नाईक ने ही की थी। अब यह उत्तर प्रदेश की परंपरा बन चुकी है। राम नाईक ने करीब दो वर्ष पहले एक अभूतपूर्व निर्णय लिया था। इसके अंतर्गत उत्तर प्रदेश में रहने वाले किसी व्यक्ति को यदि पदम्श्री,पदम् भूषण या पदम् विभूषण पुरष्कार मिलता है, तो उन्हें लखनऊ में सम्मानित करना तय हुआ। ज्ञात हो कि यह तीनों पुरष्कार राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्वारा दिये जाते है। राम नाईक उत्तर प्रदेश के हित व प्रतिष्ठा के अनुरूप सोचते है। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश को भी ऐसे महानुभावों को सम्मानित करना चाहिए।जिससे उनके व्यक्तित्व व कृतित्व की चर्चा व्यापक रूप में हो। गत वर्ष इसमें एक दिलचस्प उदाहरण जुड़ा। पिछली बार इन पुरष्कारों को जो सूची जारी हुई थी उसमें योगेंद्र जी बाबा को मध्य प्रदेश का बताया गया था। राम नाईक को इस पर आशंका थी। उन्होंने पत्र व्यवहार किया। इससे उनका जन्म स्थान उत्तर प्रदेश में प्रमाणित हुआ। राज्यपाल ने कहा भी कि अब तक मेरे द्वारा ऐसे कौन-कौन से कार्य किये गये हैं जो लोगों को लगता है कि वे नयी शुरूआत हैं। जब मैंने हिसाब लगाया तो मुझे लगा कि करीब दस ऐसे नये कार्य हैं जिन्होंने मुझे नई पहचान दी।
राजभवन के दरवाजे सबके लिये खुले रखना तथा सम्बोधन में महामहिम के स्थान पर माननीय शब्द का प्रयोग करना, कारगिल दिवस पर बिना बुलाये लखनऊ के मध्य कमान स्थित स्मृतिका जाकर कारगिल शहीदों को आदरांजलि देना तथा परमवीर चक्र से सम्मानित प्रदेश के वीर सैनिकों के भित्ति चित्रों का निर्माण करवाना, विधायक, सांसद, मंत्री एवं राज्यपाल रहते हुये अपना वार्षिक कार्यवृत्त प्रकाशित करना, डाॅ आंबेडकर का सही नाम लिखना, लोकमान्य तिलक के अजर अमर उद्घोष स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा’ की एक सौ एकवी जयंती का आयोजन, अड़सठ वर्ष के बाद प्रथम बार उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस का आयोजन, कुम्भ के पूर्व इलाहाबाद का पौराणिक नाम प्रयागराज करने का सुझाव, विधान सभा एवं नगरीय निकाय चुनाव में सबसे ज्यादा मतदान वाले क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों एवं कर्मचारियों का सम्मान, कुष्ठ पीड़ितों का गुजारा भत्ता बढ़ाने तथा उनके लिये पक्के आवास बनाने का सुझाव देना एवं संस्मरण चरैवेति! चरैवेति का प्रकाशन, जिसका अब तक दस भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।
यह विचार उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आज राजभवन में आयोजित पद्म पुरस्कार उन्नीस सौ उन्नीस से अलंकृत उत्तर प्रदेश के महानुभावों के सम्मान समारोह में व्यक्त किये। राजभवन में आयोजित सम्मान समारोह में पद्म पुरस्कार उन्नीस सौ उन्नीस से सम्मानित वाराणसी के राजेश्वर आचार्य को कला-हिन्दुस्तानी लोक गायकी, बाराबंकी के राम सरन वर्मा को कृषि, वाराणसी के डाॅ रजनी कांत को सामाजिक कार्य, वाराणसी के हीरालाल यादव को कला-लोक गायकी वाराणसी की सुश्री प्रशांति सिंह को खेल-बास्केट बाल, बुलन्दशहर के भारत भूषण त्यागी को कृषि, देवेन्द्र स्वरूप को साहित्य एवं शिक्षा-पत्रकारिता के लिये मरणोपरान्त, लखनऊ के डाॅ शादाब मोहम्मद को दंत-चिकित्सा, मथुरा के संत रमेश बाबा को सामाजिक कार्य-पशु सेवा, लखनऊ के प्रोफेसर बृजेश कुमार शुक्ला को साहित्य एवं शिक्षा के लिये, का सम्मान किया गया है।
रमेश बाबा की ओर से उनके प्रतिनिधि सुनील सिंह, हीरालाल यादव की ओर से उनके पुत्र सत्य नारायण यादव तथा देवेन्द्र स्वरूप का पुरस्कार उनकी पुत्री श्रीमती पुनीता अग्रवाल द्वारा सम्मान ग्रहण किया गया। राज्यपाल ने कहा कि बाइस करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश से लोगों को पदम् सम्मान के लिये चयनित किया गया। जिन लोगों ने अपने-अपने क्षेत्रों में विशिष्टता अर्जित की है उससे देश, प्रदेश और समाज का नाम रोशन हुआ है और आने वाली पीढ़ी के लिये यह प्रेरणा का स्रोत भी है। सम्मान पाने वालों के व्यक्तित्व और कृतित्व ने उन्हें सम्मान का पात्र बनाया है। अपने घर-आंगन में सम्मान मिलना अपने आप में संतोष देने वाली बात है। वास्तव में राजभवन में होने वाला यह सम्मान प्रदेश की जनता की ओर से मिलने वाला सम्मान है।
इसके एक दिन पहले राम नाईक ने लखनऊ के माधव सभागार में चौबीसवें वें भाऊराव देवरस स्मृति सेवा सम्मान प्रदान किये थे। इसमें विश्वनाथ प्रधान कन्धमाल, उड़ीसा को नशा मुक्ति के लिए तथा पुरूषोत्तम पाण्डुरंग कामत बारदेश, गोवा को मातृभाषा प्रोत्साहन के लिए अंगवस्त्र, अभिनन्दन पत्र, श्रीफल व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। समारोह भाऊ राव देवरस सेवा न्यास द्वारा आयोजित किया गया था। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल, ब्रह्मदेव शर्मा सहित अन्य विशिष्टजन उपस्थित थे।
राज्यपाल ने भाऊराव देवरस सेवा न्यास को निरन्तर चौबीस वर्ष से भाऊराव स्मृति सेवा सम्मान आयोजित करने के लिए बधाई देते हुए कहा कि संस्था सामाजिक कार्य के माध्यम से दूसरों को प्रेरित करने वाली संस्था है। भाऊराव देवरस ने जो सेवा का छोटा पौधा रोपा था, वह आज कभी न समाप्त होने वाला अक्षय वट जैसा स्थापित हो गया है। पुरूषोत्तम पाण्डुरंग कामत ने गोवा में मराठी और कोंकणी भाषा में शिक्षा का प्रचार-प्रसार किया तथा भारतीय भाषा सुरक्षा मंच की स्थापना की। विश्वनाथ प्रधान ने उड़ीसा के दूरस्थ क्षेत्र के सौ गांवों में नशा मुक्ति का सराहनीय कार्य किया है। ऐसे सेवाव्रती महानुभावों से नई पीढ़ी को प्रेरणा प्राप्त करनी चाहिए।
राम नाईक ने कहा कि सम्मान समारोह से जहां महानुभावों के विशिष्ट कार्यों को मान्यता मिलती है वहीं उनके कार्यों से लोग प्रेरणा भी प्राप्त करते हैं। उड़ीसा और गोवा में काम करने वालों का उत्तर प्रदेश में सम्मान होना वास्तव में महत्व की बात है। उत्तर प्रदेश आबादी की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा प्रदेश है। विश्व में जनसंख्या की दृष्टि से केवल तीन देश अमेरिका, चीन और इण्डोनेशिया ही उत्तर प्रदेश से बड़े हैं। शिक्षा के माध्यम पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मातृभाषा में प्रदान की जाने वाली शिक्षा बालकों के लिए ज्यादा उपयोगी होती है।
राज्यपाल ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा जनतांत्रिक देश है जो संविधान के अनुरूप चलता है। संविधान ने अठारह वर्ष व उससे अधिक के भारतीय नागरिकों को मतदान का अधिकार दिया है। निकट भविष्य में लोकसभा के चुनाव के लिए मतदान होगा। चुनाव को मतदाता की भागीदारी के बिना पूरा नहीं किया जा सकता। ऐसे समय में मतदान सर्वश्रेष्ठ दान है। स्वयं भी मतदान करें और दूसरों को भी मतदान के लिए प्रेरित करें। मतदान सबसे बड़ा राष्ट्रधर्म है। लोकतंत्र में मत का बहुत महत्व है। एक मत से सरकार बनती है और गिरती है। उन्होंने कहा कि लोकसभा उन्नीस सौ उन्नीस के चुनाव में सबसे अधिक मत प्रतिशत वाले लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र, विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र, वार्ड एवं क्षेत्र पंचायत तथा सर्वाधित मत प्रतिशत वाले केन्द्र से जुड़े लोगों का राजभवन में सत्कार किया जायेगा। सबसे ज्यादा मतदान का मानक प्रतिशत होगा, संख्या नहीं क्योंकि सभी लोकसभा क्षेत्र में मतदाता संख्या समान नहीं होती है।






