डॉ दिलीप अग्निहोत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र आदि प्रतिदिन अत्यधिक व्यस्त रहते है। इस क्रम में 24 फरवरी के दिन खास रहा। इस दिन मोदी ने पहले रेडियो में मन की बात की। इसमें विशेष रूप से उन्होंने जवान और किसान के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इसके बाद गोरखपुर में किसान क्रांति रैली को संबोधित किया। यहां मोदी ने कई विकास परियोजनाओं का अनावरण किया। उनकी सरकार ने चालू वित्त वर्ष अंतरिम बजट में प्रधानमंत्री किसान योजना की घोषणा की थी। इसके अंतर्गत दो हेक्टेयर तक जोत वाले बारह करोड़ छोटे एवं सीमांत किसानों को सालाना छह हजार रुपये की नकद सहायता देने की घोषणा की गई थी। प्रधानमंत्री ने किसान सम्मान निधि की शुरुआत गोरखपुर की। किसानों के कल्याण की यह अभूतपूर्व योजना है। मोदी ने कहा कि जिन किसानों को आज पहली किश्त नहीं मिली है, उन्हें आने वाले हफ्तों में पहली किश्त की राशि मिल जाएगी। सरकार पूरी ईमानदारी से कोशिश कर रही है कि किसानों को सभी संभव संसाधन दिए जाएं, जिससे दो हजार बाइस तक उनकी आय को दो गुनी हो जाये। इस योजना के तहत हर साल पचहत्तर हजार करोड़ रुपये किसानों के खाते में सीधा पहुंचने वाले हैं। मोदी ने कहा कि अब तक देश के एक करोड़ एक लाख किसानों के बैंक खातों में इस योजना की पहली किश्त ट्रांसफर करने का सौभाग्य मुझे मिला है। इन किसानों को दो हजार इक्कीस करोड़ रुपए अभी ट्रांसफर किए गए हैं। करोड़ों पशुपालकों, दूध के व्यवसाय से जुड़े किसान परिवारों और मत्स्य पालन और उसके व्यवसाय से जुड़े बहन-भाइयों को भी किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा जोड़े गए है। मोदी ने किसानों की सूची सरकार को न भेजने वाले राज्यों को चेतावनी दी।
वस्तुतः ऐसी राज्य सरकारे किसानों का अहित कर रही है। उन्हें डर है कि किसान कल्याण योजनाओं का लाभ भाजपा को मिलेगा। विरोधियों ने इस योजना के बारे में संसद में सुना तो सबके चेहरे लटक गए थे। मतलब साफ है विपक्षी पार्टियों को महसूस होने लगा है कि किसान भाजपा के साथ है। मोदी ने विपक्ष पर किसान वीरोधी होने का आरोप लगाया।कहा कि कांग्रेस, सपा, बसपा आदि को किसान दस साल में एक बार चुनाव के समय याद आता है। फिर इन्हें कर्जमाफी का बुखार चढ़ जाता है। हमने सिर्फ चुनावी वादा पूरा करने के लिए यह योजना नहीं शुरू की है। बल्कि लाल किले से इसकी घोषणा की थी। बजट में इसके लिए धन निर्धारित किया है।
मोदी ने कहा कि हमारे लिए कर्जमाफी का फैसला लेना कोई मुश्किल काम नहीं था। हम भी रेवड़ी बांट देते। लेकिन ऐसा करना पाप है। सरकार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना पर ही करीब एक लाख करोड़ रुपए खर्च कर रही है। जिससे तीन चार दशक से लंबित सभी परियोजनाएं पूरी हो सकें। देश की निन्यानवे ऐसी परियोजनाएं चुनी थीं, इनमें से सत्तर से ज्यादा पूरी होने की स्थिति में आ गई हैं। ये वो काम है जो किसानों की आने वाले कई पीढ़ियों को लाभ देने वाला है।
नरेंद्र मोदी की किसान कल्याण योजना किसी सामाजिक क्रांति से कम नहीं है। इसी प्रकार उनकी आयुष्मान योजना भी अभूतपूर्व रही। सामाजिक क्षेत्र में यह अपने ढंग की सबसे बड़ी योजना है। विश्व में इसकी बराबरी की दूसरी कोई योजना नहीं है।
मन की बात में मोदी ने किसान और जवान दोनों पर गर्व व्यक्त किया। देश को सुरक्षित और समृद्ध बनाने में इनका योगदान उल्लेखनीय है। मन की बात का रिकार्ड कायम हुआ। यह त्रिपनवां प्रसारण था। अगला प्रसारण लोकसभा चुनाव के बाद होगा। मन की बात प्रारंभ से अंत तक अपनी लोकप्रियता बनाये रहा। सत्ता में रहने वाले किसी नेता के लिए यह सामान्य उपलब्धि नहीं है। मोदी ने कहा कि वह अपने को प्रत्येक भारतीय परिवार का हिस्सा मानते है। उनकी मन की बात में बच्चों की पढ़ाई, परीक्षा, खेल, पर्यावरण, चिड़िया, किसान, जवान ,जैसे सकारात्मक विषय रहते है। मन की बात इस लिए लोकप्रिय रहा, क्योकि मोदी की लोकप्रियता भी कायम है। विपक्ष अमर्यादित शब्दों से उनपर अनवरत प्रहार करता है। लेकिन नरेंद्र मोदी की छवि यथावत है। उनकी इस छवि का भाजपा को पिछले लोकसभा चुनाव की भांति लाभ मिलेगा।
इसके दो दिन पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने लखनऊ में सहकारिता के माध्यम से किसान कल्याण पर भाजपा सरकारों की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी। अमित शाह ने अपना सार्वजनिक जीवन सहकारिता से ही प्रारंभ किया था। यहां शाह ने आरोप लगाया था कि सपा बसपा की मानसिकता समितियों पर कब्जे की थी। इसीलिए सर्वाधिक संभावनाओं वाले प्रदेश में सहकारिता आंदोलन में घुन लग गया। समितियां घाटे में चली गयीं। भाजपा के लोगों की मानसिकता इससे जुड़कर सेवा की होनी चाहिए। पूरी पारदर्शिता से न्यूनतम खर्च कर अधिकतम मुनाफा कमाएं। अधिक से अधिक किसानों से जुड़ें। अलग अलग क्षेत्र में सहकारिता के जरिए संभावनाओं वाले इस प्रदेश में किसानों की खुशहाली का मध्यम बने।
भाजपा का मकसद किसानों को शोषण से बचाना गुजरात के विकास का मॉडल दुनिया में नजीर है। उसके पीछे सहकारिता ही है। गांधी की प्रेरणा से सरदार पटेल ने जिस आंदोलन की शुरुआत की थी, उसका मकसद छोटे-छोटे किसानों को स्थानीय साहूकारों के शोषण से बचाना था। इस उद्देश्य को ध्यान में रखना होगा। यूपीए सरकार के पांच वर्ष के कार्यकाल में सहकारिता के लिए सिर्फ तेईस हजार करोड़ मिले थे, जबकि भाजपा सरकार ने इकहत्तर करोड़ रुपये से अधिक दिये हैं। संप्रग सरकार ने दस वर्षों में किसानों को सिर्फ तिरपन हजार करोड़ का कर्ज माफ किया। भाजपा सरकार पचहत्तर हजार करोड़ देने जा रहे हैं। कांग्रेस ने कर्नाटक के किसानों का कर्जा नहीं माफ किया। जबकि योगी ने अपने बूते उत्तर प्रदेश में कर्जमाफी के मुश्किल काम को क्रियान्वित कर दिखाया। देशी गायों के संरक्षण और संवद्र्धन की लिए साढ़े सात सौ करोड़ रुपये से कामधेनु आयोग का गठन किया गया है।
संप्रग के कार्यकाल में भारत दुनिया की नौवीं अर्थव्यवस्था थे लेकिन, आज छठें स्थान पर हैं। कुछ समय बाद पांचवे पर आ जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री के न्यू इंडिया के सपने के लिए किसानों के जीवन में बदलाव जरूरी है। ऐसा सहकारिता क्षेत्र की मजबूती से ही होगा। पूर्व की सरकारों के डेढ़ दशक के कुशासन ने इस आंदोलन को कमजोर किया। दो दर्जन से अधिक बैंकों के लाइसेंस रद्द हो गये। चीजें अब पटरी पर आयीं हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान-गेहूं की रिकॉर्ड खरीद और भुगतान, कृषि निवेशों की समय से उपलब्धता और अन्य योजनाओं से किसानों का जीवन बेहतर हुआ है।
सहकारिता का मुख्य उद्देश्य किसानों को शोषण से बचाना है। अधिकांश जगह पर किसानों का बड़ा शोषण होता है। हमको किसानों को व्यापारियों के शोषण से बचाना भी है। उन्होंने कहा कि देश में इस सहकारिता आंदोलन को सरदार पटेल ने आगे बढ़ाने का काम किया था। उन्होंने कहा कि आज भी मैं प्राइमरी एग्रिकल्चर का अध्यक्ष हूं, जब भी समय मिलता है मैं वहां जाता हूं। गुजरात की उन्नति जो दुनिया देख रही ही है उसकी नींव में सहकारिता आंदोलन ही है। यहां पर जनसम्मेलन देखकर आनंद आया, मैं आज भी को-ऑपरेटिव मित्रों के साथ बैठता हूं।
उन्होंने कहा कि गरीब से गरीब किसानों को मजबूत बनाने के लिए सहकारिता आंदोलन की प्रमुख भूमिका है। भाजपा सरकार ने देश के हर क्षेत्र में विकास के आयाम स्थापित किया है आर्थिक क्षेत्र में चीन को पछाड़कर सबसे तेज आर्थिक विकास वाला देश बन गया है। सहकारिता संघवाद को बढ़ावा देने में मोदी सरकार ने बहुत उत्कृष्ट कार्य किये हैं। हमें लक्ष्य तय करने होंगे। किसान को कितना लाभ पहुंचाना है। कितना लाभ संस्था को मिलना है।







