सड़क हादसों के लिए वैसे तो कई वजहें जिम्मेदार होती हैं लेकिन सड़क पर चलते समय फोन करने का शौक इसमें सबसे प्रमुख रूप से उभर कर सामने आना वास्तव में आश्चर्य ही नहीं बल्कि चिंता की बहुत बड़ी बात है। यह आश्चर्य का विषय इसलिए माना जाना चाहिए क्योंकि सड़क पर पैदल या वाहन पर जाते समय सबसे ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है, और यह बात कोई रहस्य नहीं बल्कि इसमें समझदारी अपेक्षित है।
अपनी जान की फ़िक्र भला किसे नहीं होती इसके बावजूद यदि लापरवाही करें तो इसका मतलब यह संबंधित व्यक्ति केवल अपने शौक को ही प्रमुख स्थान देता है, या फिर जान को खतरे से ऊपर मानता है। स्थिति तो यहां तक गंभीर हो गई कि रोजाना पांच जाने इसी की वजह से जा रही हैं। फोन पर बात करने का शौक तो इस कदर लोगों के सिर चढ़ चुका है कि छोटी-छोटी जगहों पर भी इसके कई शौकीन पैदल सड़क पार करते हुए भी बिना किसी हिचक के चलते चले जाते हैं और उन्हें जान से हाथ धोना पड़ता है।

इसके बावजूद ऐसे हादसों की संख्या कम होने की जगह बराबर बढ़ती जा रही है। इसलिए आश्चर्य का विषय यह है कि मोबाइल फोन के शौकीनों को अपनी सुरक्षा का सबक किस तरह मिले कि ऐसे हादसों को टाला जा सके। वास्तव में ऐसे हादसे जहां मानव जीवन के लिए काल के रूप में सामने आते हैं, तो वहीं तमाम घरों में ये एसिडेंट मातम के हाल भी पैदा कर देते हैं।
इस मामलें में चिंता की दूसरी बात यह है कि ऐसे शौक या प्रवृत्ति के लोगों की मानसिकता को किस तरह बदला जाए क्योंकि ये लोग देखा देखी भी बेवकूफी के काम करते हैं और वह जानलेवा शिकार हो जाते हैं इसलिए जरूरी यह होता जा रहा है कि सड़क पर जाते समय फोन पर बात करने की प्रवृत्ति पर रोक लगे। इसके लिए सबसे बड़ा उपाय यह है कि आमजन विवेक और समझदारी से काम लें। स्वाभाविक है कि यदि व्यक्ति को अपनी ही जान की परवाह नहीं होगी तो भला उसकी मदद कौन कर पाएगा। वरना तो मोबाइल फोन कॉल हादसे के रूप में सामने आते ही रहेंगे।








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