साल की पहली तारीख है आज, और ऐसे में देशवासियों को 2019 से बड़ी उम्मीदें हैं इस नव वर्ष पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने 51वें और इस वर्ष के अंतिम ‘‘मन की बात’ में वर्ष 2018 की जो उपलब्धियां गिनाई, उनसे सहमत-असहमत होने के अनेक कारण हो सकते हैं। किंतु इनकार नहीं किया जा सकता कि इसमें देश का आत्मविश्वास बढ़ाने का भाव सबसे प्रबल है। 2018 में ऐसी अनेक घटनाएं हुई जो चिंतित और भयभीत करती हैं। जैसे भीड़ का कानून हाथ में लेना या राजनीतिक विमर्श का निचले स्तर पर आ जाना। बावजूद इसके भारत के हिस्से अनेक क्षेत्रों में उपलब्धियां और गौरव के भी अनेक प्रसंग इस वर्ष आए, जिनसे 2019 के लिए उम्मीदें बढ़ती हैं।
प्रधानमंत्री ने यही बताने की चेष्टा की। इस संदर्भ में जिन कदमों या घटनाओं का उल्लेख किया वे सच तो हैं। मसलन, 2018 में विश्व की सबसे बड़ी स्वास्य बीमा योजना ‘‘आयुष्मान भारत’ की शुरु आत हुई, देश को एकता के सूत्र में पिरोने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल के सम्मान में विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ देश को मिली, हर गांव तक बिजली पहुंची, व्यापार सुगमता सूचकांक में भारत ने ऊंची छलांग लगाई, लालकिले से पहली बार आजाद हिंद सरकार की 75वीं वर्षगांठ पर तिरंगा फहराया गया, देश संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च पर्यावरण पुरस्कार ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ’ से सम्मानित हआ, वाराणसी में गंगा नदी पर भारत के पहले बहुआयामी टर्मिंनल व सिक्किम के पहले हवाईअड्डे की शुरु आत हुई..।

इसी तरह खेल के क्षेत्र में भी भारत के खिलाड़ियों ने एशियाई खेलों से लेकर पैरा एशियाई खेलों में बेहतर प्रदशर्न किया, क्रि केटरों ने भी निराश नहीं किया। हम जब नकारात्मक होकर विचार करते हैं, तो अपनी उपलब्धियां ओझल हो जाती हैं। जो हमारी कमियां हैं, जिनमें हम सफल नहीं रहे, जो वाकई चिंताजनक पहलू हैं। उनको ठीक करने की कोशिश तो नये वर्ष में हमें जारी रखना ही है, परंतु इसके साथ राष्ट्र के रूप में हमारी जो कुछेक उपलब्धियां रहीं उनको भी नजरअंदाज नहीं करना है।
प्रेरणा और विश्वास इसी से प्राप्त होगा। प्रधानमंत्री ने यही कहा है कि चाहे यह किसी एक का जीवन हो या राष्ट्र का, हमें पीछे और आगे दोनों ओर देखने की सलाह दी जाती है, जिससे कि हम अपनी गलतियों से सबक सीखकर आगे बढ़ने का आत्मविास प्राप्त करते हैं। तो 2018 के अंत और 2019 की शुरुआत के साथ हमारे सामने दोनों पक्ष हैं, और इनको लेकर ही हमें आगे बढ़ना है। नये वर्ष में उम्मीद यही बनी रहनी चाहिए कि हम सफलताओं और उपलब्धियों के नये मुकाम हासिल करेंगे और हमारे राष्ट्र का गौरव बढ़ेगा।








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