नेशनल हेराल्ड से हलकान हाईकमान

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
अक्सर किसी पर निराधार आरोप लगाने वालों की तीन उंगलियां अपनी ही तरफ होती है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस समय इसी अवस्था से गुजर रहे है। राफेल को लेकर वह प्रधानमंत्री के विरुद्ध लगातार अमर्यादित शब्दों का प्रयोग कर रहे है, बिडंबना देखिये पेरोल पर बाहर सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। नेशनल हेरल्ड मामले में उन्हें कोर्ट ने फिर एक झटका दिया है।
नेशनल हेराल्ड हाउस पर चल रही न्यायिक कार्रवाई कांग्रेस पर भारी पड़ रही है। दिल्ली हाई कोर्ट ने दो सप्ताह में नेशनल हेराल्ड हाउस को खाली करने का निर्देश दिया है। नेशनल हेराल्ड की कंपनी एसोसिएट जर्नल्स लिमिटेड अर्थात एजेएल ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर नेशनल हाउस हाउस की लीज रद करने के फैसले को चुनौती दी थी, इस मामले में कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद बाइस नवंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने एजेएल की याचिका खारिज करते हुए कहा कि दो सप्ताह में नेशनल हेराल्ड हाउस खाली करना होगा।
राहुल गांधी राफेल को लेकर प्रधानमंत्री पर हमला बोल रहे है, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद भी संयुक्त संसदीय समिति के गठन हेतु सिर पर आसमान उठाये है। दूसरी तरफ नेशनल हेराल्ड मामले में कोर्ट के समक्ष सारी हेकड़ी नदारत दिखाई दे रही है। यहां वह बचाव की गुहार लगाते है, लेकिन कोर्ट उसे खारिज कर देता है। कभी आयकर का मामला दुबारा खोले जाने के आदेश को निरस्त करने की अपील करते है, कोर्ट अस्वीकार कर देता है, कभी लीज को बनाये रखने का निवेदन करते है, वह भी मंजूर नहीं किया जाता। न्यायपालिका अपना कार्य कर रही है। कांग्रेस हाईकमान की मुसीबत बढ़ रही है।
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बात नेशनल हेराल्ड तक सीमित होती, तब भी गनीमत थी। अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में भी हाईकमान पर आरोप लगते रहे है। इस मामले के मुख्य आरोपी मिशेल का प्रत्यर्पण भी हो चुका है। जिसने भी बेचैनी बढ़ाई है। इसके पहले कोयला घोटाले में पूर्व कोयला सचिव को जेल की सजा मिली है। जिस समय का यह मसला था उस समय कोयला मंत्रालय का प्रभार मनमोहन सिंह के पास था। ऐसे में वह नैतिक जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। प्रधानमंत्री के रूप में वह कितने प्रभावशाली थे, यह देश जानता था।
इसके पहले सितंबर में भी कांग्रेस हाईकमान को इस मामले में निराश होना पड़ा था। दस सितंबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने दो हजार ग्यारह बारह के टैक्स आकलन को दोबारा खोले जाने के मसले में दोनों  को राहत देने से साफ इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि टैक्स संबंधी पुराने मामलों की आयकर विभाग फिर से जांच कर सकता है। हाई कोर्ट के इस फैसले को दोनों नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। दोनों ने नेशनल हेराल्ड और यंग इंडिया से जुड़े टैक्स एसेसमेंट की दोबारा जांच के आयकर विभाग के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी।
 उन्नीस सौ अड़तीस में  पंडित जवाहर लाल नेहरू ने नेशनल हेराल्‍ड अखबार की नींव रखी थी। इंदिरा गांधी के समय जब कांग्रेस में विभाजन हुआ तो इसका स्‍वामित्‍व इंदिरा कांग्रेस आई को मिला। नेशनल हेराल्ड को कांग्रेस का मुखपत्र माना जाता है। आर्थिक हालात के चलते दो हजार आठ में इसका प्रकाशन कर दिया गया था।
एसोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड नेशनल हेराल्ड अखबार की मालिकाना कंपनी है। कांग्रेस ने दो हजार ग्यारह में  इसकी नब्बे करोड़ रुपये की देनदारियों को अपने जिम्मे ले लिया था। इस हैसियत से  पार्टी ने इसे नब्बे  करोड़ रुपये का कर्ज दिया था। इसके बाद पांच लाख रुपये से यंग इंडियन कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया और राहुल की अड़तीस अड़तीस प्रतिशत  हिस्सेदारी रखी गई। शेष चौबीस प्रतिशतहिस्सेदारी कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज के पास रही।
इसके बाद टीएजेएल के दस दस रुपये के नौ करोड़ शेयर यंग इंडियन  को दे दिए गए और इसके बदले यंग इंडियन को कांग्रेस का कर्ज चुकाना था। नौ  करोड़ शेयर के साथ यंग इंडियन को इस कंपनी के निन्यानबे प्रतिशत  शेयर हासिल हो गए। इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने नब्बे करोड़ का कर्ज  भी माफ कर दिया यंग इंडियन को मुफ्त में टीएजेएल का स्वामित्व मिल गया। भाजपा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी का आरोप है कि यह सब कुछ दिल्ली में बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित हेराल्ड हाउस की सोलह सौ करोड़ रुपये की बिल्डिंग पर कब्जा करने के लिए किया गया। अन्य सम्पत्तियां पांच हजार करोड़ रुपये से ज्यादा है।  स्वामी ने सोनिया और राहु गांधी के खिलाफ याचिका दायर की है।
उनका दावा है कि साजिश के तहत यंग इंडियन लिमिटेड को टीजेएल की संपत्ति का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा हेराल्ड हाउस को केंद्र सरकार ने समाचार पत्र चलाने के लिए जमीन दी थी, इस लिहाज से उसे व्यावसायिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जबकि सोनिया और राहुल इस सम्पत्ति का व्यवसायिक उपयोग करके भारी लाभ प्राप्त करते रहे है। ये केस फिलहाल दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में है और सोनिया व राहुल इसमें जमानत पर हैं।
यह सही है कि इस निर्णय के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है। लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट  ने जो टिप्पणी की है उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि यंग इंडिया ने एजेएल को हाईजैक कर लिया था।
एजेएल ने अपनी याचिका में कहा था कि इमारत खाली करने का सरकार का आदेश विवादास्पद उदेश्य, बदनीयत और पूर्वाग्रह से ग्रस्त था। इससे जवाहरलाल नेहरू की विरासत समाप्त करने का प्रयास किया गया है। हाईकोर्ट ने इन सभी आरोपो को नकार दिया है।  हाईकोर्ट  ने कहा  एजेएल के निन्यानबे प्रतिशत शेयर हासिल करने के लिए जो प्रक्रिया अपनाई गई, वह संदिग्ध है। एजेएल को यंग इंडिया ने हाईजैक किया और इसमें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी सबसे बड़े भागीदार हैं। एजेएल को दो सप्ताह में इमारत खाली करनी होगी, नहीं तो अगली कार्रवाई की जाएगी। पूरा मामला किसी रोचक पटकथा जैसा है।
नेशनल हेराल्ड की तत्कालीन डायरेक्टर्स, सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और मोतीलाल वोरा ने, इस अखबार को यंग इंडिया लिमिटेड नामक कंपनी को बेचने का निर्णय लिया था। यंग इंडिया के डायरेक्टर्स सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, ऑस्कर फेर्नाडीज़ और मोतीलाल वोरा थे। इस डील को फाइनल करने के लिए मोती लाल वोरा ने  मोतीलाल वोरा से बात की, क्योकि वह दोनों ही कंपनियों के डायरेक्टर्स थे। नब्बे करोड़ का कर्ज़ चुकाने के लिए यंग इंडिया ने कांग्रेस पार्टी से कर्ज माँगा। इसके लिये कांग्रेस पार्टी ने एक मीटिंग बुलाई जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और कांग्रेस पार्टी के महासचिव शामिल हुए। ये सभी वही महानुभाव थे। पार्टी किसकी है यह बताने की जरूरत नहीं है।
कांग्रेस पार्टी को कर्ज  देना स्वीकार करना ही था।  कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा ने इसे पास  कर दिया। यंग इंडिया के डायरेक्टर मोतीलाल वोरा ने ले लिया और आगे नेशनल हेराल्ड के डायरेक्टर मोतीलाल वोरा को दे दिया। सोनिया, राहुल, ऑस्कर और वोरा साहब ने फिर एक बैठक बुलाई। यह तय किया गया कि नेशनल हेराल्ड ने आज़ादी की लड़ाई में बहुत सेवा की है इसलिए उसके ऊपर नब्बे करोड़ के कर्ज़ को माफ़ कर दिया जाता है। यंग इंडिया जिसमें  अठत्तर प्रतिशत शेयर सोनिया और राहुल  और शेष शेयर ऑस्कर और वोरा साहब के हैं। इन्हीं लोगों को  पांच हजार करोड़ रुपये की संपत्ति मिल गई। जिसमें ग्यारह मंजिल की बिल्डिंग बहादुर शाह जफ़र मार्ग दिल्ली में है। इससे साठ लाख महीना किराया मिलता है। जाहिर है कि यह मामला दिलचस्प और लगभग पूरी तरह से स्पष्ट है। दूसरों पर बिना प्रमाण  के आरोप लगाने का नैतिक अधिकार भी होना चाहिए।

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  1. The great thing about it DVD is you can perform dance exercises anytime, without a partner.
    There they were, anticipating their forthcoming experience and joyously reliving the last one
    — Peter, Susan, Edmund, and Lucy, in the guises of actors
    William Moseley (now a dashing 20-year-old), Anna Popplewell (a newly
    minted Oxford freshman), Skandar Keynes (with vocal octaves much deeper when he was 15), and Georgie Henley
    (approaching teenhood, a good six inches taller than we last saw her).
    Now you’ve taken that all-important 1st step and
    they are looking over this report about online games and social networking, you are within the unique and privideged position for being amongst a group of pioneering entreprenuers who already know about it and they are taking affirmative action.

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