डॉ दिलीप अग्निहोत्री
सीबीआई में दो शीर्ष अधिकारियों के बीच विवाद हुआ। दोनों ने एक दूसरे पर आरोप लगाए थे। इस विवाद की सच्चाई जानने के लिए जांच पड़ताल की आवश्यकता थी। ये अपने पदों पर कार्य करते रहे, और वही संस्था जांच करेगी रहे, यह हास्यस्पद होता। सरकार ने सर्वश्रेष्ठ विकल्प चुना। दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेजा। नए निदेशक की नियुक्ति की। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे गलत नहीं माना। उसने जांच होने तक नवनियुक्त निदेशक को कार्य करने की अनुमति प्रदान की। एक प्रकार से सरकार के निर्णय को क्रियान्वयन की दृष्टि से सही माना गया।इस पूरे प्रकरण में दूर दूर तक कहीं भी राफेल विमान नहीं था।
सीबीआई इसकी जांच भी नहीं कर रही थी। न सरकार ने इसके लिए कहा था, न सुप्रीम कोर्ट का कोई निर्देश था। विवाद की वजह कसाई व्यवसायी था। लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को प्रत्येक मसले पर राफेल ही दिखाई देने लगा है। उन्होंने इस मसले को राफेल से जोड़ दिया। इसी के साथ वह चोर चोर चिल्लाने लगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष है, इसलिए पार्टी को अपनी मर्जी से हांक सकते है। राहुल ने यही किया। वह पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं को लेकर सड़क पर उतर गए। सीबीआई के दफ्तर पर प्रदर्शन होने लगा।
वह सरकार पर संस्थाओं को नष्ट करने का आरोप लगा रहे थे। लेकिन सच्चाई यह थी कि वह स्वयं सुप्रीम कोर्ट का सम्मान नहीं कर रहे थे। जब यह विषय सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आ गया था। तब राहुल को झूठ का सहारा लेकर इस प्रकार का प्रदर्शन आयोजित नहीं करना चाहिए था।कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बिना किसी आधार के कहानी गढ़ ली। पूरी पटकथा लिख दी। आलोक वर्मा को हटाए जाने को राफेल सौदे से जोड़ दिया। कहा कि आलोक वर्मा राफेल सौदे से जुड़े कागजात इकट्ठा कर रहे थे। उन्हें जबरदस्ती छुट्टी पर भेज दिया गया। प्रधानमंत्री का मैसेज एकदम साफ है। कोई भी राफेल सौदे के इर्दगिर्द आएगा, हटा दिया जाएगा, मिटा दिया जाएगा। देश और संविधान खतरे में है।
करीब दो महीने पहले राकेश अस्थाना ने कैबिनेट सचिव से सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ रिश्वत लेने की शिकायत की थी। उन्होंने आलोक वर्मा के खिलाफ आरोप लगाया था कि उन्होंने सतीश सना को मोइन कुरैशी मामले से निकलवाने के लिए दो करोड़ रुपये लिए हैं।
अस्थाना पर आरोप है कि मीट निर्यातक मोइन कुरैशी की संलिप्तता वाले एक मामले की जांच में एक कारोबारी को राहत देने के लिए उन्होंने कथित तौर पर घूस ली थी। राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर में हैदराबाद के व्यापारी सतीश बाबू सना ने दावा किया है कि उसने सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को पिछले साल तीन करोड़ रुपये दिए थे। सीबीआई ने सतीश सना की शिकायत के आधार पर अपने विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अस्थाना ने पलटवार करते हुए सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा पर ही रिश्वत लेने का आरोप लगा दिया है।
उन्होंने आलोक वर्मा के खिलाफ रिश्वत लेने से संबंधित शिकायत कैबिनेट सचिव को भेज दिया है। बता दें कि सीबीआई के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब दो शीर्ष अधिकारी ही एक-दूसरे के खिलाफ रिश्वत लेने का आरोप लगा रहे हैं। सीबीआई ऐक्ट के सेक्शन के तहत सीवीसी के पास जांच का अधिकार है। भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच सीवीसी कर सकती है। दोनों अधिकारियों ने भी अपनी शिकायत सीवीसी को भेजी थी। सीवीसी के पास पूरा विवरण है जो अधिकारियों ने एक-दूसरे के खिलाफ दिए हैं। उसने सेक्शन आठ और सेक्शन इकतालीस के तहत सिफारिश की है कि इन आरोपों की जांच ये दोनों अधिकारी नहीं कर सकते हैं क्योंकि इन्हीं दोनों पर आरोप हैं। इसके अलावा इनके सुपरविजन में एजेंसी जांच भी नहीं कर सकती है। जबतक इसकी जांच होगी सीबीआई की निष्पक्षता के लिए उन्हें छुट्टी पर भेज दिया जाए। यह आदेश अंतरिम होगा।
जाहिर है कि इस प्रकरण पर सरकार ने उचित करवाई की है। ऐसी स्थिति में यही एकमात्र बेहतर विकल्प था। राहुल गांधी भी अपने को इस विषय तक सीमित रखते, सरकार के कदम की तर्को के आधार पर आलोचना करते तो आपत्ति नहीं कि जा सकती थी। लेकिन इसमें भी राफेल लेकर आ जाने से राहुल ने अपनी गंभीरता कम की है। उनकी भाषा और रणनीति निराश करने वाली है।







