डॉ दिलीप अग्निहोत्री
राम नाईक स्वयं कहते है कि उनको संगीत की कोई विशेष जानकारी नहीं है। बात सही भी है। पिछले साठ वर्षों से वह समाज सेवा में इतने व्यस्त रहे कि अन्य बातों के लिए समय ही नहीं मिला होगा। इसके बाबजूद संगीत और संस्कृति की सैद्धांतिक जानकारी में उनका जबाब नहीं। इसे भी वह समाज और राष्ट्रीय एकता से जोड़ने का हुनर उन्हें आता है। लखनऊ के भातखण्डे संगीत विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह में उनका यह गुण एक बार फिर देखने को मिला। वह मूलतः महाराष्ट्र के है, वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल है। दोनों प्रदेशों के संगीत को वह सांस्कृतिक सेतु के रूप में परिभाषित करते है। वैसे यह पहला अवसर नहीं है, इसके पहले अनेक बार वह ऐसी एकता के तत्वों की ओर ध्यान आकृष्ट करते रहे हैं।राजभवन में पिछले दो बार से आयोजित महाराष्ट्र दिवस का संयोजन भी उन्होंने इसी आधार पर कराया था। पहले महाराष्ट्र दिवस पर गीत रामायण की संगीतमय प्रस्तुति की गई थी। दूसरे में श्री राम, श्री कृष्ण ,की लीलाओं की मराठी शैली देखने को मिली। इसके अलावा राज्यपाल ने संगीत साधना के लिए रियाज को अनिवार्य बताया। इसका मतलब है कि राम नाईक संगीत की मूल आवश्यकता को समझते है। आजीवन विद्यार्थी रहकर साधक अधिक से अधिक सीख सकता है। यही कारण है कि शीर्ष स्तर के संगीतज्ञ भी नियमित रियाज करते है।
राज्यपाल राम नाईक ने आज भातखण्डे संगीत संस्थान अभिमत विश्वविद्यालय लखनऊ के दीक्षान्त समारोह में पीएचडी, गायन, स्वरवाद्य, तालवाद्य एवं नृत्य के लिये प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को उपाधि एवं पदक देकर सम्मानित किया। दीक्षान्त समारोह के अवसर पर उनतीस विद्यार्थियों को उपाधियाँ वितरित की गयी जिनमें नौ छात्र तथा बीस छात्राएं थी। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिये कुल सैंतीस पदकों में से नौ पदक छात्रों को तथा अठ्ठाइस पदक छात्राओं को प्राप्त हुये हैं। इस अवसर पर मुख्य अतिथि विख्यात तबला वादक पद्मश्री पंडित सुरेश तलवलकर, प्रबन्ध परिषद एवं विद्या परिषद के सदस्यगण सहित छात्र-छात्राएं एवं उनके परिजन उपस्थित थे।
राज्यपाल ने कहा कि दीक्षान्त हुआ है पर जीवन का दूसरा पड़ाव अब शुरू होगा। संगीत से जुड़े जिन विद्यार्थियों को आज उपाधि प्रदान की गयी है वे अपनी कला को संवारने के लिये निरन्तर रियाज करें। संगीत का संबंध शरीर, मन एवं आत्मा से है। मनुष्य के अंतर्मन तक पहुंचने की शक्ति संगीत में सर्वाधिक है। भारत का सांस्कृतिक परिदृश्य बहुत समृद्ध है। इसे सहेजकर रखना होगा। भारतीय संगीत को संरक्षण और संवर्धन प्रदान करते हुये आने वाले पीढ़ी को प्रेरित करने की दिशा में आगे ले जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जो रियाज करता है वही आगे बढ़ता है।
राम नाईक ने दीक्षान्त समारोह के आकड़े प्रस्तुत किये। अब तक उन्नीस विश्वविद्यालयों के दीक्षान्त समारोह सम्पन्न हो चुके है। इस वर्ष अब तक सम्पन्न दीक्षान्त समारोह में करीब नौ लाख उपाधियाँ वितरित की जा चुकी है जिनमें करीब चौवन प्रतिशत उपाधियाँ छात्राओं को मिली है जो गत वर्ष की तुलना में तीन प्रतिशत अधिक है। इसी प्रकार पैसठ प्रतिशत पदक छात्राओं ने अर्जित किये हैं। गत वर्ष पन्द्रह लाख साठ हजार विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गयी थी जिनमें इक्यावन प्रतिशत उपाधियाँ तथा छाछठ प्रतिशत पदक छात्राओं को मिले थे।
उन्होंने कहा कि महिलायें हर क्षेत्र में पुरूषों को कड़ी स्पर्धा दे रही हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण किया। कहा कि वर्तमान में महिलाओं का सशक्तीकरण प्रधानमंत्री के रूप में उनके द्वारा चलाये गये सर्वशिक्षा अभियान तथा वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का परिणाम है। महाराष्ट्र में जन्में पं. विष्णु दिगम्बर पलुस्कर और पं. विष्णु नारायण भातखण्डे ने उत्तर प्रदेश में शास्त्रीय संगीत की अलख जगायी। यह वर्ष गीत रामायण लिखने वाले प्रसिद्ध जीडी मडगुलकर तथा गीत रामायण गाने वाले श्री सुधीर फड़के का जन्म शताब्दी वर्ष है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच हुये सांस्कृतिक अनुबंध के अंतर्गत वाराणसी, आगरा और मेरठ में गीत रामायण के कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। राज्यपाल ने भातखण्डे संगीत संस्थान अभिमत विश्वविद्यालय के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किये गये राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत एवं कुलगीत की सराहना करते हुये कहा कि अन्य विश्वविद्यालय से समन्वय स्थापित करके संगीत विश्वविद्यालय के कलाकार दीक्षान्त समारोह में यही प्रस्तुति दें तो विश्वविद्यालय की ख्याति और बढे़गी।
सन् उन्नीस सौ छब्बीस में पण्डित विष्णु नारायण भातखण्डे ने राय उमानाथ बली, राय राजेश्वर बली, अन्य संगीत प्रेमियों के सहयोग से लखनऊ में एक संगीत विद्यालय की स्थापना की। इस संस्था का उद्घाटन अवध प्रान्त के तत्कालीन गर्वनर सर विलियम मैरिस के द्वारा किया गया। उन्ही के नाम पर इस संस्था का नाम मैरिस काॅलेज ऑव म्यूज़िक रखा गया। उन्नीस सौ छाछठ में उत्तर प्रदेश राज्य सरकार ने इसको अपने नियन्त्रण में लिया। इसके संस्थापक के सम्मान में भातखण्डे हिन्दुस्तानी संगीत विद्यालय नाम प्रदान किया। राज्य सरकार के अनुरोध पर भारत सरकार ने इस संस्थान को सन दो हजार में सम विश्वविद्यालय घोषित कर इसे भारत का एक मात्र संगीत विश्वविद्यालय होने का गौरव प्रदान किया।
इस प्रकार राम नाईक ने भातखण्डे के दीक्षांत समारोह को राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता के सूत्र से जोड़ने का कार्य किया। निश्चित ही यहां मौजूद संगीत के विद्यर्थियो को इससे प्रेरणा मिली होगी







