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    प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का स्मरण

    By January 4, 2019 Current Issues No Comments5 Mins Read
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    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    अंग्रेज इतिहासकारों ने अठारह सौ सत्तावन के स्वतंत्रता संग्राम को नकारात्मक और हल्के रूप में चित्रित किया था। भारत के वामपंथी इतिहासकारों ने भी इसी प्रचार को आगे बढ़ाया था। वीर सावरकर पहले विद्वान थे जिन्होंने तथ्यों के आधार पर अंग्रेजों और वामपंथियों के निष्कर्षों को ध्वस्त कर दिया। उन्होंने साबित किया कि यह देश का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था। जिसने अंग्रेजों की नींद उड़ा दी थी। फूट डालो और राज करो की रणनीति से उन्होंने अपनी  जान और सत्ता बचाई थी। इस बात उल्लेख तत्कालीन गवर्नर जनरल केनिंग ने लंदन भेजी अपनी रिपोर्ट में किया था। उसने उन भारतीय राजाओं के नाम का उल्लेख किया था जिनकी वजह से स्वतंत्रता संग्राम विफल हुआ था।
    लखनऊ में आयोजित समारोह में इस प्रथम स्वतंत्रता संग्राम और उसके सर्वोच्च कमांडर बहादुर शाह जफर का स्मरण किया गया।के स्मरण किया गया। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व बहादुर शाह जफर ने किया था। यह आयोजन उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के तत्वावधान में हुआ। इसे उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने संबोधित किया। उन्होंने समारोह में मौजूद  बहादुर शाह जफर के परपोते प्रिंस मिर्जा फैजुद्दीन बहादुर शाह जफर तृतीय का  स्वागत एवं अभिनन्दन किया। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी बहादुर शाह जफर को अपनी श्रद्धांजलि की। राज्यपाल ने कहा कि अंग्रेजी हुकूमत ने बहादुर शाह जफर को देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में सैनिकों का नेतृत्व करने के कारण मुल्क बदर कर रंगून की जेल में कैद कर दिया था। रंगून जेल में ही सात नवम्बर अठारह सौ बाँसठ को बहादुर शाह जफर की मृत्यु हो गई।
    राज्यपाल ने कहा कि छह अगस्त उन्नीस सौ सत्रह को अपनी म्यांमार यात्रा के दौरान वहां स्थित बहादुर शाह जफर की दरगाह पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने गया था। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को भी रंगून की माण्डाला जेल में रखा गया था जहां उन्होंने गीता रहस्य जैसा ग्रंथ लिखकर लोगों को जागरूक करने का काम किया। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में मुगल साम्राज्य के आखिरी बादशाह देशभक्त बहादुर शाह जफर की विशिष्ट भूमिका को देश कभी भुला नहीं सकता है।
    बहादुर शाह जफर बहुत अच्छे इंसान के साथ ही एक अच्छे शायर भी थे। उनकी पहचान एक धर्मनिरपेक्ष शासक के रूप में थी। रंगून में रहते हुए उन्हें हर वक्त हिन्दुस्तान की चिन्ता रहती थी। उनकी अन्तिम इच्छा थी कि वह अपने जीवन की अन्तिम सांस भारत में ही लें, लेकिन ऐसा सम्भव नहीं हुआ। इतिहास की यह सबसे क्रूरतम सजा थी जिसमें उनकी इच्छा को पूरा नहीं किया गया जबकि सजा पाने वाले व्यक्ति की अन्तिम इच्छा को न्यायिक प्रक्रिया द्वारा पूरा किया जाता है।
    अंग्रेजों के विरूद्ध शुरू हुए स्वतंत्रता आन्दोलन के प्रथम प्रयास का नेतृत्व बहादुर शाह जफर ने किया। उस समय हिन्दुस्तानी सेना असंगठित थी तथा नेतृत्व करने वाले में अनुभव की कमी थी। इस कारण काफी कुर्बानियां देने के बाद भी पराजय का सामना करना पड़ा। बड़ी संख्या में  युवकों को फासी दी गई तथा बहादुर शाह जफर के परिवार के सदस्यों को कैद कर लिया गया और अधिकांश लोगों का कत्ल कर दिया गया। अंग्रेज शासकों ने भारतीय सेनानियों के प्रति बर्बरता की सारी हदें उस समय पार कर दीं, जब बहादुर शाह जफर को लाल किले में कैद कर दिया और सुबह नाश्ते के वक्त बहादुर शाह जफर को उनके बेटों का कटा हुए सिर पेश किया।
    अनुमान लगाया जा सकता है कि देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने कितनी विकट परिस्थितियों और यातनाओं को झेला है। उनके बलिदानों के कारण ही आज हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं। देश की स्वतंत्रता हमें ऐसे बलिदानियों के प्रयास से मिली है जिनका लक्ष्य स्वराज था जिसे सुराज में बदलने की आवश्यकता है। देश को स्वतंत्रता दिलाने की लड़ाई सबने मिलकर लड़ी थी जिसमें हिन्दू, मुस्लिम, सिख जैसा कोई भेदभाव नहीं था। आज सबसे बड़ी जरूरत उसी एकता और सौहार्द के आधार पर भारत को फिर से विश्व गुुरू बनाने की है।
    आज के नवयुवकों को इस बात की जानकारी अवश्य होनी चाहिए कि आजादी कितने संर्घषों और बलिदान के बाद मिली।युवाओं को देश के नवनिर्माण के लिए आगे आना चाहिए। देश के नवनिर्माण के लिए युवा हमारी बहुत बड़ी पूंजी एवं मानव संसाधन है। हमें देश को विकास पर आगे ले जाने के लिये संस्कारवान युवकों का निर्माण करना है। अमर शहीदों के शौर्य और बलिदान गाथा इतिहास के पृष्ठों पर सदैव ही स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगी तथा देश की वर्तमान और भावी पीढ़ी उनके जीवन और विचारों से सदा अनुप्राणित होती रहेगी।
    राज्यपाल ने कहा कि आगामी कुम्भ मेला में प्रयागराज संग्रहालय में  अठारह सौ सत्तावन से लेकर उन्नीस सौ सैंतालीस तक के शहीदों की गैलरी लगायी जायेगी, जिसमें उनसे सम्बन्धित जानकारी भी दी जायेगी। इस प्रकार के कार्यक्रम खासतौर पर युवा पीढ़ी के लिए बहुत उपयोगी है। उनको इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि हमारे स्वतंत्रता  संग्राम सेनानियों ने देश के लिए बलिदान दिए है। वही कुछ शक्तियों के आपसी वैमनस्य और निजी स्वार्थों के कारण देश को नुकसान भी उठाना पड़ा। सदियों तक चली दासता इसी का परिणाम थी। नई पीढ़ी को एकता और अखंडता के भावना के अनुरूप कार्य करना चाहिए।

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