Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Wednesday, July 29
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    आप नास्तिक है या आस्तिक ?

    ShagunBy ShagunOctober 19, 2020 Current Issues No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    imaging
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 598

    नास्तिक होना प्रकृति प्रदत्त एक मानवीय गुण है। समाज के किसी कर्म के प्रति उदासीन रहना या उसके प्रति आकर्षित न होना यह उस व्यक्ति का एक गुण कहलायेगा। किसी भी व्यक्ति का ऐसा गुण जिससे समाज के किसी अन्य व्यक्ति प्रभावित न होता हो चाहे उस व्यक्ति द्वारा किसी भी धर्म या विचार को मानने समझने या उसका अनुसरण करने से किसी को कोई फर्ख नही पड़ेगा।

    इस दुनिया में पायी जाने वाली अनेकों पदार्थों में से कोई पदार्थ चाहे वह ठोस अवस्था मे जो या द्रव अवस्था मे हो उसका एक गुण- धर्म निश्चित होता है। इसी तरह हम में से कोई बहुत कठोर होता है तो इसके विपरीत कोई व्यक्ति स्वाभावतः बहुत नर्म होता हैं यह तो उस व्यक्ति का गुण है। इसी तरह लोहे का कठोर होना उस पदार्थ का गुण है जोकि प्रकृति प्रदत्त है और चुम्बक के प्रति आकर्षित होना उसका प्रकृति प्रदत्त धर्म है। गुण को हम बदल नही सकते हैं लेकिन धर्म को कुछ आंतरिक परिवर्तन कर बदल सकते हैं जिस प्रकार एक लोहे के अंदर विद्युत प्रवाहीत कर उसे चुम्बक में परिवर्तित कर सकते हैं। लोहा सदैव चुम्बक की ओर आकर्षित होता या चुम्बक हमेशा लोहे को अपनी ओर आकर्षित करेगा न कि लकड़ी को, आज के वैज्ञानिकी युग में शीशे के आंतरिक संरचना में कुछ परिवर्तन कर उसे भी चुम्बक बनाया जा सकता है यह एक अलग बात है लेकिन वह प्रकृति प्रदत्त नही कहलाएगा। इसी तरह हम लोगों के सामाजिक व्यवस्था मे विपरीत लिंगो के मध्य सदैव एक दूसरे के प्रति आकर्षण होना यह गुण दोनो के लिंगों अंदर प्रकृति प्रदत्त है।

    किसी भी व्यक्ति का कटु बोलना, झगड़ालू होना किसी के सत्य बोलने की आदत यह सभी हम इंसानों के अंदर पाया जाने वाला एक गुण है जो हम सभी इंसानों में समान रुप से विद्यमान रहता है जैसे देखना, सुनना, खाना, बोलना एक समान है लेकिन किसी का यह धर्म है और हमारे अंदर का धर्म जो हमारे क्रिया कलापों के माध्यम से उजागर होता है। कहने का तातपर्य यह है कि जो जैसा गुणों को धारण किये हुये है उसी सदृश्य व्यवहार भी करेगा लेकिन धर्म को कुछ बदलावो के साथ परिवर्तित किया जा सकता है लेकिन किसी भी चीज के प्रकृति प्रदत्त शुरुआती गुण या दोष को हम चाह कर भी नही बदल सकते हैं, यदि किसी की भी प्रकृति आस्तिक है तो वह हमेशा आस्तिक जैसा व्यवहार करेगा इसके उलट यदि कोई नास्तिक व्यक्ति है तो वह आस्तिकों के ठीक विपरीत नास्तिकता का कार्य करेगा। यहां यह कहना शायद व्यर्थ है कि हमारे संसार मे प्रत्येक चीजों का विपरीत होना प्रकृति का सास्वत नियम है।

    नास्तिक होने का अर्थ तर्कशील, स्वतन्त्र-चिंतक एवं विज्ञानवादी होना है। इसके अनुसार ईश्वर को नकारना ऐसे लोगों का स्वभाव है। नास्तिक होने का नैतिकता एवं मूल्यों (कथित अच्छे या बुरे) से कोई लेना-देना नहीं होता है। एक घोर नास्तिक व्यक्ति नियमों का पालन करने वाला आदर्श सामाजिक प्राणी या अपराधी भी हो सकता है। यह ठीक उसी प्रकार से है जिस प्रकार आस्तिकों के विषय में भी यही बात लागू होती है। यद्यपि एक नास्तिक व्यक्ति के तर्कशील होने के कारण उसके द्वारा नैतिक मूल्यों के पालन करने की संभावना दूसरों से अपेक्षाकृत अधिक होगी।

    वहीं एक नास्तिक व्यक्ति की राजनैतिक विचारधारा वाम/दक्षिण या कुछ और भी हो सकती है। राजनैतिक विचारों का नास्तिकता एवं आस्तिकता से कोई लेना-देना नहीं होता है। यह कतई आवश्यक भी नहीं कि नास्तिकों की कोई सार्वभौमिक आचार-संहिता हो, या उन्हें किसी भी प्रकार की साझा पहचान या झण्डे तले आने की आवश्यकता हो यदि ऐसा हुआ तो स्वतन्त्र-चिंतन का आधारभूत गुण ही स्वतः नष्ट हो जाएगा।

    यहां यह भी जरूरी नही है कि एक नास्तिक व्यक्ति अपने नास्तिकता का प्रचार करें यद्यपि ऐसा करना मानवता के हित में ही होगा लेकिन इसका एच्छिक होना ही श्रेयकर होगा।

    व्यक्ति के नास्तिक होने के उपरांत यदि कोई आस्तिकों व धार्मिकों को तुच्छ समझे या उनका उपहास करे तो यह अनुचित बात है। वह भले आस्तिकों से विचार विमर्श करे, लेकिन उनका उपहास कतई न करें।

    किसी भी व्यक्ति के नास्तिक हो जाने का अभिप्राय उसका स्वतन्त्र हो जाना है। इस बात पर नास्तिक लोग गर्व भले ही करें किन्तु इस बात पर अहंकार कदापि न करें।

    नास्तिको की पहचान मेरे लिये क्या अर्थ रखता हैं। मैन अनेकों को देखा “आहत” हृदयों को देखा कि आव देखा न ताव, बस “नास्तिक” शब्द लिखते या कहते देखा और शब्दों के बाणों की बौछार वर्षा शुरू कर दी! खैर किसी भी व्यक्ति के आस्था की कमजोर नींव पर कुठारा घात होता देख उसका मन का व्यकुल हो जाना स्वाभाविक है।

    आस्तिक शब्दावली में यहां यह कहना नितांत जरूरी है कि किसी भी चीज के खोज या सिद्ध करने के लिये हमें सबसे पहले मानना पड़ता है। किसी भी चीज को मानने में उसकी खोज या सिद्ध करने का आधार होता है। शायद हम को आपको अपने पढ़ाई लिखाई के दौरान ज्यामिति के प्रश्नों को हल करते वख्त माना कि a b c एक त्रिभुज है यह मान कर जब हम त्रिभुज को त्रिभुज सिद्ध कर देते हैं वहीं यदि आप कहें कि “माना कि” हम नही मानते है और कियूं माने तो इसका उत्तर पाना या इसे सिद्ध करना शायद अत्यंत ही दुरूह हो जाएगा। – प्रस्तुति: जी के चक्रवर्ती

    Shagun

    Keep Reading

    देह से परे, आत्मा के समीप; एक निष्काम प्रेम-यात्रा

    Dharmendra 'Pradhan' may face action

    धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: नैतिकता नहीं, भारी आक्रोश के चलते शिक्षा मंत्री पद से हटे

    “My children are inside; I am standing outside” – This hell of child labor must end now.

    ‘मेरे बच्चे अंदर हैं, मैं बाहर खड़ा हूँ’ – बाल श्रम की इस नरक को अब बंद होना चाहिए

    the-nations-future-on-the-streets-of-delhi

    दिल्ली की सड़कों पर देश का भविष्य!

    क्रूर नियति के बीच हमारी क्रूरता और उम्मीद की कुछ किरणें

    The battle between development and the environment in Uttarakhand.

    उत्तराखंड में विकास बनाम पर्यावरण की जंग

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts

    पश्चिम बंगाल राज्यसभा उपचुनाव: कुलदीप माइती की अहम भूमिका, भाजपा टिकट पर लड़ सकते हैं चुनाव?

    July 28, 2026

    मोदी जी का सिपाही! रूपेश पाण्डेय की मेहनत रंग लाई, बिहार में गूंज रहा नाम

    July 28, 2026

    देह से परे, आत्मा के समीप; एक निष्काम प्रेम-यात्रा

    July 28, 2026

    McVitie’s की पैरेंट कंपनी का 2030 तक बेहतर न्यूट्रिशन वाले प्रोडक्ट्स की सेल दोगुनी करने का लक्ष्य

    July 28, 2026
    Mojtaba Khamenei's open support for Hezbollah.

    मोजतबा खामेनेई का हिजबुल्लाह को खुला समर्थन

    July 28, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading