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    Home»ब्लॉग»Current Issues

    आप हमारे घर के बुजुर्ग ही नहीं धरोहर भी

    ShagunBy ShagunAugust 25, 2020 Current Issues No Comments4 Mins Read
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    आपके लिए दिल से : जी के चक्रवर्ती

    विश्व इतिहास में 21 अगस्त का दिन अपना एक अलग महत्व रखता है, क्योकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनायें विश्व में घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गईं हैं। अभी पिछले ही दिनों 21 अगस्त 2020 के दिन अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस के रूप में मनाया गया। अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस को “वर्ल्ड सीनियर सिटीजन” दिवस, हमारे देश के ही नही बल्कि पूरी दुनिया के सभी बड़े-बुजुर्गों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए प्रति वर्ष 21 अगस्त के दिन “सीनियर सिटीजन” दिवस के रूप में मनाये जाने की शुरुआत अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति “रोनाल्ड रीगन” द्वारा इस दिन को देश-दुनिया के सभी सीनियर सिटीजन्स को समर्पित करते हुये इस दिन को मनाये जाने की शुरुआत की है। प्रति वर्ष 21 अगस्त के दिन हम और आप सभी लोग यह कोशिश अवश्य करें कि अपने परिवार के साथ ही साथ हमारे आस-पास रहने वाले सभी वरिष्ठ नागरिक जनों का आदर और सम्मान करें।

    हमारे भारत देश मे सयुंक्त परिवारों का चलन बहुत लम्बे समय तक रहा आज भी इक्का दुक्का सयुंक्त परिवार हमारे देश मे मिल जायेंगे इन संयुक्त परिवारों में बड़े- बुजुर्ग सर्वदा परिवार के मुखिया के तौर पर एक सम्मानीय व्यक्तित्व रहे है। लोगों के घरों में परिवार के प्रत्येक सदस्य को एक सूत्र मे पिरोये रखने का काम उन्ही के द्वारा किया जाता है ही साथ ही घर के प्रत्येक सदस्य को हमेशा यह आनुभव होता रहता है कि अरे थोड़ा सावधान दादा या दादी बैठी हैं घर परिवार के मान मर्यादाओं की रक्षा सदैव इन्ही बुजुर्गों ने किया है।

    हम हमारे घर के बड़े- बुजुर्गों की अहमियत इसी बात से लगा सकते है कि उनके पास हमारे बैठने मात्र से हमारे अंदर एक स्नेह आच्छादित छत्र-छाया सा अनुभव करके अपने ऊपर किसी बृद्धस्थ हाथ होने का आभास करने लगते हैं।

    जी हां आज के इस भाग-दौड़ वाली अत्याधुनिक समय मे हम अपने फोन के इंटरनेट से प्रत्येक तरह की जानकारीयां कुछ ही पल मे हासिल कर लेते है ,लेकिन अच्छे संस्कार, विचार एवं व्यवहार करने की सीख हमे हमारे परिवार के इन बुजुर्ग सदस्यों से ही आज तक प्राप्त होता आया हैं, इसके अतिरिक्त हमारे घर के बच्चों को अनेको तरह की नैतिकता पूर्ण शिक्षाप्रद कहानियां सुना कर उनके बौद्धिक विकास के साथ ही साथ चरित्र निर्माण करने जैसा काम भी वे करते रहे हैं। परिवार में रिश्तों की अहमियत से लेकर अनुभवों का खजाना समेटे स्नेह का भंडार इन बड़े-बुजुर्गों का धरोहर होता है। अपनी कंपकपती लड़खड़ाती अंगुलियों से घर के नन्हे मुन्नों से लेकर युवा लोगों तक को अपने आशीर्वाद के ऊर्जा से परिपूर्ण करते रहते है। ऐसे संस्कारो एवं आचरणों का भंडार हमारे घर के बड़े-बुजुर्गो के पास ही होते हैं।

    आज विशेषकर हमारे देश के वरिष्ठ नागरिकों की स्थिति को लेकर हमेशा से यह सवाल खड़े होते रहते हैं कि देश में बुजुर्गों के साथ घटने वाली अपराधिक घटनाओं की संख्या में इजाफा होता चला जा रहा है। बृद्धावस्था के कारण हमारे बड़े-बुजुर्गों का तन तो उनका साथ छोड़ने लगता है ऐसे में उन्हें बीमार पड़ते देर नही लगती है और उस वख्त घर के बुजुर्गों का को खास तरह की देखभाल की जरूरत पड़ती है। हमारे देश मे वर्ष 2011 में हुये जनगणना के अनुसार 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले बृद्ध जनो की जनसंख्या लगभग 104 करोड़ थी। जिसमे 51 करोड़ की आवादी पुरुषों की और 53 करोड़ महिलाओं की थीं। एक अनुमान के अनुसार देश मे इस वक्त 125 से 150 करोड़ के आस पास बुजुर्ग नागरिक होंगे।

    हमारे देश के इतिहास में अनेकों ऐसे उदाहरण है कि श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता को काँवड़ में बैठा कर चारोंधाम की तीर्थ यात्रा कराने निकल पड़ते हैं तो दूसरी तरफ अपने माता-पिता के आज्ञा से भगवान श्रीराम ने समस्त राजपाट त्याग कर वनों में विचरण करते रहे वहीं पर आज के समाज में वृद्ध माता-पिता एवं उनके बच्चों के मध्य इतनी दूरियां बढ़ती चली गयी हैं कि वृद्ध माता-पिता अपने ही परिवार में अपनों से कटे रहने पर मजबूर है। बहुधा वे इस बात से सर्वाधिक नाराज रहते है कि जीवन का विषाद अनुभव होने के बावजूद कोई उनकी राय न तो लेना चाहता है और न ही उनकी राय को महत्व देता है।

    आज हमारे बुजुर्गों को समाज में अहमितय न दिये जाने के कारण हमारा वृद्ध समाज दुःखी, उपेक्षित एवं त्रासदी पूर्ण जीवन जीने को मजबूर है किसी भी राष्ट्र के लिये जितना महत्वपूर्ण उसके युवा वर्ग के लोग हैं उतने ही महत्वपूर्ण देश के बुजुर्ग भी है जो अपने ज्ञान और अनुभवों से देश के भभिष्य कहलाने वाले जुवा पीढ़ीयों का मार्ग दर्शन कर सकें।

    Shagun

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